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Showing posts from April, 2021

सिंधू नदी और सिंधुघाटी सभ्यता का नामकरण सम्राट सिद्धचानो जी के नाम पर।

।।सिंधू नदी और सिंधुघाटी सभ्यता का नामकरण सम्राट सिद्धचानो जी के नाम पर।। इतिहास गवाह है कि, अनादिकाल से ही धरती अंतरिक्ष के उपादानों, स्थानों, नदियों, नवग्रहों के नामकरण, विशेष महापुरुषों के नाम पर ही हुए हैं। आद और उस की संतान जुगाद के नाम को गुरु रविदास जी महाराज ने, अपने मूलमंत्र में शामिल किया हुआ है, जिस से स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि, जुगाद आदपुरुख की संतान हुई है। इसी तरह ही आदपुरुष के ही वंश में सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज हुए हैं, जिन के नाम सिद्धचानो शब्द को अमर करने के लिए ही लद्दाख से निकलने वाली नदी का नामकरण भी सिंधू नदी और सिंधुघाटी सभ्यता रखा गया है, इसी तरह ही कैलास पर्वत का नामकरण भी सम्राट सिद्धचानो जी महाराज के पिता श्री के नाम पर कैलास पर्वत रखा गया है। उन के ही दरबारी बाबा पहाड़िया हुए हैं, जिन के नाम को भी भ्रान्तिमय बना दिया गया है मगर उन के एक मंत्र से ज्ञात हो ही जाता है कि वे भी मक्का से शासन चलाने वाले सम्राट चानो जी महाराज के क्षत्रप मणिमहेश के महाराजा हुए हैं। उन के ही नाम से हिमाचल नामकरण हुआ था, जिस को भी संदेहास्पद बना दिया गया। मंत्र में लिखा गया है कि:-...

आदधर्म का साम्राज्य मक्का से लेकर कन्याकुमारी तक फैला था।।

।।आदधर्म का साम्राज्य मक्का से ले कर कन्याकुमारी तक फैला था।। विश्व के किसी भी देश में वह नहीं मिलता है जो भारत के हर कोने कोने में मिलता है। छः ऋतुएँ बारी बारी आती हैं और एक दूसरे के प्रकोप को भगा देती हैं, कभी गर्मी कभी सर्दी कभी आर्द्रता आती ही रहती हैं। इसी सुहावने वातावरण के बीच हमारा विशाल भारत अपना मस्तक ऊँचा कर के समूचे विश्व के सारे लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है। साऊदी अरब की राजधानी मक्का तत्कालीन विशाल भारत के सम्राट कैलाश जी महाराज की भी राजधानी हुआ करती थी। जब से यूरेशियन आक्रांताओं ने भारत पर घातनीति से कब्जा किया हुआ है, तब से ही पवित्र मक्का आदवंशियों से छीन लिया गया है, उस के बाद विशाल भारतवर्ष के खण्ड खंड होते गए, ईरान इराक आदि मुस्लिम मुल्कों में बांटे जाने के बाद केवल काश्मीर से लेकर  नेपाल, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, थाईलैंड बर्मा बांग्लादेश के विभाजन से भारत देश केरल कन्याकुमारी तक सिकुड़ चुका है। जिसे फिर भी यूरेशियन आक्रमणकारियों ने मूलनिवासियों से छीन लिया है। आदवंशियों का निवास:---विशाल भारतवर्ष में केवल आदपुरुख के वंशजों का ही निवास था। भारत देश की विशेष...

सन्त विजेंद्र प्रधान बनारस ज्योतिजोत समा गए!!

