आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। 11/12 जून सन 1926 को साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी की अध्यक्षता में, मुगोवाल गांव में आदधर्म मंडल का गठन किया गया था, जिसमें  सर्वसम्मति निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए गए थे:--- 1 क हम सरकार को सूचित करते हुए, ऐलान करते हैं कि भारत की अछूत बिरादरियों के लिए आदधर्म मंडल चुका है। ख हमारा शुभ कामना सन्देश जय गुरुदेव है। ग हमारा इतकाद (विश्वास) गुरु आदि प्रगाश असंख दीप ग्रँथ की शिक्षाओं के अनुसार है। घ हमारा पवित्र साधना शब्द "सोहम" है। 2 हमारे आदधर्म के वानी:---गुरु रविदास, गुरु कबीर, गुरु नामदेव, गुरु सेन और महाऋषि वाल्मीकि जी ही हमारे अबतार और पैगम्बर हैं। वाणी के ग्रँथ का नाम गुरु आदि प्रगाश साहिब माना गया है। 3 सभी अछूत बिरादरियों, जातियों से अपील है कि, अपने लड़ाई झगड़ों को भुला कर, एक मुठ हो जाएं। आपस में लड़ना झगड़ना नहीं चाहिये बल्कि सभी अछूतों को इकठ्ठे बैठ कर भोजन करना चाहिए और आपस में एक दूसरे के साथ सामाजिक संबद्ध स्थापित करें। आपस में इकठ्ठे बैठ कर खाने पीने का रीति रिवाज शुरू करने चाहिए। 4 ये आदधर्म मंडल पंजाब के सभी जिलों सहित विश्व के आदधर्मियों का प्रतिनिधित्व करता है और सब से अपील करता है कि, अपने आप को गर्व से आदिधर्मी कहलाएं। 5 यदि कोई दूजी अर्थात दूसरी कौम कहीं भी एक भी आदधर्मी के ऊपर हमला करती है तो आदधर्मियों को एक दूसरे की राखी करनी चाहिए। 6 सभी आदधर्मियों को सभी महान धार्मिक आगुओं, ऋषि-मुनियों गुरुओं-भगतों महात्माओं को मानना चाहिये है। इन सन्तों के सच्चे पुजारी बुत पूजा जातिपाति या उच्च और हीन कार्यों के बीच विश्वास नहीं करेंगे। 7 भारत के मूलनिवासियों और अछूत भाईचारे की सभी लड़के और लड़कियां को प्राईमरी तक की शिक्षा अवश्य लेनी चाहिए। 8 जो ग्रँथ और शास्त्र अछूतों को गुलाम बताते हैं, उन का बहिष्कार किया जाना चाहिए, ऐसी पुस्तकों को मानना एक नैतिक पाप है। 9 आदधर्मियों को आपस में खाना, पीना कानून के अनुसार जायज है। दूसरों को भी आदधर्मियों के हाथों खाना चाहिये ताकि समरसता पैदा हो सके। 10 शिक्षा मंत्री पंजाब सरकार लाहौर से आग्रह किया जाता है कि, वह सभी अछूतों के वच्चों को विशेष स्कालरशिप और शिक्षा दे, क्यों कि हम अपनी गरीबी के कारण अपने वच्चों का पूरा खर्च नहीं उठा सकते। 11 हमारे वच्चों का ध्यान सरकार रखे, क्यों कि प्राईवेट स्कूल हमारी मदद नहीं करते हैं या फिर हमारे वच्चों के स्कूल प्रवेश में ध्यान दिया जाए। हमें भी दूसरों की तरह ग्रांट मिलनी चाहिये। अछूतों के लिए स्पेशल स्कूल स्थापित किये जाएं। उपरोक्त समस्याओं के समाधान के कारण ही साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी का आदधर्म मंडल सफलता की ऊंचाइयों को प्राप्त कर सका था। ये आदधर्म मंडल का ही करिश्मा था कि, गुरु रविदास जी महाराज के रुके हुए कारवां को, इस के नेताओं ने पुनः किसी लाग लगाव, स्वार्थ के गतिशील बनाया था। गुरु रविदास जी महाराज के अनुयायियों ने निस्वार्थ भाव से आदधर्म को वुसव में दृढ़ अवश्य किया था, कबीर साहिब, नामदेव जी, सेन जी और वस्ल्मीकि जी ने केवल "सोहम" शब्द की नैया पर सवार कर के, सभी भारत के आदिवासियों को भवसागर से पार उतारा था मगर मानवता के शत्रु यूरेशियन आक्रांताओं ने, अपना छल कपट जारी रखा। जब जब इन लोगों को दांव लगता है वैसे ही ये लोग अपनी घृणित नीतियों के द्वारा अपनी राक्षस प्रवृति को जाहिर करते आए हैं। जब तक सत्ता मूलनिवासियों के हाथ में रहती है तब तक तो ये लोग मूकदर्शक बन कर बैठे रहते हैं, सब कुछ बर्दाश्त करते हैं, ज्यों ही इन की कटु घातनीति सफल हो जाती है वैसे ही ये लोग पुनः सत्ता छीन कर अपनी मनुस्मृतियों के काले कानूनों को थोंप कर, आदवंशियों मूलनिवासियों  को मावलिंचिंग के द्वारा मारना शुरू करते आए हैं, जो आज भी जारी है। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। अप्रैल 05, 2021।

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