चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।
।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।
चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन के अध्यक्ष आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी को संबोधित करते हुए, रामसिंह आदवंशी ने कहा कि, सन 1931 की जनगणना में 485000 मूलनिवासी जनता ने अपना धर्म "आदधर्म" लिखा था मगर स्वतंत्रता के बाद जब संविधान लिखा गया है, तब आदधर्म को जनगणना से बाहर कर के, जनगणना फॉर्म में से आदधर्म का कॉलम खत्म कर दिया गया है। संविधान के निर्माताओं ने आदधर्म को एक नई जाति आदधर्मी के रूप में, संविधान में लिख दिया है, पंजाब, दिल्ली में तो जाति प्रमाण पत्र में भी आदधर्मी ही लिखा जाता रहा, जब कि भारत देश के राज्यों में अनुसूचित जाति, जनजाति प्रमाण पत्र बनाया जाता है। दिल्ली के कट्टर मनुवादी मुख्यमंत्री ने ये शब्द भी मिटा कर अनुसूचित लिखवाना शुरू कर दिया है जो पुनः आदधर्म के इतिहास को मिटाने का एक वहुत बड़ा षडयंत्र फिर कर दिया है। मूलनिवासी महापुरुष भी मनुवादियों के दबाब में ये अन्याय होते देखते आ रहे मगर आज जरूरत है कि हम स्वतंत्र रूप से चिन्तन कर के आदधर्म के साथ किये गए छल को समझें और मंथन कर के खोए हुए अधिकार को पुनः प्राप्त करें। ये आदधर्म अधिवेशन भी इसीलिए आयोजित करना पड़ा ताकि मूलनिवासी धार्मिक एकता स्थापित करने के लिए, एक मंच पर आ सकें। हमारे लिए आज अत्यंत प्रसन्नता का विषय ये है कि, इस आदधर्म सम्मेलन में अनेकों जातियों के महापुरुष भाग ले रहे हैं, अगर आप सभी मूलनिवासी इकठ्ठे होकर प्रयास करें तो आप के सहयोग से आदिवासी मूलनिवासी भारतीय लाल झंडे तले एकत्र हो सकते हैं और वह शुभ दिन भी आज आ चुका है। ये अधिवेशन मूलनिवासी जनता की भलाई के लिए मील पत्थर सावित होगा। इस से पूर्व आदधर्म मंडल के संस्थापक साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी, श्री हंसराज जी प्रेमगढ़, महासचिव बीडीओ हजारा राम पिपलांवाला, सांभा राम लायलपुरी, पंडित हरि राम पंडोरी, सन्त राम आजाद जी, रामचन्द्र खेड़ा, हरदित्ता मल्ल जी, भगत गुलाबा मल्ल जी, रोशन लाल वाल्मीक जी, श्री बिहारी लाल जी, रेसी राम खालसा, रामसिंह कबीर, महात्मा मईया सिंह खालसा, सूला राम, चमन राम, खड़कू मल्ल, उत्तम चन्द, हरदियाल, भगत राम हमीरपुरी ने मूलनिवासियों के लिये निर्णायक संघर्ष किया था, जिस के कारण ही आज हम सुख की सांस ले रहे हैं।
मुख्य विषय आदधर्म:---आज के सत्र का मुख्य विचारणीय विषय है "आदधर्म को किस प्रकार गतिशील बना कर, विश्व में पुनः स्थापित किया जा सकता है?" मैंने ये विचार किया है, कि जब हमारा मूलनिवासी उच्च शिक्षित नहीं था, तब तो तत्कालीन महापुरुषों ने, आजादी के लिए अपना जीवन भी बलिदान किया और अपनी खोई हुई राजनैतिक और धार्मिक प्रतिष्ठा को भी बहाल किया मगर आज हम उच्च शिक्षा प्राप्त कर के भी अपने पूर्वजों के धार्मिक कारवां को आगे तो क्या ही ले जाना, कारवां जहाँ उन्होंने पहुंचाया था, वहां से भी पीछे जा चुका है, उसे क्यों ना हम सब मिल कर मंजिल तक पहुंचाएं। साहिबे कलाम गद्दरी बाबा मंगू राम मुगोवालिया जी, स्वामी अच्छूतानंद जी महाराज, बिरसा मुंडा जी महाराज, तिलका माँझी महाराज और साहिब कांशीराम जी के अधूरे धार्मिक कार्यों को गति देने के लिए, एक मंच पर इकठ्ठे हो कर चिन्तन करें, जिस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ही आप को यहाँ आने का कष्ट दिया है, जिस विषय पर आप ने जो विचार प्रकट किए हैं, वे श्लाघनीय हैं और आशा हैं, कि हम लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगे।
