चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। हिमाचल प्रदेश में जिला हमीरपुर के गाँव खठमी में, आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी की अध्यक्षता में चल रहे, ऐतिहासिक आदधर्म अधिवेशन में, श्री नरेन्द्र जस्सी प्रधान सैंट्रल गुरु रविदास सभा दिल्ली ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि, आज नौ अप्रैल 2021 का शुभ दिन आदधर्म के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। श्री रामसिंह आदवंशी जी ने, भारत के कोने कोने से आदधर्म के पैरोकारों को देवभूमि हिमाचल प्रदेश में बुला कर सामाजिक समरसता और मूलनिवासी एकता स्थापित करने के लिए वहुत बड़ा आयोजन किया है, हमें बुला कर हिमाचल प्रदेश की सुरम्य धरती के दर्शन करने का भी शुभ अवसर प्रदान किया है, जिससे हम भी कृतकृत्य हो गए हैं। आज जो यहां हम सामूहिक रूप से एकत्र हुए हैं, इस शुभ घटना को इतिहास हमेशा याद रखेगा। मैं सब का आदधर्म सम्मेलन में शिरकत करने के लिए धन्यवाद करता हूँ और इस के सफल आयोजन की वहुत वहुत वधाई देता हूँ। पंजाब की धरती के महान सपूत साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी ने, परतंत्रता में भी वह कर दिखाया है, जो परवर्ती नेता नहीं कर पाए हैं। हम तो गुलामों के गुलाम थे, हम तो दोहरी गुलामी झेल रहे थे, फिर हमारी क्या औकात थी कि हम अपनी आवाज बुलंद कर के यूरेशियन लोगों के खिलाफ विद्रोह कर सकें मगर साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी और उन के साथियों ने, निडर हो कर ब्राह्मणों के खिलाफ जंग लड़ी और मूलनिवासियों को कुछ हद तक मौलिक अधिकार प्राप्त कर के दिलाए हैं, जिन के कारण आज हम उच्च पदों पर आसीन हो कर अपने वच्चों का भरण पोषण कर रहे हैं और समाज की भी सेवा कर रहे हैं। कनाडा निवासी श्री सतविंद्र जी ने जो हमारी शिक्षा की कमजोरी की बात कही है, उस से मैं शतप्रतिशत सहमत हूँ, मनुवादी सरकारों ने दोहरी शिक्षा व्यवस्था कर के मूल निवासी समाज को शिक्षा के क्षेत्र में पीछे रखने का क्रूर षडयंत्र आजादी मिलने से पहले ही शुरू कर दिया था, जिस का मास्टर माइंड आर्य समाजी स्वामी दयानंद ही था, जिस की पोल कानपुर के स्वामी अच्छूतानंद महाराज ने, आर्य समाज की दोगली नीति को देख कर के  त्यागपत्र देकर उजागर कर दिया था और स्वयं हरिहरानंद की ब्राह्मणी उपाधि को त्याग कर, खुद को अच्छूतानंद घोषित किया था। स्वामी अच्छूतानंद जी महाराज ने, भारतवर्ष के गुलाम मूलनिवासियों की आजादी की लड़ाई पंजाब के वीर योद्धा स्वतंत्रता सेनानी, गद्दरी बाबा साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी के कंधे से कंधा मिला कर, हमारे अधिकारों के लिए संघर्ष किया था, जिन के प्रयत्न सदका ही आज क्रांतिकारी परिवर्तन संभव हुआ है, आज हम सब को भी उन के अधूरे कार्यों को पूरा करने की शपथ लेनी होगी, ताकि जो हमारे नेताओं ने पूना पैक्ट में खोया हुआ है, उसे पुनः बहाल किया जा सके। शिक्षा पर ध्यान दिया जाएगा:---सेंट्रल कमेटी दिल्ली शिक्षा के गिरते स्तर को मजबूत कराने के लिए भरसक प्रयास करेगी। एक दीर्घकालिक योजना तैयार करेगी, ताकि शिक्षा को रोजगार मूलक बनाया जाए। गुरु रविदास जी महाराज ने, शिक्षा पर बल देने के लिए ही गुरमुखी लिपि ईजाद की थी ताकि भारत के गुलामों के गुलाम आदिवासियों को शिक्षित किया जा सके, जिस के परिणामस्वरूप आज बड़े बड़े राजनेता और अफसर बन सके हैं। आदधर्म मंडल के प्रस्ताबों को अमलीजामा:--- साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित सभी प्रस्ताबों पर काम किया जाएगा। मूलनिवासी समाज में व्याप्त सभी कुरीतियों को समाप्त करने के लिए अभियान चलाया जाऐगा। जनगणना में सभी मूलनिवासियों को आदधर्म लिखवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आदधर्म के सिद्धान्तों को जन जन तक पहुँचा कर सभी को आदधर्म में शामिल करवाया जाएगा। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी के अधूरे कार्यों पर हम पुनः चिंतन कर के ऐसा वातावरण तैयार करेंगे, जिस से भारत में ही नहीं सारे संसार में आत्मनिर्भर और समतामूलक समाज तैयार होगा। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। अप्रैल 18,2021।

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