।।सन्त विजेंद्र प्रधान बनारस ज्योतिजोत समा गए!! प्रकृति भी बड़ी विचित्र है कि, चाहे कोई प्राणी कितना ही श्रेष्ठ हो मगर उस को अपने आगोश में एक ना एक दिन समा ही लेती है और उस को पंच तत्व में मिला कर ही छोड़ती है! सन 1949 ईस्बी को बनारस की पवित्र धरती के ऊपर, गुरु रविदास जी महाराज ने, एक बालक को बनारस के आददुआरे की देखभाल और उस की देखरेख के लिए जन्म दिया था, जिस का नाम था विजेंद्र जी। 1968 में बनारस महाविद्यालय से बीए की उपाधि लेते लेते ये वीर बालक मनुवादियों की गुंडागर्दी से आहत होता हो गया और अछूत वहू बेटियों के साथ होने वाले क्रूर, अपमानजनक व्यवहार से दिन रात परेशान रहने लगा था। कुछ समय तो ये बालक गुंडों की हरकतों को बर्दाश्त करता रहा मगर जब गुरु रविदास जी महाराज के पवित्र आददुआरे में ही गुडंडे गंदगी फैलाने लगे तब इस बालक की सब्र  की सीमा समाप्त हो गई और गुंडों का मुकाबला करने के लिये इस विजेंद्र नामक बालक ने भी अपने महाविद्यालय के चमार साथियों की एक शरीफ गैंग बना ली और फिर लगे मनुवादी गुंडों की धुनाई करने। इस सीधी कार्यवाही का मनुवादी गुंडों पर आतंक भी छाने लगा जिस से गुरु रविदास जी महा...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन का महत्वपूर्ण निर्णय राष्ट्रीय संघर्ष समिति।।।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन का महत्वपूर्ण निर्णय राष्ट्रीय संघर्ष समिति।। भारतवर्ष में कोई भी राष्ट्रीय संघर्ष समिति नहीं है जो भारत के मूलनिवासियों के साथ होने वाले अत्याचारों, अनाचारों जिन में सब से नृशंसता भरे माब्लिंचिंग, लड़कियों की हत्या कर के अज्ञात स्थानों पर जला कर, उन के सबूत नष्ट करने, गुरुओं के आददुआरों को गिरा कर ध्वस्त करने, उन की संपतियों को छीनने के बदले में उन का संज्ञान लेने के लिए कोई भी राष्ट्रीय स्तर पर आवाज बुलंद करने वाली संघर्ष समिति नहीं थी, जिस कमी को समाप्त करने के लिए, चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन के समापन पर, एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया जिस के अनुसार मूलनिवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, अत्याचारियों के खिलाफ सीधी कार्यवाही करने के लिये और राज्यों व केंद्रीय सरकार से बार्ता करने के लिए राष्ट्रीय संघर्ष समिति का गठन किया गया है, जिस के लिए निम्नलिखित माननीय कार्यकारी सदषयों को चुना गया:--- संयोजक रामसिंह आदवंशी हिमाचल प्रदेश। तरसेम सहोता महाप्रबंधक नङ्गल पंजाब। आदधर्म गुरु श्री आरएन आदवंशी, पीतमपुरा दिल्ली। श्री विद्या प्रकाश कु...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। दस अप्रैल 2021 प्रातः नौ बजे गाँव खठमी, जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन के दूसरे दिन, भारतीय हिस्सा आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विद्या प्रकाश कुरील जी सिकंदरावाद, तेलंगाना प्रदेश की अध्यक्षता में अधिवेशन का उदघाटन, सन्त शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज के समक्ष, श्री नरेन्द्र जस्सी जी अध्यक्ष सैंट्रल कमेटी गुरु रविदास सभा दिल्ली ने दीप प्रज्ज्वलित कर के किया। रामसिंह आदवंशी हिमाचल प्रदेश ने, दूसरे दिन के अधिवेशन का एजेंडा प्रस्तुत करते हुए कहा कि, आज हम जिन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे वे निम्नलिखित हैं:--- 1 मूलनिवासियों के लिए एक धर्म, एक धर्मग्रँथ और एक पंथ सुनिश्चित करना पहला विचारणीय विषय है। 2 धर्म स्थानों की एकता किस प्रकार सुनिश्चित की जाए? 3 निशान साहिब, आरती, मूलमंत्र, अरदास की राष्ट्रीय स्तर पर स्थापना करने के लिए चिंतन करना। 4 मनुवादियों ने स्वर्ग नरक, पुनर्जन्म का आतंक फैला कर मानव भयभीत कर के रखा हुआ है, जिसे जहन से निकाल कर, केवल और केवल वर्तमान जीवन को ही सुखमय स्वर्ग बनाने के लिए तर्कसंगत सत्स...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन का घोषणा पत्र।।।।

