चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन।।
।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन।
श्री तरसेम सहोता निवासी नंगल पंजाब ने, गांव खठमी, जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में, आदधर्म गुरु दिल्ली की अध्यक्षता में चल रहे चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन में नौ अप्रैल को अपने विचार रखते हुए कहा, कि विश्व में केवल मात्र आदधर्म ही प्रकृति के उसूलों पर आधारित धर्म है। आदिपुरुष ने ही आदधर्म की नींव रखी हुई है। उन्हीं से चली हुई वंशावली में उन का बेटा जुगाद हुआ था, जुगाद का बेटा नील, नील का बेटा कैल, कैल का बेटा चंडूर था, चंडूर का बेटा मंडल, मंडल का बेटे कैलाश हुए थे, कैलास का बेटा सिद्धचानो जी महाराज हुए हैं। यही वह वंश है जिस में सभी सम्राट सिद्ध पुरूष हुए हैं, जिन की शक्तियों का लोहा सारा संसार मानता आया है। इन्हीं सत्पुरुषों द्वारा स्थापित आदधर्म है, जिसे यूरेशियन लोगों ने मलियामेट कर रखा है। पांच हजार सालों से इस वास्तविक ही नहीं अपितु तार्किक धर्म को स्वतंत्रता सेनानी एवं साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया ने पुनः जीवित किया है।
साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी ने सन 1924 में सारे भारत का भ्रमण कर के अछूतों को एक मंच पर इकठ्ठा करने के लिए आह्वान किया। 11/12 जून 1926 को गांव मुगोवाल में दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित कर के पंजाब आदधर्म मंडल की स्थापना की थी, जिस ने ये घोषणा की थी कि हम हिन्दू नहीं है, हम भारत के मूलनिवासी हैं, हम भारत के मूल आदवंशी, आदिवासी है, आर्य लोग यूरोप और ऐशिया से आए हुए घुसपैठिए हैं। हमारा धर्म आदधर्म है। हमारा पवित्र शव्द सोहम है, हमारा इतकाद जय गुरुदेव है। हमारे निशान साहिब का रंग लाल है। आदधर्म मंडल ने, भारतवर्ष में सामाजिक क्रांति उतपन्न कर के, गुलाम मूलनिवासी जनता को जागृत कर के 1937 के असेंवली चुनाबों में आठ विधायक जिता कर वहुजन राज की नींव डाली थी, जिसे मनुवादियों ने छलबल से तहस नहस कर दिया था।
आज हम सभी को उन के रोके गए कारवां को पुनः जीवित करने की आवश्यकता है, जिस के लिए आदधर्म मंडल को संगठित करना अति आवश्यक है क्योंकि हिन्दू हिन्दू धर्म के सहयोग से राज करता आ रहा है। इस्लाम धर्म इस्लामिक शासन स्थापित करता आया है। क्रिश्चिन धर्म ईसाइयों का राज स्थापित करता आया है। इसी तरह वहुजन राज को भी केवल आदधर्म ही ला सकता है। आदधर्म ही ऐसा धर्म है जिस में सभी जातियों के लोग सहर्ष शामिल हुए थे और अब भी इसी धर्म में शामिल हो सकेंगे। श्री रामसिंह आदवंशी ने, आज ये ऐतिहासिक कदम उठाया है, कि हिमाचल प्रदेश में आदधर्म अधिवेशन आयोजित कर के हमें विचार विमर्श करने का शुभ अवसर प्रदान किया है। हमें आदधर्म को भारत के प्रत्येक राज्य, जिले, खण्ड और गांव में पहुँचाने की शपथ लेनी होगी।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
अप्रैल 14,2021।
Comments
Post a Comment