चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन का घोषणा पत्र।।।।
।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन का घोषणा पत्र।।
चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन के दूसरे दिन, मूलनिवासियों की ज्वलंत समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जिस में बड़े दुख से कहा गया है कि, चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो उस में मूलनिवासियों को माब्लिंचिंग के द्वारा मारा जाता है और माब अथबा भीड़ की आड़ में, कातिल मनुवादियों को कोर्ट राहत देकर सजाए मौत नहीं देता है और ना ही किसी को फांसी पर लटकाता है। आजादी के चौहत्तर वर्ष बीत जाने पर भी मूलनिवासी दूल्हों को घोड़ी पर चढ़ कर बारात ले कर जाने से रोका जा रहा है। आज भी छुआछूत का बोलबाला है। मूलनिवासी वहू बेटियों के साथ बलात्कार कर के मौत के घाट उतार कर जिंदा भी और मार कर भी जला रहे हैं, मगर मनुवादी कोर्ट कभी भी न्याय नहीं देते आए हैं, बन्धुआ मजदूरी को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान सरकार ने मजदूरों का खून चूसने व उन्हें समय से पहले मारने के लिए काम करने का समय भी आठ घण्टों से बढ़ा कर बारह घण्टे कर दिया है, जो आमानवीय निर्णय लेकर लागू कर दिया गया है। मूलनिवासियों, मुसलमानों, ईसाईयों, सिखों को बड़ी बुरी तरह नृशंसता से जलाया जा रहा है, जिस के खिलाफ अधिवेशन में आवाज उठाई गई है और सरकार से आग्रह किया गया है कि, मौलिक अधिकारों का हनन तुरन्त बंद किया जाए, सारे भारतीयों के साथ एक जैसा ही व्यवहार किया जाए, सभी मौलिक अधिकार बहाल किए जाएं अन्यथा मूल निवासियों को भी सीधी कार्यवाही करनी पड़ सकती है। सर्वसम्मति से आंदोलन का संचालन करने के लिए संयुक्त संघर्ष कमेटी का गठन भी किया गया है, जो अत्याचारियों के अत्याचारों के खिलाफ राज्य और केंद्र सरकारों से बात किया करेगी और अत्याचारियों के अन्यायों अत्याचारों के खिलाफ आंदोलन भी करने के लिये कार्य करेगी। आदधर्म मंडल मूलनिवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, भारत के सभी गांवों में सुरक्षा दस्ते भी तैयार करेगा। मूलनिवासियों से आग्रह किया गया है कि, आजादी बलिदान मांगती है, जिस के लिए सारे समाज को तैयार करना है। अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हम घोषणा करते हैं कि हम भी सिखों की तरह खुखरी कमर के साथ बांधेंगे। हर गांव में गुरुओं के सामुहिक मन्दिरों में ही पूजापाठ, अर्चना की जाएगी। कोई भी मूलनिवासी मनुवादियों के धर्म स्थलों में जा कर अपमानित और जलील नहीं होगा, वैसे भी मूलनिवासियों के अबतार सम्राट सिद्धचानो जी महाराज ही हमें सुरक्षा प्रदान करते आए हैं, उन्हीं के आददुआरों में जा कर सत्संग, पूजा और अर्चना हुआ करेगी। अपने ही गुरुओं, पीरों महापुरुषों की भद्दी मूर्तियां बनाना और बनवाना तत्काल ही बन्द करवाई जाएँगी। मूलनिवासियों के नेगेटिव इतिहास को खत्म कर के, खुद तर्कसंगत सच्चा और स्वच्छ इतिहास लिखा जाएगा। सभी मूलनिवासी गुरुओं, पीरों की अद्वितीय, मनमोहक, सुंदर सुंदर सामुहिक शोभायात्राएँ निकाली जाया करेंगी।
वहुजन अपने लिये स्कूल, कालेज, हस्पताल बैंक, स्टोर, शब्जी मंडियां दुकानें खुद बनाने पर विचार करेंगे। कोर्ट में न्याय ना मिलने के कारण सम्राट सिद्ध जी महाराज के पास ही अरदास की जाएगी और न्याय करने की अपील किया करेंगे। देश के हर गांव में खाप पंचायत बनाई जाएंगी। सारे देश में आदधर्म को जनगणना में लिखवाया जाएगा। मूलनिवासियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए धन की व्यवस्था की जाएगी। बेरोजगारों को रोजगार के अवसर तैयार करवाने पर बल दिया जाएगा। सम्राट सिद्धचानो और मातेश्वरी लोना जी उर्फ कामाख्या महादेवी जी की भव्य मूर्तियां आददुआरों में स्थापित करवाई जाएंगी, उन की तर्कसंगत रासलीलाएं करवाई जाएँगी। जब भी कोर्ट में न्याय नहीं मिलेगा, गाँव गाँव में सम्राट सिद्धचानो जी महाराज के मन्दिरों में ही अत्याचारी के खिलाफ सामूहिक अरदास की जाया करेगी ताकि दोषियों को सजा मिल सके। कोई भी भीख मांगने का घृणित, निम्न स्तर का काम नहीं करेगा, कड़ी मेहनत कर के ही वच्चों का पालन पोषण किया जाएगा
सभी मूलनिवासियों को केवल एक आदधर्म को ही अपना कर, धार्मिक एकता स्थापित करने के लिये कार्य करना है। सभी मूलनिवासी आपस में अंतर्जातीय विवाह करेंगे, ताकि जाति व्यवस्था समाप्त हो सके।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
अप्रैल 27,2021।
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