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Showing posts from March, 2021

आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।। सन 1931 ईस्बी में जनगणना ऑपरेशन शुरू होने से पूर्व पंजाब आदधर्म मंडल ने पंजाब सरकार को एक बेनती पत्र भेजा था, जिस में कहा गया था कि, दबियाँ-कुचलियाँ श्रेणियों को जनगणना के समय आदधर्म के बीच प्रवेश करने की आज्ञा दी जाए, ताकि हम आदधर्म को अपना धर्म मान सकें क्योंकि हम भारतवर्ष के मूलनिवासी, आदिवासी समाज में से हैं और हमें हिन्दू अपने से दूर रखते हैं। आदधर्म मंडल के प्रधान को यह सूचित कर दिया गया था कि, जनगणना कोड के बीच एक धारा निर्धारित कर दी गई है, ताकि वे लोग जो आदधर्म के बीच वापस आना चाहते हैं, वे आ सकें। एक बार जब कि आदधर्म जनगणना सूची में शामिल कर लिया गया था, इस बात को यकीनी बनाने के लिए वहुत ज्यादा कोशिश की गई, कि इस धर्म को अपना वास्तविक धर्म ऐलानिया था, आदधर्म को आदधर्म मंडल ने अपनी शाखाओं के दफ्तरों और वहुत सारे गांवों के करिन्दों की मदद से फैलाया गया ताकि अपना मकसद पूरा किया जा सके। ये वहुत ही ज्यादा तनाव का समय था, जब कि आदधर्म मंडल गरीबों के कुछ तबकों के बीच लाभ लेने का प्रयत्न कर रहा था। आदधर्म मंडल अपने विशाल तबके के लोगों की शक्ति को वापस...

आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। सन 1909 ईस्बी में जनगणना कमिश्नर एडबर्ड मेट ने ये सुझाव देते हुए गसती पत्र जारी किया था, कि दबियाँ, कुचलियाँ जातियों की उच्च श्रेणी जाति हिंदुओं से अलग सूची बनाई जानी चाहिए। हिंदुओं की ओर से इस का जबाब डर से भरपूर था। यह सुझाव भले ही अपनाया नहीं गया था, परन्तु उन का डर चिर स्थाई बना रहा और सन 1931 ईस्बी की जनगणना के बीच आदधर्मियों के प्रस्तावित दाखले ने उन डरों को पुनर्जीवित कर दिया। विशेष बात तो ये थी कि, इस ने आदधर्म मंडल और आर्य समाज के बीच तनाव को और अधिक बढ़ा दिया था, जिन में से अधिकतर सारे मैंबर जनगणना के मुद्दे को लेकर राजनीतिक परिक्रम के प्रति वहुत संवेदनशील थे। आदधर्म मंडल की चिंता प्रकट होना अंग्रेज सरकार की खुशी का एक कारण हो सकता है। आदधर्म मंडल के बीच इतनी बड़ी ताकत थी कि हिन्दू धर्म के संगठन जिस प्रकार आर्य समाज, जिस ने राष्ट्रीय स्तर का नाम बनाया था, उस से बढ़ कर ये विपरीत प्रभाव डाल रहा था, जिन की ओर से विरोधिता की आशा की जा सकती थी, फिर जब आदधर्म मंडल जनगणना कमिश्नर के ऊपर एक धार्मिक और एक श्रेणी के तौर से उभरा, जो कि एक वहुत बड़े सम्मान क...

आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। डॉक्टर मार्क जरगन जमायर जी अपनी पुस्तक के बीच लिखते हैं कि, यह अजीव दिखाई दे सकता है कि, जनगणना को इतनी ऊर्जा और संवेग के लिए निकास का उद्देश्य बन जाना चाहिये है परन्तु इस का महत्व वहुत ही असली और वास्तविक था। इस के कारण जनगणना आंकड़ों के बीच अपने आप तलाशे जा सकते हैं चाहे पंजाब में धार्मिक भाईचारे की संख्या की शक्ति इलाके के अनुसार बदलती रहती है, परंतु मध्य पंजाब के बीच जहां आदधर्म अपना सब से अधिक प्रभाव रखता है, यहां हिदुओं सिखों और मुसलमानों की गिनती लगभग एक जैसी ही थी। ये संतुलन व्यास नदी से ले कर सतलुज नदी के बीच पड़ते दोआबे के जालंधर और होशियारपुर दोनों जिलों के बीच खास कर के और भी निकट था। इस इलाके की एक और भी खास विशेषता थी कि, जिस प्रकार जनगणना प्रकट करती है। यहां अछूतों के आम लोगों की अपेक्षा उन सब के मकान अधिक थे, जहां इन की आबादी, कुल जनंसख्या का 23 प्रतिशत था, यदि किसी कारण अछूतों को उन की जनगणना श्रेणी में से निकाल दिए गए थे, जिन के बीच उन के विधि अनुसार नाम दर्ज थे, जिस प्रकार सिख, हिन्दू और मुसलमान थे, यदि ये इकठ्ठे एक अलग ग्रुप के बीच गि...

आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। विदेशी अंग्रेजों के गुलामों के गुलाम आदवंशी आदिवासी और मूलनिवासी गुलामी की दोहरी चक्की तले पीसे जा रहे थे, जिन की आजादी के लिए कोई भी माई का लाल अपनी जुवान तक नहीं खोल रहा था। ओबीसी अर्थात पिछड़ी जातियों को नाई ठाकुर और राजा, कुम्हारों को ब्रह्मा के बराबर प्रजापति, चमार जाति को सिल वहिये मिंयें, घिरत, बाहती, चाहंग और जाट को चौधरी, सुनार को सोनी आदि घोषित कर के मूलनिवासियों के अक्ल के अंधे  नेताओं को उल्लू बना कर, कांग्रेस के नेताओं ने अपने साथ मिला कर रखा हुआ था, वे आदधर्म मंडल के विरोध में कांग्रेस का साथ देते आ रहे थे। वे चन्द सिक्कों के लिए, केवल कांग्रेस के ही नहीं सभी मनुवादियों के दुमछुल्ले बने हुए थे, जो आदधर्म मंडल मूलनिवासियों की गुलामी की जंजीरों को काटने की विसात विछाते थे, उस को इन्हीं अंध भक्तों के द्वारा कांग्रेस कटवाती जाती थी। आदधर्म के परवाने स्वामी ईशरदास महाराज, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी, सेठ सुंदर दास घनेहिया लाल हकीम जी, सेठ लभु राम , लच्छू मल साह, ठाकुर चन्द जी, गुरबन्ता सिंह, शूद्रानंद, बीडीओ हजारा राम, हंस राज, पंडित हरि...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी के विचार, डॉक्टर मार्क जर्गन जमायर के हैं, डॉक्टर मार्क यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बरकले यू एस ए में विजिटिंग एसोसिएशन एसोसिएट प्रोफेसर आफ रिलिजियस स्टडीज़ (धार्मिक अध्ययन) और एसोसिएट प्रोफेसर आफ एथिक्स एंड दी फिनामिनालोजी आफ रिलीज़न, ग्रेजुएट बायलोजिकल यूनियन थे। हस्तलिखित लेख बाबू मुगोवालिया बनाम महात्मा गांधी, उन की पुस्तक Religion vr social vision से Mangu Ram Vr Gandhi लेख का मुख्य अंश है। ये पुस्तक भारत में Religion Rebels in Punjab टाईटल के अधीन छापी गई है, जिस में उन्होंने बाबू मंगू राम और कांग्रेस की कारगुजारियों का चित्रण किया हुआ है। उन्होंने लिखा है कि, बाबू मंगू राम मुगोवालिया जी ने, कांग्रेसियों की नमक बनाने की भट्ठियां इसलिए तोड़ीं थीं, क्योंकि ये प्रसिद्ध गांधी कांग्रेसी और आर्य समाजवादियों द्वारा आदधर्म मंडल और आदधर्मियों को जलील करने वाला आंदोलन था महात्मा गांधी वायसराय जेम्ज वेवल के पास जा कर तीन मांगे मांग रहा लगा था, कि सभी नमक आंदोलनकारी कैदियों को बिना शर्त छोड़ दिया जाए, नमक टैक्स समाप्त करें, डॉक्टर...