चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।।

।। चतुर्थ राष्ट्रीय आदधर्म अधिवेशन।। आदधर्म गुरु आरएन आदवंशी जी महाराज दिल्ली की अध्यक्षता में चल रहे आदधर्म अधिवेशन में नौ अप्रैल को भावना शुक्ला ने, देश विदेश से आए आदधर्म मंडल के डेलीगेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि, सभी धर्मों को छोड़ कर केवल एक ही आदधर्म को जब तक अपनाया नहीं जाएगा, तब तक समस्त विश्व में सद्भावना, समरसता, शान्ति, स्नेह कदापि पैदा नहीं हो सकते हैं। आज धर्म केवल खून खराबे, कत्लेआम, माब्लिंचिंग, अत्याचारों के प्रतीक बन चुके हैं, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी सभी आपस में दुश्मन बने हुए हैं, जब कि धर्म का कार्य ही आपस मे प्यार, एकता, सहिष्णुता, हमदर्दी, एक दूसरे के सुख दुख में सुख और दुख को बांटना सिखाता है। आए दिन एक धर्म के ठेकेदार दूसरे धर्म के लोगों को पशुओं की तरह पीटते, मारते, घसीटते, कत्ल करते हुए सुने जा रहे हैं, ये तभी हो रहा है जब ये अनेकों धर्म बने हुए हैं। यदि  एक धर्म होता तो कोई किसी के खून का प्यासा नहीं होता और ना ही कोई किसी का अहित ही करता और ना ही कभी सोचता है। सुना है कि सन 1931 की जनगणना में सभी धर्मों के बुद्धिजीवियों, बुद्धिमान महापुरुषों और विद्वानों ने अपना धर्म आदधर्म लिखकर केवल आदधर्म में आस्था प्रकट की थी। सभी जातियों के लोगों ने आदधर्म को स्वीकारा था, लोगों ने आदधर्म की वास्तविकता को स्वीकारा था, फिर उसी जनप्रिय धर्म को संविधान में क्यों धर्म के रूप में दर्ज नहीं किया गया था, ये विचारणीय विषय है, जिस पर कोई भी व्यक्ति चिंतन नहीं कर रहा है, क्यों इस षड़यंत्र की तह तक नहीं पहुँचा जा रहा है? क्यों भीतरघात करने वालों को जगजाहिर नहीं किया जा रहा है? यदि 1931 के बाद से ही जनगणना में आदधर्म लिखा जाता, तो आज विश्व में केवल आदधर्म ही होता और सारे संसार में शान्ति ही शान्ति होती, ना मिजायल बनते, ना तीर, तोप, तलबार, गोली, राकेट लाँचर बनते, ना ही माताओं के वीर सपूत मौत के घाट उतरते ना ही कोई स्त्री विधवा होती, मगर केवल उच्छृंखल व पागल सनकी शासकों की मूर्खता के कारण धर्म को इस्तेमाल किया जा रहा है। आज बड़ी खुशी की बात हो रही है कि, आदधर्म के बारे में चिन्तन हो रहा है, यदि ये चिन्तन विश्व में फैल जाए, घर घर पहुँच जाए, सभी आदधर्म को स्वीकार कर लें तो मैं समझती हूं कि, विश्व एक घर ही बन जाऐगा और संसार के हर भूभाग पर शान्ति स्थापित हो जाएगी, कोई किसी देश की सीमा नहीं रहेगी, कोई  किसी का खून नहीं बहाएगा, कोई अस्त्र शस्त्र नहीं बनाएगा, कोई मां का सपूत सीमाओं की रक्षा करते हुए शहीद नहीं होगा। चारोँ ओर सुख और शांति का ही नजारा होगा, सभी का आपस में भाईचारा ही होगा। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। अप्रैल 21,2021।

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