चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।
।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।
दस अप्रैल 2021 प्रातः नौ बजे गाँव खठमी, जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन के दूसरे दिन, भारतीय हिस्सा आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विद्या प्रकाश कुरील जी सिकंदरावाद, तेलंगाना प्रदेश की अध्यक्षता में अधिवेशन का उदघाटन, सन्त शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज के समक्ष, श्री नरेन्द्र जस्सी जी अध्यक्ष सैंट्रल कमेटी गुरु रविदास सभा दिल्ली ने दीप प्रज्ज्वलित कर के किया। रामसिंह आदवंशी हिमाचल प्रदेश ने, दूसरे दिन के अधिवेशन का एजेंडा प्रस्तुत करते हुए कहा कि, आज हम जिन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे वे निम्नलिखित हैं:---
1 मूलनिवासियों के लिए एक धर्म, एक धर्मग्रँथ और एक पंथ सुनिश्चित करना पहला विचारणीय विषय है।
2 धर्म स्थानों की एकता किस प्रकार सुनिश्चित की जाए?
3 निशान साहिब, आरती, मूलमंत्र, अरदास की राष्ट्रीय स्तर पर स्थापना करने के लिए चिंतन करना।
4 मनुवादियों ने स्वर्ग नरक, पुनर्जन्म का आतंक फैला कर मानव भयभीत कर के रखा हुआ है, जिसे जहन से निकाल कर, केवल और केवल वर्तमान जीवन को ही सुखमय स्वर्ग बनाने के लिए तर्कसंगत सत्संग सँगत को किस प्रकार दिया जाए?
5 समाज में सामाजिक समरसता, अनुशासन, विनम्रता, त्याग, सदभावना, इंसानियत किस प्रकार पैदा की जाए?
6 सामूहिक रूप से आदधर्म गुरुओं के उपदेशों के अनुसार जातिवाद को खत्म करने के लिए हमें अंतर्जातीय विवाह अनिवार्य रूप से करना व करवाना।
7 सभी आदगुरूओं के सामुहिक तौर पर प्रकाश पर्व किस प्रकार मनाए जाएं?
उपरोक्त एजेंडे में शामिल विषयों पर, आदरणीय सभी प्रतिनिधियों ने गहन चिन्तन किया और ये निर्णय लिया कि, मूलनिवासियों की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक एकता के लिए एक धर्म, एक ग्रँथ, एक पंथ की
आवश्यकता है, इसलिए गुरु रविदास महाराज द्वारा तैयार आदधर्म, मूलमंत्र, अरदास, आरती ही मूलनिवासियों के लिए नितांत जरूरी है, हर समय सिमरन के लिए सोहम जपना और लाल निशान साहिब हमारी पहचान बरकरार रहेगी। आगामी अधिवेशन में राष्ट्रीय धर्म ग्रँथ पर पुनः चर्चा होगी।
सत्संग का स्वरूप बदलने के लिए, उच्च स्तरीय सन्तों के समूह से चर्चा कर के सँगत के जहन से पुनर्जन्म, स्वर्ग नरक का भय निकाल कर कड़ा परिश्रम कर के सत्य, धर्म और ईमान से जीवन गुजारने के लिये, सामाजिक समरसता, प्यार, सदभावना, विनम्रता, शालीनता, अनुशासन त्याग की महत्ता समझाने के लिए, इन्हीं विषयों पर शब्द रचना कर के, उन्हीं की व्याख्या कर के ही हमें सँगत को सत्संग देना होगा, तभी समाज को ब्राह्मणों के कुचक्रों से, मूलनिवासियों को बाहर निकाल कर सुखी किया जा सकता है। एक ही आददुआरे में, सभी गुरुओं की प्रतिमाएं सम्मानजनक तरीके से स्थापित कर वहीं सत्संग दिया जाएगा और मूलनिवासियों को मनुस्मृतियों और मनुवादियों की, कुतर्कपूर्ण काल्पनिक देवी और देवताओं की कथाओं को सुनना और उन के मन्दिरों में जाने की हानियों की जानकारी दी जाएगी। हम केवल मूलनिवासी हैं और केवल मूलनिवासी कहलाने के लिये, एकता बनाने के लिए, जातियां खत्म करने के लिए, अंतर्जातीय विवाह करेंगे और करवाएंगे। एक ही आददुआरे में सभी आदगुरूओं गुरु रविदास, गुरु कबीर, गुरु वाल्मीकि, गुरु सेन, गुरु नामदेव, गुरु सदना के प्रकाश पर्व मनाए जाएंगे। आत्म रक्षार्थ सभी मूलनिवासी सिख धर्म की प्रथा के अनुसार कमर में कृपाण धारण करेंगे।।
सर्वसम्मति से मूलनिवासियों के ऊपर प्रतिदिन हो रहे शर्मनाक बलात्कारों, अत्याचारों,छुआछूत और माब्लिंचिंग को रोकने के लिये संघर्ष करने, व सरकार से बात करने के लिए संघर्ष कमेटी बनाई गई।
अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिए गए कि आद धर्म अधिवेशन सभी राज्यों में आयोजित किये जाएंगे ताकि आने वाली जनगणना में सभी को आदधर्म दर्ज करने की पूर्ण जानकारी दी जाए। आयोजक रामसिंह आदवंशी ने, आए हुए सभी गणमान्य प्रतिनिधियों का अधिवेशन को सफल बनाने, रचनात्मक तर्कसंगत सुझाब देकर पांच हजार सालों से मनुवादियों की धार्मिक गुलामी से सभी मूलभारतीयों को स्वतंत्र करने केलिए सुझाए तथ्यों के लिए धन्यवाद किया और भावी अधिवेशन के लिए कामना के साथ सोहम, जय गुरुदेव के पवित्र उच्चारण से आदधर्म अधिवेशन का समापन किया।।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
अप्रैल 28, 2021।
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