मूलनिवासी यूरेशियन धर्म के पिछलग्गू:---बड़ी हैरानी का विषय है कि, कहीं ब्राह्मण, राजपूतों, वाणियों, जाटों के बीच कोई भी ऐसा पैग़ंबर नहीं हुआ है, जो सतगुरु रविदास जी महाराज, कबीर दास जी महाराज, नामदेव जी महाराज, वाल्मीकि जी महाराज, सेन जी महाराज, सदना जी महाराज का साम्य रखता हो, मगर फिर भी मूलनिवासी इन्हीं लोगों के धर्म स्थलों पर जा कर सत्संग सुन कर, जातीय आधार पर जलील और अपमानित होते आए हैं, बड़े बड़े राजनेता और मूलनिवासी भी, यूरेशियन धर्म स्थलों पर जा कर अपमानित हो चुके हैं, वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व उपप्रधानमंत्री जगजीवन राम सहित कई उच्च प्रतिष्ठित गणमान्य महापुरुष, ब्राह्मणों की घृणित सोच के शिकार हो चुके हैं, जिन को सीधे रास्ते पर लाना हमारा दायित्व है। हमें ऐसी व्यवस्था तैयार करनी है जिससे हमारे मन्दिरों में ही लोग जाएँ ताकि ब्राह्मणों के मन्दिरों में ना जा कर अपमानित ना हो सकें। सम्राट सिद्धचानो जी महाराज ही ऐसी शक्ति हैं, जिन के पास मृत्यु दंड की पावर है मगर अन्य तेती करोड़ देवताओं के पास कोई नाक रगड़ता मरे मगर उन के पास कोई सुनवाई नहीं होती है। मनुवादी ब्राह्मण को भी जब न्याय नहीं मिलता है तब वह भी सम्राट सिद्धचानो जी महाराज के पास गिड़गिड़ाता है। इसीलिए सम्राट सिद्धचानो जी महाराज को ही सच्ची सरकार कहा जाता है, फिर मूलनिवासी मनुवादी शक्तिहीन अवतारों के मन्दिरों में जा कर अपमानित क्यों होते हैं?
मनुवादी अत्याचारों से रक्षा:---आए दिन हमारे मूलनिवासियों को माब्लिंचिंग, बलात्कार, हत्या कर के जलाने, छुआछूत की घटनाओं से जूझना पड़ रहा है, जिस पर मनुवादी राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कम्युनिस्ट ही नहीं आरजेडी, बसपा आदि मनुवादी समर्थक पार्टियां भी मूकदर्शक बन कर अपना राजनीतिक धंधा चलाती आ रही है मगर इन सभी राक्षस प्रवृति के शासकों को कोई नकेल नहीं डालता है, जिस पर हमें काम करने की आवश्यकता है। हमें इन अत्याचारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बल गांव गांव में बनाने हैं और जिस प्रकार का अत्याचार हो, उस अत्याचार का, उसी भाषा के अनुसार जबाब देने की तैयारी करनी है।
आदधर्म किसी को अमीर-गरीब नहीं देखना चाहता, चाहे वह ब्राह्मण, राजपूत, वाणियाँ मुसलमान और ईसाई क्यों ना हो, सभी को गुरु रविदास जी महाराज के बेगमपुरा सिद्धांत के अनुसार जीवन जीने के अधिकार की वकालत करता है। हमारे गुरुओं ने हमेशा सत्य ईमानदारी और अहिंसा का उपदेश देते हुए, प्यार सद्भावना का मार्ग प्रशस्त किया है, जिस पर हमें चल कर, नया समाज तैयार करना है। आज आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी दिल्ली, सैंट्रल कमेटी दिल्ली के अध्यक्ष नरेंद्र जस्सी जी, महासचिव अक्षय आदवंशी जी, प्रोफेसर एमपी राणा जवाहरलाल विश्वविद्यालय दिल्ली, जोगिंद्र नरवाल जी, ओम प्रकाश जी, श्रीमती कमलेश जी, श्री गुरदयाल सलहन जी दिल्ली, सन्त राकेश जी बनारस, सन्त विजेंद्र प्रधान जी बनारस, सन्त ब्रजेश जी हरिद्वार उत्तराखंड, सुरेश जी महेश जी, बीके जी मैनपुरी उतर प्रदेश, डॉक्टर जगवीर सीएमओ हरियाणा, चंद्रकांत जी, पीसी चौधरी मध्यप्रदेश, धीरज रोहित गुजरात, प्रोफेसर लाल सिंह जी, चरनजीत जी भोगपुर, सन्त स्वयं दास रुड़की, प्रवीण भटोआ जी, मनजीत बिट्टू पंजाब, श्री बीएस परवाना प्रिंसिपल जम्मू कश्मीर, तरसेम सहोता जी, सन्त राम मूर्ति जी, जोगिंद्र रेंनसरी दिलबाग सिंह जी, सन्त लाल जी अर्नियाला, सन्त किशन जी, सन्त दीप बिनजी, अश्वनी जी धर्मपुर, अश्वनी जी बैजनाथ, सन्त करुणाकरण जी महाराज बैजनाथ हिमाचल प्रदेश, सभी आदधर्म को समूचे विश्व में स्थापित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
मुझे पूर्ण आशा है कि, आप भी साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी के कदमों पर चल कर आदर्श आदधर्म को प्रसारित प्रचारित करने में गति प्रदान करेंगे।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।विश्व आदधर्म मंडल।
अप्रैल 22, 2021।
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