चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन।। आदरणीय आरएन आदवंशी आदधर्म गुरु दिल्ली की अध्यक्षता में चल रहे, ऐतिहासिक अधिवेशन में नौ अप्रैल को राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन का मुख्य विषय था "आदधर्म को विश्व में किस प्रकार प्रचारित एवं प्रसारित करने के लिए गति प्रदान की जाए'। मैंने अपने संबोधन में सभी उपस्थित प्रबुद्ध डेलीगेट्स से इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए कहा, जिस के बाद वयोवृद्ध स्वामी ईशरदास जी महाराज के साथी सेवक श्री बंशी लाल जी गांव बहल खालसा जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश ने कहा, कि गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ साहिब तैयार हो चुका है, जिस का हिंदी अनुवाद भी प्रिंसिपल रामसिंह आदवंशी ने कर दिया है, मगर उसे आददुआरों में प्रकाशित नहीं किया जा रहा है। इस ग्रँथ को तैयार करवाने के लिए स्वतंत्रता सेनानी व साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवालिया जी और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने, स्वामी ईशरदास जी महाराज के पास गांव कुठार खुर्द, जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश में जा कर विनम्र फरियाद की थी, कि महाराज! हमें भारतवर्ष के मूलनिवासियों के अधिकारों को प्राप्त करने के लिए लिए एक धर्म ग्रँथ की आवश्यकता है जिस के लिए हम आप के पास आए हैं। स्वामी ईशर दास जी महाराज ने बड़ी देर सोच समझ कर दोनों ही राजनेताओं को जबाब देते हुए कहा था कि, आप लोग कहीं मूलनिवासी सन्तों का सन्त सम्मेलन बुलाओ, जहां हम मिल कर इस विषय पा चिंतन कर के अंतिम निर्णय करेंगे। स्वामी जी के इसी आदेश को सुन कर, साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवालिया जी ने तत्काल ही सन्त सम्मेलन आयोजित किया था, जिस में गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ नामकरण कर के, लार्ड लोथियन कमेटी के पास बहस करते हुए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने आदधर्म को मान्यता दिलाई थी, जब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने, भारत का संविधान लिखा था, तब उन्होंने आदधर्म मानने वालों को ही आदिधर्मी जाति के रूप में संविधान में लिख डाला मगर आदधर्म का नाम संविधान में दर्ज नहीं था, जिस से आदधर्म का नामोनिशान तक मिटा दिया गया था, जिस पर आज गहराई से चिंतन किया जाए और भावी जनगणना के प्रपत्र में वास्तविक आदधर्म का कालम अवश्य शामिल किया जाए। वयोवृद्ध आदधर्म के पैरोकार वंशी लाल जी के समर्थन में सभी उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा, कि हम वंशी लाल जी के विचारों से पूरी तरह से ही सहमत हैं, जब राजपूत के धर्म बुद्ध धर्म को संविधान में शामिल किया गया था, तब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को आदधर्म को भी संविधान में लिखना चाहिए था। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि, यदि जनगणना प्रपत्र में आदधर्म का कालम नहीं होगा तो हम धर्म के कालम में केवल आदधर्म ही लिखेंगे। आदधर्म ही विश्व में मानवीय धर्म है, जिस में कोई भी अपवाद नहीं हैं, कोई भी कुतर्कपूर्ण नियम नहीं है। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। अप्रैल 13, 2021।

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