आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।
।।आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।
सन 1931 ईस्बी की जनगणना और 1937 के विधानसभा के चुनाबों ने भारत के मनुवाद को झकझोड़ कर रख दिया था। दोनों तरफ से शूद्रों को अपना पुराना खोया हुआ राज, सामाजिक न्याय, गुलामी से मुक्ति और स्वराज मिलने वाला था। आदधर्म मंडल की इन दोनों उपलब्धियों से, मनुवादियों के तो कान खुल गए थे, मगर शूद्रों के नेताओं की ना तो आंखें खुली ना ही दिमाग ने काम किया। ये लोग एक मंच पर इकट्ठा नहीं हो सके। केवल सड़कों पर अछूतों की स्वतंत्रता की लड़ाई आदधर्म मंडल लड़ रहा था, बाकी किसी भी नेता में ये दम नहीं था कि वे सड़कों, गलियों, चौराहों पर ब्राह्मणों की छद्म लड़ाई का सामना कर सके। जनगणना में आदधर्म लिखने पर पंजाब के लोगों ने साहस, हिम्मत और धैर्य से काम लिया था और अपना धर्म, "आदधर्म" लिखवाया था, जिस के कारण पंजाबी जनता ने, असंख्य अमानवीय अत्याचारों को बर्दाश्त किया था। पंजाबी जाटों और ब्राह्मणों ने, अछूतों के नाक में दम कर दिया था, अकारण अछूतों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था, घरों में ही अछूतों को कैद कर दिया गया था, पानी के कुओं को जबरन बन्द कर दिया गया था, घरों के चारों ओर कांटेदार झाड़ियां लगा दी गईं थी, मूक पशुओं को घरों से बाहर निकलने नहीं दिया गया था, वहू बेटियों के साथ रास्तों, गलियों और सड़कों पर बलात्कारियों ने बलात्कार किये थे, मगर स्वार्थी अछूत नेताओं ने आदधर्म मंडल का साथ ना देकर अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए गांधी एंड कंपनी से मिल कर, अपनी इज्जत बचाई थी, विधायक और सांसद बनने के लिए, अछूतों के साथ गद्दारी करते रहे थे। एक तरफ आदधर्म मंडल के वीर परवाने मनुवाद की अग्नि में जल रहे थे, दूसरी तरफ स्वार्थी अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए अपनी विसात बिछा रहे रहे थे। मनुवादी अछूतों को अपने गुलाम बनाने के लिए गुलामी के जाल बुनते जा रहे थे, जिस में अछूतों के गद्दार नेताओं को फंसा कर, बैसे ही इकट्ठा किया जा रहा था, जिस प्रकार जालिक जाल में मच्छलियों को इकठ्ठा कर के अपनी झोली में तड़फने के लिए डाल लेता है फिर उन्हीं को एक एक कर के चीरफाड़ कर के, बुरी तरह से निचोड़ कर गंदगी को साफ कर के, गर्म गर्म तबे पर भून कर खाता जाता है, बैसा ही हाल उन स्वार्थी, अछूतों के साथ गद्दारी करने वाले सभी गद्दार नेताओं का हुआ। उन्हें कुछ समय तक तो मनुवादियों ने जैसे कैसे बर्दास्त कर लिया था, मगर जैसे जैसे मौका लगता गया वैसे वैसे उन्हें भी मच्छलियों की तरफ बुरी तरह से काटा गया, खाया गया और राजनीतिक पर्दे से गायब किया जाता रहा जो आज भी जारी है। मनुवादियों ने वाणियाँ जाति के गांधी को अपना मोहरा बना कर, उन के संवर्ग लोगों को गुलाम बनाया मगर बाद में उसी गांधी को मार भी दिया है, जिस संविधान लेखक से संविधान लिखवाया गया उसे भी मरवा दिया गया, जिस वीर अजेय सांसद जगजीवन राम के यश के कारण कांग्रेस ने अछूतों के बोट लेकर एकछत्र राज किया उसे भी प्रधानमंत्री बनने नहीं दिया, जिस रामविलास पासवान ने सभी मनुवादी प्रधामन्त्रियों के साथ काम किया है, उस का हश्र अभी अभी सभी ने देखा, लालू मुलायम की जोड़ी ने, मनुवादियों का मुकाबला किया मगर उसी के कारण लालू जेल में और मुलायम फेल। ये 1931 की जनगणना थी, जिस ने शूद्रों को मौलिक अधिकार दिलाए थे।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
अप्रैल 08, 2021।
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