चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।
।।चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।
गाँव खठमी जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में, आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी जी महाराज की अध्यक्षता में चल रहे, चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन में श्रीमती बीना कुरील जी निवासी सिकंदरावाद शहर, तेलंगाना प्रदेश ने आदधर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए आज कहा कि, आदधर्म गुरु रविदास जी महाराज का बताया हुआ धर्म है, उन्होंने लिखा हुआ है कि:---
आद से प्रगट भयो जा को ना कोऊ अंत।आदधर्म गुरु रविदास का जाने बिरला सन्त।।
गुरु रविदास जी महाराज ने साफ साफ शब्दों में वर्णन किया हुआ है कि, आदिपुरुष से आदधर्म प्रकट हुआ है, जिस का कोई भी पारावार नहीं है। कोई भी आदधर्म का आरंभ और अंत नहीं जान सकता है, केवल कोई बिरला ही ईश्वरीय विचारधारा को समझने वाला धार्मिक व्यक्ति ही समझ सकता है, फिर समझ में नहीं आ रहा है कि, क्यों लोग अनेक धर्मों का सृजन करते जा रहे हैं, भारत में क्यों मूलनिवासियों को बांटते जा रहे हैं। क्यों आदमी को आदमी का धर्म के नाम पर बैरी बनाया जा रहा है। पांच हजार वर्ष पहले यही एक धर्म भारत में था। इसी पवित्र आदधर्म को लोग मानते थे, इसी से सारा भारत एकजुट हो कर रहता था मगर जब से विदेशी आर्यों ने भारत देश को गुलाम बनाया हुआ है, तब से ही हमारी मूलनिवासियों की सिंधुघाटी, राखीगढ़ी और मोहनजोदड़ो हड़प्पा, सभ्यताओं को मिटाने का छद्म अभियान चलता आ रहा है, हमारे मूल वंश के महापुरुषों को राक्षस सिद्ध किया जा चुका है, वर्तमान महापुरुषों को भी अपमानित किया जा रहा है, गुरु रविदास जी महाराज, कबीर महाराज, वाल्मीकि महाराज की मूर्तियां तोड़ कर हमें ही जलील किया जा रहा है मगर ये केवलमात्र एक धर्म, एक मूलनिवासी,आदिवासी राजनीतिक पार्टी ना होने के कारण ही हो रहा है। मैं ने बड़ी बारीकी से आदधर्म के नियमों और सिद्धांतों का अनुशीलन किया है, जिन को पढ़ कर अत्यंत हैरानी होती है कि, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया और उन की टीम ने कितने विष्मयकारी नियम बना कर, गुरु रविदास जी महाराज के "बेगमपुरा शहर को नांऊँ" को लागू करने के लिए भूमिका बॉन्ध दी थी, जिसे हमारा समाज, हमारे नेता समझ नहीं पाए और ब्राह्मणों के ही गुलाम बन कर अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए मूलनिवासियों को बेच कर खाते रहे। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी के बारे में, आज रामसिंह आदवंशी जी ने बताया कि वे, वर्तमान भारत देश के मसीहा हुए हैं, उन्होंने ही अंग्रेजों को मेमोरेंडम दे देकर भूमि खरीदने का हक दिलाया, बोट नौकरी आरक्षण के अधिकार उन्हीं के दिमाग की देन है, यहाँ तक कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पक्ष में टेलीग्राम भेज कर उन को भी मूलनिवासियों का राष्ट्रीय नेता उन्होंने ही बनाया था, मैं उन सब को तहे दिल से प्रणाम करती हूँ, मैं समझती हूँ कि जब साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी के कार्यों का जिक्र सारे संसार में होगा तब उन्हें ग्लोबल रत्न के सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
जब लाहौर असेंवली हाल में उन्हें लार्ड लोथियन ने बुलाया था और उन्हें कुर्सी ऑफर की गई थी तब उन्होंने सिर पर कुर्सी रख कर, सावित कर दिया था कि, मूलनिवासियों के पास कुली बनाने के लिए भी जमीन नहीं है, उन्होंने एक ही झटके से मूलनिवासियों के लिए जमीन खरीदने बेचने के अधिकार देने के लिए अंग्रेजी हकूमत को विवश कर दिया था। यही नहीं उन्होंने उस समय प्रस्ताब पास करवा कर घोषणा कर दी थी कि, हम हिन्दू नहीं हैं, हम सरकार से पुरजोर बेनती करते हैं कि सरकार हमारे साथ ऐसा ना करे, ना ही जनगणना में हिन्दू लिखे। हमारा धर्म केवल आदधर्म ही है। हम हिन्दू धर्म के हिसा नहीं है और ना ही हिन्दू हमारा हिसा हैं। हमारा लाल रंग आदधर्म का राष्ट्रीय निशान है, ये आदिवासियों का रंग है, हमें आर्यों ने ये रंग प्रयोग करने पर पाबंदी लगा रखी है, सरकार मूलनिवासियों को लाल रंग प्रयोग करने की अनुमति प्रदान करे। मनुस्मृतियों, वेदों और पुराणों में मूलनिवासियों के लिए अपमानजनक शब्दों में कानून लिखे गए हैं, जिन्हें जब्त कर के जलाया जाए। ये किताबें हमारी प्रगति के मार्ग में वहुत बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं। पंजाब प्रदेश सरकार बन्धुआ मजदूरों को स्वतंत्र करवाए और बन्धुआ मजदूरी पर पाबंदी लगाए ताकि मूलनिवासियों का शोषण बंद हो सके। जिस समय मूलनिवासियों के लिए ज्ञान हासिल करने, पढ़ने, लिखने, स्कूल जाने के कोई अधिकार नहीं थे, उस समय ऐसे चिंतक, थिंकर, भविष्य द्रष्टा होना कोई छोटी बात नहीं थी, फिर सरकार को इन समस्याओं के प्रति समझाना भी बड़ी बुद्धिमता का काम था, जिसे साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी और उन के सहयोगी सिपाहसलारों ने कर के दिखाया है, मैं उन सभी महापुरुषों को नमन करती हुई अपने वक्तव्य को विराम देती हूँ और पूर्ण आशा करती हूँ कि आप आदधर्म को भारत में ही नहीं विश्व कोने कोने में प्रचारित करेंगे और मानवता का बचाव करेंगे।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
अप्रैल 24,2021।
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