चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म मंडल अधिवेशन।।
।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।
साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी द्वारा स्थापित आदधर्म मंडल के रुके कारवां को पुनः 2010 से जीवित करने के लिए विश्व आदधर्म मंडल द्वारा चतुर्थ आदधर्म मंडल अधिवेशन नौ दस अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के गांव खठमी में, आदधर्म गुरु दिल्ली निवासी श्री आरएन आदवंशी जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण अधिवेशन का शुभारंभ राष्ट्रीय हिस्सा आंदोलन के विशिष्ठ अतिथि विद्याप्रकाश कुरील जी और उन की धर्म पत्नी निवासी सिकंदरावाद तेलंगाना प्रदेश के करकमलों द्वारा दीप शिखा प्रज्वलित कर के किया गया। इस अधिवेशन के आरंभ में, गुरु रविदास जी महाराज द्वारा रचित आदर्श आरती "नाम तेरो आरती मंजन मुरारे हरि के नाम बिन झूठे सगल पसारे", के गान के साथ किया गया। गोलमेज अधिवेशन के आरंभ में श्री तरसेम सहोता जी, निवासी नंगल पंजाब ने आए हुए प्रतिनिधियों का अभिनंदन किया। उस के उपरांत आदधर्म अधिवेशन के आयोजक राम सिंह आदवंशी ने, देश भर से आए हुए गणमान्य प्रतिनिधियों को सम्मानित करने के लिए दिल्ली गुरु रविदास सभाओं के सेंट्रल कमेटी के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जस्सी, महासचिव अक्षय भारद्वाज, को मंच पर आमंत्रित किया। दोनों ही इतिहास पुरुष नेताओं ने सर्वप्रथम वयोवृद्ध एक सौ दो वर्षीय श्री हीरा राम जी को सम्मानित किया। उन के बाद उन्होंने इंग्लैंड से भेजे गए श्री अमरजीत गुरु के, सरोपे गले मे डाल कर, श्री गुरु रविदास जी महाराज की अति सुंदर सुंदर प्रतिमाएं भेंट कर के, सम्मानजनक ढंग से सभी डेलीगेट्स को सम्मानित किया। अधिवेशन के प्रथम सत्र में, "आदधर्म को विश्व के कोने कोने में किस प्रकार स्थापित किया जाए" विषय पर चर्चा शुरू हुई। अधिवेशन के आयोजक रामसिंह आदवंशी ने, सर्वप्रथम आदधर्म के प्रारंभिक इतिहास पर प्रकाश डालते हुए, आद महापुरुषों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि, प्रथम पुरूष "आद" हुए है, जिन के सपुत्र जुगाद हुए हैं, जिस का आभास गुरु रविदास जी महाराज द्वारा ईजाद मूलमंत्र "इक ओंकार,, सतनाम करता पुरख निर्भाऊ, निरवैर, अकाल मूरत आजूनि सैभंग, गुर प्रसाद आद सच जुगाद सच, है भी सच होसी बी सच, इस मूलमंत्र से स्पष्ट होता है कि, सृष्टि का शुभारंभ आदपुरुष ने ही, वर्तमान टेस्ट ट्यूब बेबी की तरह ही किया है, जिससे जुगाद बेटा हुआ था, उस के पवित्र ही नहीं अपितु दैवीय शक्ति संपन्न नील, कैल, चंडूर, मंडल, कैलाश और उन के सपुत्र सिद्धचानो जी महाराज हुए है, इसी वंश में दैवीय शक्ति संपन्न गुरु रविदास जी महाराज हुए हैं जिन्होंने अपनी वाणी में आदधर्म के बारे में साफ साफ कहा है:-
आद से प्रगट भयो जाको ना कोऊ अंत आदधर्म गुरु रविदास का जाने कोऊ बिरला सन्त"। गुरु रविदास जी महाराज ने, आदधर्म को जन जन तक पहुँचाने के लिए आजीवन मक्का मदीना से लेकर इराक और ईरान होते हुए कन्याकुमारी तक निरन्तर प्रचारित, प्रसारित किया था, जिस को साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी ने अपनी आदधर्म मंडल की सशक्त टीम के साथ आजीवन संघर्ष कर के जीवित किया है, जिसे हमें भी जीवित रखने के लिए प्रयास करना है। आदधर्म ही प्रकृति के उसूलों पर आधारित धर्म है जिस में किसी की ऊँच नीच, छूत अछूत, गोरा काला नहीं समझा गया है। इसी धर्म को कुछ अहंकारी, स्वार्थी, स्वेच्छाचारी, कुछ उच्छृंखल और मानवता के दुश्मनों ने, तहस नहस कर के कई अन्य धर्म ईजाद कर के मॉनव को मॉनव का दुश्मन बना कर, आपस में लहूलुहान कर रखा है। केवल आदधर्म ही इस अमानवीयता को समाप्त कर सकता है, जिस पर आज गहन, ही नही निर्णायक मंथन भी किया जाए, ताकि विश्व के इंसान को इंसान से प्रेम, प्यार, सहिष्णुता और सदभावना से जीवन बसर करने के लिए, तैयार किया जा सके। क्रमशः जारी रहेगा!
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
अप्रैल 12, 2021।
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