आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।
।। आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।।
आदधर्म मंडल के संस्थापक साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी ने, अर्बाचीन आदधर्म को नया आकार, नया स्वरूप प्रदान कर के, भारत के मूलनिवासियों को पांच हजार सालों की खोई हुई पहचान पुनः लौटा कर के नया इतिहास रच डाला था। भारत के मूलनिवासियों को पुनः विश्व के मानचित्र पर दर्शा कर, यूरेशियन को विश्व में बुरी तरह से बेनकाब कर के, उन के कारनामों के लिए नग्न कर दिया था।1931 की जनगणना में आदधर्म को शामिल कर के, विश्व के इतिहास में अछूतों की उपस्थिति दर्ज करवाई थी। मूलनिवासियों के लिये धर्म ग्रँथ गुरु आदि प्रगाश भी स्वामी ईशरदास जी महाराज से तैयार करवा कर के, मनुवादियों के होश उड़ा दिए थे, मगर उन के सिपाहसलार साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी को समझ नहीं सके थे, कि हमें तो साक्षात वे अवतार मिले हुए हैं, जिन का हमें सच्चे दिल से साथ देना चाहिए। उन के इस सत्य की गवाही, विदेशी स्कॉलर डॉक्टर मार्क अपनी पुस्तक रिलीजिन एंड सोशल विजन में लिखते हैं कि सन 1931 की ऐतिहासिक जनगणना के कारण आदधर्मियों के आदधर्म मंडल ने, अपने लिए उपयुक्त स्थान तराश लिया था। जिस प्रकार उस समय के पंजाब में आर्य समाज का संसार, सिंह सभा और फिरकू पहचान, राष्ट्रवाद और भारतीय सामाजिक सुधारों के लिए, वहुत सारे आंदोलनों की तरह, आदधर्म मंडल ने भी अपने लक्ष्य आप ही बनाए थे। खुद आदधर्म मंडल ने ये तथ्य स्थापित कर के, लक्ष्य प्राप्त कर लिया था, जो पिछले पांच हजार सालों से सिद्ध नहीं हुआ था। गुलाम अछूत जातियां अपनी अगुवाई में कोई भी हिलचुल और खूनी आंदोलन करने के योग्य नहीं थीं। संगठित तरीके से इकठ्ठे हो कर आपस में वे किसी भी हालत का मुकाबला नहीं कर सकते थे। ये सभी लोग सामाजिक और राजनीतिक अखाड़े को अपनी बड़ी गिनती के साथ कंट्रोल नहीं कर सकते थे, उस की प्राप्ति के लिए अब समय पूरी तरह परिपक्व हो गया था, वास्तव में अछूतों की ये निःसन्देह एक वहुत बड़ी सफलता और प्राप्ति थी। भारत में आदधर्म मंडल ने अधिकारिक रूप में, वह सब कुछ प्राप्त कर लिया जो भी वह शानदार प्राप्ति, प्राप्त कर सकता था, सन 1931 और महान जनगणना आंदोलन के ताज रूपी आदधर्म मंडल को सदा याद रखा जाएगा।
आदवंशियों को, अपने मूल धर्म, आदधर्म को ही अपनाना पड़ेगा, मनुवादियों के छल कपट और षड़यंत्र को समझ कर किसी भी अन्य धर्म में शामिल नहीं होना चाहिए। ब्राह्मणों ने ही पहले कई धर्म बनवाए और बर्बाद किये और अब भी चमार जाति की बढ़ती धार्मिक शक्ति को बर्बाद करने के लिए, एक आरएसएस समर्थक नया धर्म बनवाया है, जिस से हमारी एकता खत्म हो सके, जिस षडयंत्र को नेस्तनाबूद करना आप का दायित्व है।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
अप्रैल 04, 2021।
Comments
Post a Comment