सन्त विजेंद्र प्रधान बनारस ज्योतिजोत समा गए!!

।।सन्त विजेंद्र प्रधान बनारस ज्योतिजोत समा गए!! प्रकृति भी बड़ी विचित्र है कि, चाहे कोई प्राणी कितना ही श्रेष्ठ हो मगर उस को अपने आगोश में एक ना एक दिन समा ही लेती है और उस को पंच तत्व में मिला कर ही छोड़ती है! सन 1949 ईस्बी को बनारस की पवित्र धरती के ऊपर, गुरु रविदास जी महाराज ने, एक बालक को बनारस के आददुआरे की देखभाल और उस की देखरेख के लिए जन्म दिया था, जिस का नाम था विजेंद्र जी। 1968 में बनारस महाविद्यालय से बीए की उपाधि लेते लेते ये वीर बालक मनुवादियों की गुंडागर्दी से आहत होता हो गया और अछूत वहू बेटियों के साथ होने वाले क्रूर, अपमानजनक व्यवहार से दिन रात परेशान रहने लगा था। कुछ समय तो ये बालक गुंडों की हरकतों को बर्दाश्त करता रहा मगर जब गुरु रविदास जी महाराज के पवित्र आददुआरे में ही गुडंडे गंदगी फैलाने लगे तब इस बालक की सब्र  की सीमा समाप्त हो गई और गुंडों का मुकाबला करने के लिये इस विजेंद्र नामक बालक ने भी अपने महाविद्यालय के चमार साथियों की एक शरीफ गैंग बना ली और फिर लगे मनुवादी गुंडों की धुनाई करने। इस सीधी कार्यवाही का मनुवादी गुंडों पर आतंक भी छाने लगा जिस से गुरु रविदास जी महाराज के पवित्र मन्दिर की गंदगी तो समाप्त होती गई मगर मनुवादी पुलिस से विजेन्द्र की गुंडागर्दी बर्दास्त नहीं होती गई जिस से आहत हो कर बनारस की पुलिस ने उन्हें अति खूंखार अपराधी घोषित कर दिया था और कई अपराधों में संलिप्त कर के इन्हें हथकड़ियां तो पहनाई ही गई मगर बेड़ियों से भी शारिरिक कष्ट दिए गए। एक बार जब पुलिस विजेंद्र जी को हथकड़ियों और बेड़ियों से जकड़ कर जेल की कोठड़ी में ले जा रही थी, तो उन के सौंदर्य को देख कर एक खूंखार कैदी ने उन पर सेक्सी कटाक्ष करते हुए अपशब्द कहे डाले जिन्हें सुन कर विजेंद्र जी ने हथकड़ी से ही उस की पिटाई कर डाली जिस से पुलिस ने उन्हें ऐसी पिटाई कर के वहुत भयानक कालकोठड़ी में बंद कर किया जिस में दोनों ओर कांटेदार लोहे दीबारें थी, जिन के बीच उन्हें खड़े रहने की सजा देकर खूंखार अपराधी घोषित कर दिया गया। गुरु रविदास जी महाराज की बेटियों की हया की रक्षा का यही इनाम सरकार और पुलिस देने लगी। सन 1976 को जब भारत में आपातकाल की घोषणा की गई थी, तब 119 कैदियों का पुलिस ने एनकाउन्टर करना शुरू किया। जब विजेन्द्र जी को कहा गया, कि तुम भागो अगर बच सकते हो बचने का पूरा प्रयास कर लो, ये सुन कर गुरु रविदास जी महाराज का परवाना छाती चौड़ी कर के बोलने लगा! क्यों भागूं? मारो गोली! मारो! मारो! ज्यों ही पुलिस के कांस्टेबल ने पिस्टल से गोली चलाई, त्यों ही गोली पिस्टल से नहीं निकली, जिस से पुलिस सकते में पड़ गई कि कहीं हमारे लिए ही कोई अनहोनी की घटना ना बन जाए तब एएसआई ने कांस्टेबल को कहा, हे!कांस्टेबल अब बोली मत चलाना, तुझे एक अवसर मिला था, अब गोली मारने का आप को हक़ नहीं है, इस प्रकार गुरु रविदास जी महाराज ने अपने सच्चे सुच्चे सेवक की रक्षा की थी। इस घटना ने विजेंद्र जी को धर्मात्मा ही बना दिया। विजेंद्र जी ने अपने गांव की पंचायत का चुनाब लड़ा, जिस के वे चिरकाल तक प्रधान रहे, इसी कारण उन्हें विजेंद्र प्रधान कहा जाने लगा। सन 1977 में उन्हें सांसद का चुनाव लड़ने के लिए जनता दल का टिकट देते रहे मगर इन्होंने टिकट को किक मार दी और टिकट नहीं लिया और गुरु रविदास जी महाराज की सेवा करने का ही लक्ष्य सुनिश्चित किया मगर तत्कालीन राजनेता राज नारायण ने जब इन्दिरा गांधी के साथ चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी, तब राज नारायण ने अपने विजय अभियान का सिपाहसालार केवल विजेन्द्र प्रधान को ही बनाया। ग्रेजुएट विजेन्द्र प्रधान ने ऐसा चक्रव्यूह बनाया कि इन्दिरा गांधी चुनाव में चित हो गई और राज नारायण केंद्रीय स्वास्थ मंत्री बन गए जिस के बाबजूद विजेंद्र जी ने,उन से भी कोई व्यक्तिगत लाभ नही लिया और गुरु रविदास जी महाराज की ही सेवा करते करते 21 अप्रैल के काले दिवस पर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन ना मिलने के कारण गुरु रविदास जी के प्रिय भगत ही नहीं प्रिय समाजसेवक कालकवलित हो गए जिस की सूचना उन के सपुत्र बिक्रम जी ने मुझे बाइस अप्रैल को दी।B गुरु रविदास जी महाराज का वीर बेटा, निडर योद्धा भाजपा सरकार की अछूत विरोधी काली मानसिकता का शिकार हो गया, अगर बनारस में आक्सीजन होती तो चामरों का चिराग अभी नहीं बुझता, भगवान उन की आत्मा को शांति प्रदान करें, सभी गुरु रविदास जी महाराज की संस्थाएं विजेंद्र प्रधान जी के लिये शोक प्रस्ताव पास कर के उन्हें सम्मान अवश्य देने का सुकर्म करें। सोहम!जय गुरुदेव!! रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। अप्रैल 29, 2021।  

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