।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन का घोषणा पत्र।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन के दूसरे दिन, मूलनिवासियों की ज्वलंत समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जिस में बड़े दुख से कहा गया है कि, चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो उस में मूलनिवासियों को माब्लिंचिंग के द्वारा मारा जाता है और माब अथबा भीड़ की आड़ में, कातिल मनुवादियों को कोर्ट राहत देकर सजाए मौत नहीं देता है और ना ही किसी को फांसी पर लटकाता है। आजादी के चौहत्तर वर्ष बीत जाने पर भी मूलनिवासी दूल्हों को घोड़ी पर चढ़ कर बारात ले कर जाने से रोका जा रहा है। आज भी छुआछूत का बोलबाला है। मूलनिवासी वहू बेटियों के साथ बलात्कार कर के मौत के घाट उतार कर जिंदा भी और मार कर भी जला रहे हैं, मगर मनुवादी कोर्ट कभी भी न्याय नहीं देते आए हैं, बन्धुआ मजदूरी को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान सरकार ने मजदूरों का खून चूसने व उन्हें समय से पहले मारने के लिए काम करने का समय भी आठ घण्टों से बढ़ा कर बारह घण्टे कर दिया है, जो आमानवीय निर्णय लेकर लागू कर दिया गया है। मूलनिवासियों, मुसलमानों, ईसाईयों, सिखों को बड़ी बुरी तरह नृशंसता से जलाया जा रहा है...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। अदमाधाम क्या है?:---अदमाधाम आदपुरुख का ऐसा स्थान है, जहाँ पर जीवन मरण, दृश्य और अदृश्य कहीं नहीं है अर्थात वह निरंकार है।कुदरत और नश्वरता उस महा खुखलान खुदा की दो भुजाएँ हैं। कुदरत जीवन का संपोषण करती है और नश्वरता विनाश करती है। अदमाधाम की गोदी में प्रेहपुरहन्त सृष्टि, अंड और करोड़ों देव अगमों व गमों का बसेरा है। देव अगमों में करोड़ ज्योतिर्मंडल एवं करोड़ों करोड़ों गगन व आकाश हैं। आकाशों में भी करोड़ों, करोड़ों धरती, सूर्य, चांद, सितारे और आकाशगंगाएं बसी हुई है। आदपुरुख निरंकार अदमाधाम का शब्द शक्ति बल है। शब्द से ही सब कुछ सृजित हुआ है। शब्द में अदभुत आकर्षण शक्ति का समावेश है। अपने शब्द शक्ति बल से आदपुरुख ने, सम्पूर्ण सृष्टि, अंड तथा सर्वदेव अगमों-गमों एवं सर्व ज्योतिरमण्डलों को ठहराया हुआ है। यदि यह शब्द शक्ति बल नहीं होता तो सारे ज्योतिर्मंडल, आकाश, आकाश गंगाएं, धरती, सूर्य, चांद, तारे और सितारे सब के कब के विलीन हो चुके हुए होते। सर्प्रथम शून्य था:---अरबों वर्ष पूर्व जब कहीं भी प्रकाश नहीं था, केवल अंधेरा ही अंधेरा था, तब अंधेरे में पार ज्योतिर्माया...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। नौ अप्रैल 2021के सायं सात बजे चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन का समापन करते हुए आद धर्म गुरु आरएन आदवंशी जी महाराज ने, अपने अध्यक्षीय संबोधन में, अपने विचार रखते हुए कहा, कि मैं रामसिंह आदवंशी जी का तो सब से पहले आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद करता हूँ कि, इन्होंने अपने खर्चे पर आदधर्म अधिवेशन आयोजित कर के हम सब को यहाँ इकठ्ठा किया है। मेरे लिए ये भी अति सौभाग्य का विषय है कि, मुझे इस ऐतिहासिक आदधर्म अधिवेशन की अध्यक्षता करने का भी शुभ अवसर मिला है। सभी राज्यों से आए प्रतिनिधियों का भी मैं स्वागत करता हूँ, कि आप ने इस सम्मेलन को सफल बना कर, भावी पीढ़ियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए विचार मंथन किया है, आप ने सारा दिन बिंना एक क्षण बर्बाद किये यहाँ बैठ कर जो कर्तव्यपरायणता दिखाई है, लगन से विचार गोष्ठी को सफल बनाया है, उसे इतिहास हमेशा अपने आँचल में संजोए रखेगा। आदपुरुष से चली आ रही मानव सभ्यता को उस समय ग्रहण लग गया था, जब भारतवर्ष के मूलनिवासियों को आर्यों ने छलबल से गुलाम बना लिया था। आदपुरुष से चले आ रहे आद धर्म को भी इन्हीं आक्रांताओं ने मलियाम...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। गाँव खठमी जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में, आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी जी महाराज की अध्यक्षता में चल रहे, चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन में श्रीमती बीना कुरील जी निवासी सिकंदरावाद शहर, तेलंगाना प्रदेश ने आदधर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए आज कहा कि, आदधर्म गुरु रविदास जी महाराज का बताया हुआ धर्म है, उन्होंने लिखा हुआ है कि:--- आद से प्रगट भयो जा को ना कोऊ अंत।आदधर्म गुरु रविदास का जाने बिरला सन्त।। गुरु रविदास जी महाराज ने साफ साफ शब्दों में वर्णन किया हुआ है कि, आदिपुरुष से आदधर्म प्रकट हुआ है, जिस का कोई भी पारावार नहीं है। कोई भी आदधर्म का आरंभ और अंत नहीं जान सकता है, केवल कोई बिरला ही ईश्वरीय विचारधारा को समझने वाला धार्मिक व्यक्ति ही समझ सकता है, फिर समझ में नहीं आ रहा है कि, क्यों लोग अनेक धर्मों का सृजन करते जा रहे हैं, भारत में क्यों मूलनिवासियों को बांटते जा रहे हैं। क्यों आदमी को आदमी का धर्म के नाम पर बैरी बनाया जा रहा है। पांच हजार वर्ष पहले यही एक धर्म भारत में था। इसी पवित्र आदधर्म को लोग मानते थे, इसी से सारा भारत एकजुट हो कर रहता था ...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। नौ अप्रैल 2021 से शुरू हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन की अध्यक्षता आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी दिल्ली को संबोधित करते हुए पूर्व बैंक प्रबंधक श्री पीसी भाटिया जी कहा कि, धर्म मानव को मानव से ही नहीं सारे प्राणिजगत से जोड़ता है। धर्म मेरे विचारानुसार तर्कसंगत, सदविचारों के समूह को कहते हैं, जिनके कारण ही व्यक्ति सभ्य सुसंस्कृत ईमानदार, और आदर्श व्यक्ति कहलाता है। ऐसे व्यक्ति ही विश्व में याद किये जाते हैं। ऐसे व्यक्ति ही विश्व में पूजनीय होते हैं मगर कुछ को इतिहास मिट्टी में ही मिला देता है, जिस के पीछे उस उच्छृंखल व्यक्ति का कटु व्यवहार, अबगुण और विचार ही होते हैं। धार्मिक व्यक्ति ही आदर्श धर्म का वाहक, सभ्य समाज का निर्माता होता है। ऐसे व्यक्ति सफल और आदर्श शासक कहलाते हैं, इसीलिए व्यक्ति का धर्म के प्रति रुझान, आकर्षण और प्रेम होना अति आवश्यक है। धार्मिक शासक ही जनता के दिलों पर शासन करते आए हैं और भविष्य में भी ऐसे हो लोग पूज्य होंगे। आज हिमाचल प्रदेश में आदधर्म का चल रहा, राष्ट्रीय अधिवेशन इस दिशा में महत्वपूर्ण रोल निभाएगा ऐसा मेरा मानना है और...