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। आदधर्म मंडल ही सत्य की लड़ाई लड़ रहा था। आदधर्म मंडल ही प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवनयापन करने का मार्ग प्रशस्त करता आया है और दूसरों को भी कराता आया है। अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों के अनुसार ही जीने की राह बताता है और बताता आया है और खुद भी इसी मार्ग पर चलता आया है मगर पाँच हजार सालों से इस सिद्धांत को ग्रहण लगा हुआ है। मूलनिवासी भारत के शासक कोई सेना पुलिस नहीं रखते थे, कोई भी व्यक्ति चोरी, लूटपाट, बदमाशी और ठगी नहीं करते थे मगर जब से विदेशी यूरेशियन भारत में घुसे हैं तभी से ही यहाँ ये सर्वस्व घटने लगा हुआ है। मुस्लिम शासकों ने भारत को जी भर कर लूटा, अंग्रेजों ने भारत का सारे का सारा कच्चा माल इंग्लैंड ले जाकर पक्का कर के बेचा, इन्हीं की संतानों ने भारत के सच्चे सुच्चे शासकों को धोखेबाजी से अपना गुलाम बनाया और हम मूलनिवासियों को ही सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया। महात्मा गांधी तो मानो सत्य, सत्याग्रह और अहिंसा का काल्पनिक अवतार ही था। गांधी के अनुसार सत्याग्रह क्या है:---महात्मा गांधी का मानना था कि हर व्यक्ति के अंदर सत्य का अंश होता है और उस को सत्...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। कांग्रेस का मुखौटा महात्मा गांधी, केवल अपने आप को अवतार घोषित करने के चक्कर में, छलकपट की छद्म नीति का सहारा लेता हुआ गन्दी राजनीति करता रहा, जिस का फल उसे उन लोगों ने दिया जिन के लिये ये व्यक्ति गरीबों की छाती पर चढ़ कर, अमीरों, शोषकों के लिए लड़ रहा था। मूलनिवासी मजलूमों की जिंदगी से खेलने वाले मानवता के दुश्मन महात्मा को दण्ड भी उसी के फर्माबरदारों ने ही दे दिया है। देर है अंधेर नहीं, एक दिन अन्याय की सजा आदपुरुष अवश्य देता आया है। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी दिल से गरीबों, मजलूमों, गुलामों की आजादी की लड़ाई लड़ते आ रहे थे जिन की आवाज को धीमा ही नहीं बन्द करने के लिए, बिकाऊ मूलनिवासी छदमी स्वार्थी नेताओं ने, मंत्री पद, सांसद, विधायक बनने के लिए अपने समाज को बर्बाद करने में जरा भी संकोच नहीं किया। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के पंजाबी गद्दारों ने, अछूत उद्धार मंडल बना कर, शाही कमिशनों के पास पेश हो कर, उन की मुखालफत करते हुए, कांग्रेस का साथ दिया था, मगर सत्य को कोई छुपा नहीं सकता, सत्य एक दिन सामने अवश्य आ ही जाता है। आदधर्म मंडल ने जो सड़कों पर...