सिंधू नदी और सिंधुघाटी सभ्यता का नामकरण सम्राट सिद्धचानो जी के नाम पर।
।।सिंधू नदी और सिंधुघाटी सभ्यता का नामकरण सम्राट सिद्धचानो जी के नाम पर।। इतिहास गवाह है कि, अनादिकाल से ही धरती अंतरिक्ष के उपादानों, स्थानों, नदियों, नवग्रहों के नामकरण, विशेष महापुरुषों के नाम पर ही हुए हैं। आद और उस की संतान जुगाद के नाम को गुरु रविदास जी महाराज ने, अपने मूलमंत्र में शामिल किया हुआ है, जिस से स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि, जुगाद आदपुरुख की संतान हुई है। इसी तरह ही आदपुरुष के ही वंश में सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज हुए हैं, जिन के नाम सिद्धचानो शब्द को अमर करने के लिए ही लद्दाख से निकलने वाली नदी का नामकरण भी सिंधू नदी और सिंधुघाटी सभ्यता रखा गया है, इसी तरह ही कैलास पर्वत का नामकरण भी सम्राट सिद्धचानो जी महाराज के पिता श्री के नाम पर कैलास पर्वत रखा गया है। उन के ही दरबारी बाबा पहाड़िया हुए हैं, जिन के नाम को भी भ्रान्तिमय बना दिया गया है मगर उन के एक मंत्र से ज्ञात हो ही जाता है कि वे भी मक्का से शासन चलाने वाले सम्राट चानो जी महाराज के क्षत्रप मणिमहेश के महाराजा हुए हैं। उन के ही नाम से हिमाचल नामकरण हुआ था, जिस को भी संदेहास्पद बना दिया गया। मंत्र में लिखा गया है कि:-...