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन के अध्यक्ष आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी को संबोधित करते हुए, रामसिंह आदवंशी ने कहा कि, सन 1931 की जनगणना में 485000 मूलनिवासी जनता ने अपना धर्म "आदधर्म" लिखा था मगर स्वतंत्रता के बाद जब संविधान लिखा गया है, तब आदधर्म को जनगणना से बाहर कर के, जनगणना फॉर्म में से आदधर्म का कॉलम खत्म कर दिया गया है। संविधान के निर्माताओं ने आदधर्म को एक नई जाति आदधर्मी के रूप में, संविधान में लिख दिया है, पंजाब, दिल्ली में तो जाति प्रमाण पत्र में भी आदधर्मी ही लिखा जाता रहा, जब कि भारत देश के राज्यों में अनुसूचित जाति, जनजाति प्रमाण पत्र बनाया जाता है। दिल्ली के कट्टर मनुवादी मुख्यमंत्री ने ये शब्द भी मिटा कर अनुसूचित लिखवाना शुरू कर दिया है जो पुनः आदधर्म के इतिहास को मिटाने का एक वहुत बड़ा षडयंत्र फिर कर दिया है। मूलनिवासी महापुरुष भी मनुवादियों के दबाब में ये अन्याय होते देखते आ रहे मगर आज जरूरत है कि हम स्वतंत्र रूप से चिन्तन कर के आदधर्म के साथ किये गए छल को समझें और मंथन कर के खोए हुए अधिकार को पुनः प्राप्त करें। ये आदधर्म अधिवे...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी जी महाराज दिल्ली की अध्यक्षता में चल रहे आदधर्म अधिवेशन में नौ अप्रैल को भावना शुक्ला ने, देश विदेश से आए आदधर्म मंडल के डेलीगेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि, सभी धर्मों को छोड़ कर केवल एक ही आदधर्म को जब तक अपनाया नहीं जाएगा, तब तक समस्त विश्व में सद्भावना, समरसता, शान्ति, स्नेह कदापि पैदा नहीं हो सकते हैं। आज धर्म केवल खून खराबे, कत्लेआम, माब्लिंचिंग, अत्याचारों के प्रतीक बन चुके हैं, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी सभी आपस में दुश्मन बने हुए हैं, जब कि धर्म का कार्य ही आपस मे प्यार, एकता, सहिष्णुता, हमदर्दी, एक दूसरे के सुख दुख में सुख और दुख को बांटना सिखाता है। आए दिन एक धर्म के ठेकेदार दूसरे धर्म के लोगों को पशुओं की तरह पीटते, मारते, घसीटते, कत्ल करते हुए सुने जा रहे हैं, ये तभी हो रहा है जब ये अनेकों धर्म बने हुए हैं। यदि  एक धर्म होता तो कोई किसी के खून का प्यासा नहीं होता और ना ही कोई किसी का अहित ही करता और ना ही कभी सोचता है। सुना है कि सन 1931 की जनगणना में सभी धर्मों के बुद्धिजीवियों, बुद्धिमान महापुरुषों और व...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। गांव खठमी जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में, आदधर्म गुरु श्री आरएन आदवंशी की अध्यक्षता में चल रहे, चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन में बोलते हुए दिल्ली सैन्ट्रल कमेटी गुरु रविदास सभा के महासचिव श्री अक्षय आदवंशी जी ने कहा कि, आज का दिन सारे विश्व के लिये एक महान दिन सिद्ध होगा, क्योंकि गद्दरी बाबा साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी के उपरान्त आज ही मूलनिवासियों को राष्ट्रीय स्तर पर एकत्र किया गया है, आज हमारे लिए ही नहीं अपितु सभी मूलनिवासी भारतीयों के लिए सौभाग्यशाली दिन है कि, क्रान्ति की बुझी हुई चिंगारी पुनः सुलगने लगी है जिस से भविष्य में विश्व के लिए अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे। नंदगढ़ से आदधर्म का शंखनाद:---हम ने पंजाब के गाँव नंदगढ़ महिलांवाली में गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के रचयिता स्वामी ईशरदास महाराज की पवित्र नगरी से विश्व आदधर्म की पुनर्स्थापना का शंखनाद दो हजार सात से शुरू किया है, वहीं पर आदधर्म सन्त सम्मेलनों की शुरुआत भी की थी, उसी पावन धरती पर हम ने आदधर्म का भी मुख्यालय बनाया है। यही वह पवित्र नगरी है जहाँ स्वामी ईशरदास जी महाराज और माते...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। नौ अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर में, आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी जी महाराज की अध्यक्षता में, चल रहे चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन में, तेलंगाना प्रदेश से शिरकत कर रहे विशिष्ट अतिथि हिस्सा आंदोलन के अध्यक्ष श्री विद्या प्रकाश कुरील जी ने, अधिवेशन में बुलाने के लिए, रामसिंह आदवंशी का आभार प्रकट किया और अधिवेशन की सफलता की कामना करते हुए कहा कि, साहिबे कलाम मंगू राम जी मुगोवालिया एक दृढ़ इरादे वाले महापुरुष हुए हैं, वे निःस्वार्थी, निर्भीक वीर स्वतंत्रता सेनानी मूलनिवासी भारतीयों के मसीहा थे। उन्होंने जो आदधर्म मंडल के झंडे तले आदधर्म आंदोलन चलाया था, वह हमेशा ही इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। आप का भी इस अधिवेशन में भाग लेना इतिहास के पन्नों पर हमेशा बना रहेगा। हिमाचल प्रदेश की सुरम्य पहाड़ियों, पहाड़ों, नदी, नालों की अद्वितीय सुंदर स्वरलहरियों की मधुर संगीत भरी धुनों के बीच आज जो मूलनिवासियों की मुक्ति के लिए विचार मंथन चल रहा है, वह प्रशंसनीय ही नहीं महत्वपूर्ण भी है। रामसिंह आदवंशी जी ने भारत के मूल निवासियों में सद्भावना ...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। हिमाचल प्रदेश में जिला हमीरपुर के गाँव खठमी में, आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी की अध्यक्षता में चल रहे, ऐतिहासिक आदधर्म अधिवेशन में, श्री नरेन्द्र जस्सी प्रधान सैंट्रल गुरु रविदास सभा दिल्ली ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि, आज नौ अप्रैल 2021 का शुभ दिन आदधर्म के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। श्री रामसिंह आदवंशी जी ने, भारत के कोने कोने से आदधर्म के पैरोकारों को देवभूमि हिमाचल प्रदेश में बुला कर सामाजिक समरसता और मूलनिवासी एकता स्थापित करने के लिए वहुत बड़ा आयोजन किया है, हमें बुला कर हिमाचल प्रदेश की सुरम्य धरती के दर्शन करने का भी शुभ अवसर प्रदान किया है, जिससे हम भी कृतकृत्य हो गए हैं। आज जो यहां हम सामूहिक रूप से एकत्र हुए हैं, इस शुभ घटना को इतिहास हमेशा याद रखेगा। मैं सब का आदधर्म सम्मेलन में शिरकत करने के लिए धन्यवाद करता हूँ और इस के सफल आयोजन की वहुत वहुत वधाई देता हूँ। पंजाब की धरती के महान सपूत साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी ने, परतंत्रता में भी वह कर दिखाया है, जो परवर्ती नेता नहीं कर पाए हैं। हम तो गुलामों के गुलाम थे, हम तो ...