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।। आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। आदधर्म मंडल वैसे ही मूलनिवासियों को हिरदय से प्रेम करता था जिस प्रकार माता अपने पेट से जन्मे बच्चे को प्यार ही नहीं परवरिश भी करती है, भले ही वह खुद मर जाए, मगर अपने बच्चे को जरा भी आंच नहीं आने देती मगर अधिकतर सौतीली माताऐं तो सौतीली ही रह कर पराए बच्चे को दिली प्यार कभी नहीं करती हैं। यही अंतर था महात्मा गांधी और साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के अछूतों के प्रति प्यार और हमदर्दी का। लेखक सीएल चुंबर जी लिखते हैं कि, चाहे आदधर्म मंडल का आदर्श समाज का मानवतावादी दृष्टिकोण था परन्तु वह मसलों को बिलकुल बखरे तरीके से महसूस करता था। हो सकता है, कि उन का दृष्टिकोण ऊपर से देखने में, महात्मा गांधी के बुनियादी तबदीली लाने की तरह ना हो, या फिर हो भी सकता था, आदधर्म वालों का ज्यादा असली हो मगर आदधर्मियों को लगता था कि, अछूत समाज के वर्ग को जिस मौजूदा हालात के बीच शक्ति और सम्मान मिले बिंना, आम सामाजिक बराबरी हासिल करने की कोई संभावना नहीं है। ड़ाक्टर मार्क जी लिखते हैं कि, ये अत्यंत जरूरी था कि शक्ति, स्तर और सम्मान निम्न जातियों को दिया जाता और तभी इन सब जातिय...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। पूना पैक्ट हो गया था, मगर इस से यह स्पष्ट नहीं हो रहा था कि, इस से कितने लोगों को लाभ होगा, जिस की कोई गारंटी ये समझौता नहीं दे रहा था, ये भी गारंटी नहीं दे रहा था कि, कितनी सीटें दी जाएंगे, जिस से साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी बड़े आहत थे, इसीलिए उन्होंने अपना आमरण अनशन जारी रखा हुआ था। स्वर्गीय सीएल चुंबर अपने वहुजन बुलेटिन में लिखते हैं कि, अछूतों को विधान सभाओं में कितनी सीटें दीं जाएँगी, उन का कोई जिक्र नहीं किया जा रहा था, जिस के कारण बाबू मंगू राम जी ने पुनः आंदोलन की घमकी दे दी, जिस के कारण पंजाब को केवल आठ विधानसभा की सीटें घोषित की गईं, भले ही इन आरक्षित सीटों पर मनुवादियों के पिछलग्गू जीतने वाले थे मगर फिर भी आदधर्म मंडल वहुत खुश था कि, उन के संघर्ष सदका वहुजन समाज को विधानसभा और संसद में बैठने का दरवाजा तो खुला। जब पंजाब में आठ सीटों की घोषणा की गई थी, तब जालंधर शहर के बीच वहुत बड़ा समागम किया गया था जिस में बाबू मंगू राम मुगोवालिया जी ने आमरण अनशन समाप्त किया था। आमरण व्रत को तोड़ते समय साहिबे कलाम मंगू राम जी ने अपने विचार व्यक्त करते ...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी। 24 सितंबर 1932 को भारत के मूलनिवासियों की गुलामी का दस्तावेज तैयार हो गया। डॉक्टर भीम राव अंबेडकर ने महात्मा गांधी के प्रपंच पर सहमति जिता कर पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर कर दिए, समझौते के अनुसार कोई भी व्यक्ति दोहरे बोट की मांग नहीं कर सकता था। दोहरे चुनाव क्षेत्रों का दावा नहीं कर सकता था। बशर्ते उन्हें खुले चुनाव के बीच में से आरक्षित सीटें दी जाएं, जिस का भाव था, निरोल अछूतों के लिए चुनाव क्षेत्र नहीं होंगे, जबकि इन के स्थान पर बिकाऊ सांसदों विधायकों के लिये सीटों की स्थापना की जाएगी। जिन में केवल मात्र अछूत ही अहुदेदार अर्थात सांसद तथा विधायक के उम्मीदवार बन सकेंगे। ऐसे क्षेत्रों में चुनाव मिश्रित होंगे, जिस से हर एक को मौका मिल सके कि वह वह किस उम्मीदवार को चुनाव के लिए मुकर्रर करता है। ये प्रबंध आज भी भारत में मौजूद हैं। जब ये प्रबंध सन1932 में शुरू किया गया था, आदधर्म मंडल की ओर से ये वहुत बड़ी जीत मानी गई थी, क्योंकि इस के तुरंत बाद राजनीतिक दलों के अछूत उम्मीदवारों को आम चुनाबों के बीच खड़े होने के साथ उन में से कुछ को विधायक बनाने का वायदा पूना पैक...