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। सन्त राम मूर्ति महाराज ने, आदधर्म अधिवेशन के अध्यक्ष आरएन आदवंशी जी महाराज को संबोधित करते हुए कहा कि, आदधर्म ही वैश्विक धर्म था, अब भी विद्यमान है और भविष्य में भी रहेगा, भले ही कुछ लोगों ने आदधर्म को मिटा कर नए धर्मों के संस्थापकों के रूप में अपना नाम अमर कर लिया है, मगर ये धर्म चिरस्थाई नहीं है। जब आदिपुरुष पुनः सत्ता में आएंगे तब आदधर्म ही विश्व में चलेगा। स्वामी ईशरदास जी महाराज फरमाते हैं कि:--- पछमो दखन जावसी, दखनों पूर्व आवसी।। होशियार पुर नजदीक नंदगढ़ डेरे लावनगे। स्वामी ईशरदास जी महाराज ने कहा है कि, जब स्वयं आदिपुरुष प्रकट हो कर आदधर्म का झंडा लहराने के लिए आएंगे तब वे पहले पश्चिम दिशा की ओर से दक्षिण की ओर जा कर जगन्नाथपुरी में नमन कर के, पूर्व दिशा की ओर आएंगे और हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के धार्मिक स्थल रिवालसर में नतमस्तक हो कर, पुनः हमीरपुर होते हुए, होशियार पुर के नजदीक पवित्र स्थल नंदगढ़ आएंगे, जहां से ही वे राजपाठ चलाएंगे। आदिपुरुष के शासन में, निठल्ले और हरामखोर लोगों का जीवन दुश्वार हो जाएगा। दुश्वारियों को निठठले बैठ कर खाना, खान...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। नौ अप्रैल 2021 को हिमाचल प्रदेश के गाँव खठमी जिला हमीरपुर में, आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी जी महाराज की अध्यक्षता में  चल रहे दो दिवसीय आदधर्म अधिवेशन में, कनाडा से आए श्री सतविंद्र जी ने अपने विचार प्रकट करते हुए, सबसे पहले आदधर्म सम्मेलन का आयोजन करना के लिए श्री रामसिंह आदवंशी का हार्दिक धन्यवाद किया और इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए वधाई दी। अध्यक्ष को संबोधित करते हुए श्री सतविंद्र जी ने बताया कि मुझे उस समय बड़ी प्रसन्नता हुई थी जब मैंने फेसबुक पर पढ़ा कि, नौ दस अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर में आदधर्म सम्मेलन हो रहा है, जिस की जानकारी लिए हम ने रामसिंह आदवंशी को फोन कर के सम्पर्क किया, इस सम्मेलन में भाग लेने का सुअवसर भी रामसिंह जी ने मुझे दिया है, जिस के लिए में इन का अति धन्यवादी हूँ। ऐसे सुअवसर कोई बिरला ही समाजसुधारक और समाज सेवी उपलब्ध करवाता है, जिस का सीधा लाभ समाज को होता है। मुझे तो आदधर्म के बारे में कोई खास ज्ञान नहीं था, किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं थी मगर आज यहाँ आ कर जो सुनने का अवसर मिला है उस से ज्ञात हुआ कि, मेरे पंजाब के ही...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर में, नौ अप्रैल को आदधर्म गुरु श्री आरएन आदवंशी महाराज दिल्ली की अध्यक्षता में चल रहे दो दिवसीय आदधर्म अधिवेशन में बोलते हुए, जिला ऊना के गाँव धर्मपुर के निवासी अश्वनी भारद्वाज ने कहा कि हमारी चमार जाति धर्मों के कारण कन्फ्यूज हो चुकी है क्योंकि चमार जाति को ही क्रिश्चियन इस्लाम, बुद्ध, सिख, जैन और राधास्वामी आदि अनेकों धर्मों में तोड़फोड़ कर के इन में शामिल किया जा रहा है। आजकल एक और नया धर्म चर्चा का विषय बना हुआ है, जिस ने फिर मूल निवासी साधु, संतों, पीर, पैग़ंबरों को बांट दिया है। युवा पीढ़ी को भटकाया जा रहा है, युवाओं को ये समझ नहीं आ रहा है, कि कौन सा धर्म अच्छा है? कौन सा नहीं। अब तो कुछ युवा धर्म कर्म को ढकोसला मात्र ही समझ रहे हैं, जिस के कारण उन का इन का इन धर्मों से विश्वास उठता हुआ नजर आ रहा है। गुरु रविदास जी महाराज ने भले ही कहा है कि:--- आद से प्रगट भयो, जाको ना कोऊ अंत। आदधर्म गुरु रविदास का, जाने बिरला सन्त। इन पंक्तियों से तो स्पष्ट विदित होता है कि, आद से ही आदधर्म के संकेत मिलते हैं, गुरु रविदास जी महाराज ...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन। श्री तरसेम सहोता निवासी नंगल पंजाब ने, गांव खठमी, जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में, आदधर्म गुरु दिल्ली की अध्यक्षता में चल रहे चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन में नौ अप्रैल को अपने विचार रखते हुए कहा, कि विश्व में केवल मात्र आदधर्म ही प्रकृति के उसूलों पर आधारित धर्म है। आदिपुरुष ने ही आदधर्म की नींव रखी हुई है। उन्हीं से चली हुई वंशावली में उन का बेटा जुगाद हुआ था, जुगाद का बेटा नील, नील का बेटा कैल, कैल का बेटा चंडूर था, चंडूर का बेटा मंडल, मंडल का बेटे कैलाश हुए थे, कैलास का बेटा सिद्धचानो जी महाराज हुए हैं। यही वह वंश है जिस में सभी सम्राट सिद्ध पुरूष हुए हैं, जिन की शक्तियों का लोहा सारा संसार मानता आया है। इन्हीं सत्पुरुषों द्वारा स्थापित आदधर्म है, जिसे यूरेशियन लोगों ने मलियामेट कर रखा है। पांच हजार सालों से इस वास्तविक ही नहीं अपितु तार्किक धर्म को स्वतंत्रता सेनानी एवं साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया ने पुनः जीवित किया है। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी ने सन 1924 में सारे भारत का भ्रमण कर के अछूतों को एक मंच पर इकठ्ठा करने के ल...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन।। आदरणीय आरएन आदवंशी आदधर्म गुरु दिल्ली की अध्यक्षता में चल रहे, ऐतिहासिक अधिवेशन में नौ अप्रैल को राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन का मुख्य विषय था "आदधर्म को विश्व में किस प्रकार प्रचारित एवं प्रसारित करने के लिए गति प्रदान की जाए'। मैंने अपने संबोधन में सभी उपस्थित प्रबुद्ध डेलीगेट्स से इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए कहा, जिस के बाद वयोवृद्ध स्वामी ईशरदास जी महाराज के साथी सेवक श्री बंशी लाल जी गांव बहल खालसा जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश ने कहा, कि गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ साहिब तैयार हो चुका है, जिस का हिंदी अनुवाद भी प्रिंसिपल रामसिंह आदवंशी ने कर दिया है, मगर उसे आददुआरों में प्रकाशित नहीं किया जा रहा है। इस ग्रँथ को तैयार करवाने के लिए स्वतंत्रता सेनानी व साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवालिया जी और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने, स्वामी ईशरदास जी महाराज के पास गांव कुठार खुर्द, जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश में जा कर विनम्र फरियाद की थी, कि महाराज! हमें भारतवर्ष के मूलनिवासियों के अधिकारों को प्राप्त करने के लिए लिए एक धर्म ग्रँथ की आवश्यकता है जिस ...

चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन।।

।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी द्वारा स्थापित आदधर्म मंडल के रुके कारवां को पुनः 2010 से जीवित करने के लिए विश्व आदधर्म मंडल द्वारा चतुर्थ आदधर्म मंडल अधिवेशन नौ दस अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के गांव खठमी में, आदधर्म गुरु दिल्ली निवासी श्री आरएन आदवंशी जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण अधिवेशन का शुभारंभ राष्ट्रीय हिस्सा आंदोलन के विशिष्ठ अतिथि विद्याप्रकाश कुरील जी और उन की धर्म पत्नी निवासी सिकंदरावाद तेलंगाना प्रदेश  के करकमलों द्वारा दीप शिखा प्रज्वलित कर के किया गया। इस अधिवेशन के आरंभ में, गुरु रविदास जी महाराज द्वारा रचित आदर्श आरती "नाम तेरो आरती मंजन मुरारे हरि के नाम बिन झूठे सगल पसारे", के गान के साथ किया गया। गोलमेज अधिवेशन के आरंभ में श्री तरसेम सहोता जी, निवासी नंगल पंजाब ने आए हुए प्रतिनिधियों का अभिनंदन किया। उस के उपरांत आदधर्म अधिवेशन के आयोजक राम सिंह आदवंशी ने, देश भर से आए हुए गणमान्य प्रतिनिधियों को सम्मानित करने के लिए दिल्ली गुरु रविदास सभाओं के सेंट्रल कमेटी के अ...

आदधर्म का मुख्य केंद्र सिंधुघाटी सभ्यता।

।।आदधर्म का मुख्य केंद्र सिंधुघाटी। सिंधु नामकरण:---सम्राट सिद्धचानो महाराज के नाम पर ही लद्दाख, तिब्बत, जम्मू काश्मीर से निकलने वाली नदी का नाम सिद्ध से बिगड़ कर सिंधु नदी पड़ा था। यही विश्व की सब से अधिक प्राचीनतम नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता हुई है। इसे हड़प्पा सभ्यता और सिंधु सभ्यता के नाम से भी विश्व में जाना जाता है। ये सभ्यता आदिकाल से चली आ रही थी, जो आज से पांच हजार साल पूर्व यूरोप और एशिया से आने वाले यूरेशियन आक्रांताओं ने बुरी तरह से तवाह कर के मनुवादी सभ्यता का निर्माण किया है। इस सभ्यता का भूभाग पाकिस्तान और पश्चिमी भारत तक फैला हुआ है। बीसवीं शताब्दी के आरंभ के विश्व प्रसिद्ध पुरातत्व विभाग के डायरेक्टर जनरल जान मार्शल ने सन 1924 में सिंधुघाटी सभ्यता का रहस्योउद्घाटन किया था। भारत की संस्कृति की झलक:---मोहन जोदड़ो हड़प्पा और सिंधुघाटी में आदधर्म की तत्कालीन संस्कृति के संकेत साफ झलकते हुए नजर आते हैं। खुदाई से मिले मनुष्यों के निवास स्थलों, उन की मूर्तियां, स्नानागार, अन्नागार, नर्तकियों की कांस्य मूर्तियां, दाड़ी युक्त मानव मूर्तियां, पशुपति शिव के सिक्के, हाथ स...

आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।

।।आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना। सन 1931 ईस्बी की जनगणना और 1937 के विधानसभा के चुनाबों ने भारत के मनुवाद को झकझोड़ कर रख दिया था। दोनों तरफ से शूद्रों को अपना पुराना खोया हुआ राज, सामाजिक न्याय, गुलामी से मुक्ति और स्वराज मिलने वाला था। आदधर्म मंडल की इन दोनों उपलब्धियों से, मनुवादियों के तो कान खुल गए थे, मगर शूद्रों के नेताओं की ना तो आंखें खुली ना ही दिमाग ने काम किया। ये लोग एक मंच पर इकट्ठा नहीं हो सके। केवल सड़कों पर अछूतों की स्वतंत्रता की लड़ाई आदधर्म मंडल लड़ रहा था, बाकी किसी भी नेता में ये दम नहीं था कि वे सड़कों, गलियों, चौराहों पर ब्राह्मणों की छद्म लड़ाई का सामना कर सके। जनगणना में आदधर्म लिखने पर पंजाब के लोगों ने साहस, हिम्मत और धैर्य से काम लिया था और अपना धर्म, "आदधर्म" लिखवाया था, जिस के कारण पंजाबी जनता ने, असंख्य अमानवीय अत्याचारों को बर्दाश्त किया था। पंजाबी जाटों और ब्राह्मणों ने, अछूतों के नाक में दम कर दिया था, अकारण अछूतों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था, घरों में ही अछूतों को कैद कर दिया गया था, पानी के कुओं को जबरन बन्द कर दिया गया था, घरों के चारों ओ...

आदधर्म मंडल का स्वर्णिम इतिहास।।

।।आदधर्म मंडल का स्वर्णिम इतिहास।। अगर धरती पर स्वर्ग है तो केवल भारतवर्ष की धरती पर ही है, जिस का अहसास आदमी तो करता आया है मगर पशु-क्षी भी करते हैं, जिस का सबूत प्रवासी पक्षियों से लगाया जा सकता है। ज्यों ही ऋतुएँ बदलती हैं, यूरोप एशिया का जलवायु परिवर्तित होता है, वहां की धरती का वातावरण, जलवायु इन मासूम प्राणियों को सताता है, त्यों ही ये पक्षी लाखों किलोमीटर की उड़ान भर कर, भारत की धरती पर आ जाते हैं। जब ये गूंगे प्राणी भारत की धरती का सुख लेने के लिए आते हैं, अपना जालिम समय बिताते हैं और पुनः वापस हो जाते हैं, वहीं तेल और बर्फ की धरती पर जन्में मुसलमान, ईसाई और यहूदी भी सुख चैन की जिंदगी जीने के लिए भारत में आते रहे हैं, मगर इन लोगों ने पक्षियों से ये नहीं सीखा कि, पराई धरती पर अनाधिकार चेष्टा कर के, पराई धरती पर अनाधिकृत रूप से पक्का कब्जा नहीं करना चाहिए। इन स्वार्थी लोगों ने, अपनी छल कपट की घातनीति से, भारतीयों को अपना गुलाम बना कर, अपनी राक्षस प्रवृत्ति को नहीं छोड़ा है। पांच हजार वर्ष पूर्व भारतवर्ष की धरती पर आए यूरेशियन यहीं पर बसे हुए हैं, अनादिकाल से चली मूलनिवासियों की संस...

आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। सन 1931 भारत के मूलनिवासियों के लिए शुभ वर्ष था। आदधर्म मण्डल ने, पांच हजार सालों से चली आ रही विदेशी यूरेशियन लोगों की गुलामी की जड़ों को दीमक लगा दी थी, आदधर्म मंडल के अस्तित्व में आने पर मूलनिवासी शासन की पुनः नींव पड़ गई थी, जिस से मनुवाद की चूलें हिल गईं थी। अपनी छद्म नीति से यूरेशियन लोगों ने अपने ही शत्रु वानिये मोहन दास कर्म चन्द गांधी को आगे कर के, मूलनिवासियों के खिलाफ तैयार करके, उसे प्रयोग किया था, क्यों कि ये लोग जानते हैं कि, वानिये भी मूलनिवासी समाज का ही एक अंग है, इसीलिए 2002 में अयोध्या राम मंदिर के एक परमहंस साधु ने भी कहा था कि, हम शूद जिलाधिकारी को शिला दान नही कर सकते, जिस से सावित होता है कि, आज भी ब्राह्मण, वाणियों को अछूत ही मानता है मगर वाणियाँ समाज इस सत्य को हजम नहीं करता है। आदधर्म मंडल ने, सारे मूलनिवासियों को एक मंच पर ला कर इकठ्ठा कर दिया था और अपने खोए अधिकार भी ब्रिटिश सरकार से वापस ले लिए थे। ये सभी उपलब्धियां केवल सन 1931 की जनगणना के करिश्मों से ही संभव हुई थीं। इस जनगणना ने ब्रिटिश सरकार को प्रमाणित कर दिया था कि, भा...

आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। 11/12 जून सन 1926 को साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी की अध्यक्षता में, मुगोवाल गांव में आदधर्म मंडल का गठन किया गया था, जिसमें  सर्वसम्मति निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए गए थे:--- 1 क हम सरकार को सूचित करते हुए, ऐलान करते हैं कि भारत की अछूत बिरादरियों के लिए आदधर्म मंडल चुका है। ख हमारा शुभ कामना सन्देश जय गुरुदेव है। ग हमारा इतकाद (विश्वास) गुरु आदि प्रगाश असंख दीप ग्रँथ की शिक्षाओं के अनुसार है। घ हमारा पवित्र साधना शब्द "सोहम" है। 2 हमारे आदधर्म के वानी:---गुरु रविदास, गुरु कबीर, गुरु नामदेव, गुरु सेन और महाऋषि वाल्मीकि जी ही हमारे अबतार और पैगम्बर हैं। वाणी के ग्रँथ का नाम गुरु आदि प्रगाश साहिब माना गया है। 3 सभी अछूत बिरादरियों, जातियों से अपील है कि, अपने लड़ाई झगड़ों को भुला कर, एक मुठ हो जाएं। आपस में लड़ना झगड़ना नहीं चाहिये बल्कि सभी अछूतों को इकठ्ठे बैठ कर भोजन करना चाहिए और आपस में एक दूसरे के साथ सामाजिक संबद्ध स्थापित करें। आपस में इकठ्ठे बैठ कर खाने पीने का रीति रिवाज शुरू करने चाहिए। 4 ये आदधर्म मंडल पंजाब के सभी जिलों सहित विश...

आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।

।। आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। आदधर्म मंडल के संस्थापक साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी ने, अर्बाचीन आदधर्म को नया आकार, नया स्वरूप प्रदान कर के, भारत के मूलनिवासियों को पांच हजार सालों की खोई हुई पहचान पुनः लौटा कर के नया इतिहास रच डाला था। भारत के मूलनिवासियों को पुनः विश्व के मानचित्र पर दर्शा कर, यूरेशियन को विश्व में बुरी तरह से बेनकाब कर के, उन के कारनामों के लिए नग्न कर दिया था।1931 की जनगणना में आदधर्म को शामिल कर के, विश्व के इतिहास में अछूतों की उपस्थिति दर्ज करवाई थी। मूलनिवासियों के लिये धर्म ग्रँथ गुरु आदि प्रगाश भी स्वामी ईशरदास जी महाराज से तैयार करवा कर के, मनुवादियों के होश उड़ा दिए थे, मगर उन के सिपाहसलार साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी को समझ नहीं सके थे, कि हमें तो साक्षात वे अवतार मिले हुए हैं, जिन का हमें सच्चे दिल से साथ देना चाहिए। उन के इस सत्य की गवाही, विदेशी स्कॉलर डॉक्टर मार्क अपनी पुस्तक रिलीजिन एंड सोशल विजन में लिखते हैं कि सन 1931 की ऐतिहासिक जनगणना के कारण आदधर्मियों  के आदधर्म मंडल ने, अपने लिए उपयुक्त स्थान तराश लिया था। जिस प्रकार उस समय के ...

आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।। लायलपुर मिंटगुमरी में, जो आदधर्म मंडल के आह्वान पर, आदधर्म लिखने वाले आंकड़े सामने आए थे, उस से सभी धर्मों के पैरोकार चकित हो गए थे। उस समय जनगणना की जो रिपोर्ट सामने आई थी, उस के आधार पर यह कहा जा सकता था कि, वहां पर जालंधर शहर के लोग आ कर अधिक वस गए थे, जिन्होंने बड़े गर्व से बढ़चढ़ कर अपना धर्म आदधर्म लिखा था। ये भी संभव हो सकता था कि, कांगड़ा जिले के पहाड़ी इलाकों से अठारह प्रतिशत आदधर्मी वहां रोजगार के लिए आ वसे हों। शाहपुर और गुजरात के उत्तर पश्चिमी इलाकों के अछूतों ने अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के कारण सामुहिक रूप से खड़े हो कर अपनी एकता का सबूत दिया हो। इन इलाकों के मनुवादी लोग हररोज छोटी जातियों के ऊपर अत्याचार करते आए हैं, जिस के कारण उन्होंने अपनी जबरदस्त नाराजगी और रोष जाहिर कर के शक्तिशाली संगठन के साथ जुड़ कर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित की हो। ये बड़ी अजीब बात थी कि, किस तरह कुछ आदधर्मी अमृतसर में भी जनगणना में शामिल हो गए थे। इस स्पष्ट अनमेल के लिए यही साधारण व्याख्या या स्पष्टीकरण हो सकता था कि, वहां सेडीयूल्ड कास्ट (एससी) लोग कम गिनती में थे, जो अ...

आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। पंजाबी लेखक सीएल चुंबर जी लिखते हैं, कि जिस प्रकार ये रिपोर्ट संकेत करती है कि सिखों ने आदधर्म की बंगार को हिंदुओं से भी अधिक गंभीरतापूर्वक लिया था। बाद में एक आदधर्मी ने स्पष्ट किया था कि, हिंदुओं ने सिखों के कुछ लोगों को हिन्दू जनंसख्या रिकार्ड के बीच ले कर सिखों के साथ भी वहुत बुरा व्यवहार किया था। सिखों ने इस का बदला हमारे साथ दुर्व्यवहार कर के लिया था। एक व्यान के अनुसार सिखों ने ननकाना साहिब में एक आदधर्मी रैली को भंग करने के लिए, वहां की रसोई को नष्ट कर दिया था, जहां रैली के लिए भोजन तैयार किया जा रहा था। इस रैली में शामिल लोगों के ऊपर चावलों की गर्म गर्म पिछ भी फैंकी गई थी और वहुत सारे आदधर्मियों को मारा पीटा गया था।एक और व्यान के अनुसार,सिखों ने आदधर्म मंडल के दो संगठनकर्ता आदमी मार दिए थे। जनगणना की महत्ता को बढ़ाने के लिए इन सब घटनाओं को खूब बढ़ा चढ़ा कर प्रचारित किया गया था। हर संभव प्रयास किया गया था, ताकि अछूतों की इच्छा शक्ति को बरकरार रखा जा सके, जिस प्रकार निम्नलिखित गीत से ये प्रकट होता है:--- "निक्के मोटे झगड़े छोड़ के पिछाँह, ते बन्...