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। आदधर्म मंडल ही सड़कों पर मूलनिसियों की लड़ाई लड़ रहा था मगर अपने ही मूलनिवासी गद्दार विभीषण आदधर्म मंडल की टांगे खींचे जा रहे थे। महात्मा गांधी के मरण व्रत की साजिश इन अंधों को नजर नहीं आ रही थी, जिस के कारण साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी को भी गांधी के समानांतर मरण व्रत रखने के लिए विवश होना पड़ा था। सीएल चुंबर जी लिखते हैं कि, बाबू मंगू राम जी का मरण व्रत, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के लिए भी एक मददगार यत्न था। बाबू जी तत्काल शिमला चले गए और वहां अपनी मांगों के लिए आवाज उठाई थी और किंग जार्ज को एक खुला पत्र लिख कर ब्रिटिश सरकार को धमकी भी दे दी थी कि, अनुसूचित जातियों को अलग चुनाब क्षेत्रों के अधिकार नहीं दिए गए तो पंजाब में ही नहीं सारे भारत में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ हो सकती है। उन्होंने ब्रिटिश सरकार को बता दिया था कि, उन का अछूतों के ऊपर पूरा कंट्रोल है, यदि जरूरत पड़ी तो, उन के साथ पंजाब के सभी आदधर्मी अपने प्राण तक कुर्बान कर सकते हैं। बाबू मंगूराम मुगोवाल जी के लिए, ये मसला सचमुच ही बड़ा पेचीदा था, क्योंकि आदधर्म मंडल इसी राजनीतिक प्रगटाबे के लिए, एक अलग ...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। महात्मा गांधी का मरण व्रत, गुलामों के गुलाम मूलनिवासी जनता को गुलाम बनाने के लिए ही रखा गया मगर उन की आजादी के लिए उस के पास षड़यंत्र के अतिरिक्त कुछ नहीं था, अगर ये कहा जाए कि वह अछूतों के लिए भेड़ की खाल में भेड़िया था तो सही होगा। सीएल चुंबर जी लिखते हैं कि, कुछ इतिहासकारों ने कहा है कि, मिस्टर गांधी के मरण व्रत ने देश को खरतनाक मोड़ पर खड़ा कर के अपनी घबराहट को भी प्रदर्शित किया था। सारे देश को भी भँबल भूसे में डाल दिया था। वह पूर्ण विश्वास से सोचता और विचार किया करता था कि, उस का विचार अछूतों के हितों के लिए सर्वोत्तम है और उस की सोच थी कि, अलग चुनाव क्षेत्र उच्च और नीच जातियों के बीच केवल बिखराब और बंटबारे को ही बढ़ाएगा। गांधी के ही छल कपट से पूना पैक्ट हुआ परन्तु आज हम देख रहे हैं कि, उस की गलत सोच के कारण, उच्च और निम्न सभी जातियों में संघर्ष और तेज हो गया है। वास्तव में, गांधी के विचारानुसार समाज के बंटबारे से भाव था कि, उच्च जातियों अर्थात आर्यों के नीच जातियों अर्थात गुलामों के गुलाम मूल भारतीयों के ऊपर दबदबे को कायम रखना था। माननीय एमसी राजा सहि...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। 😘इतना अन्याय, छलकपट करने वाले महात्मा जी और कांग्रेस पार्टी के सहारे सांसद विधायक और मंत्री बन कर बाबू जगजीवन राम, रामविलास पासवान, ज्ञानी जैल सिंह आदि नेताओं ने भले ही अपने परिवारों का भरण पोषण कर लिया हो गरीब मजलूमों की हड्डियों पर अपनी रोटियों को पक्का कर और सेंक कर खाते रहे मगर ब्राह्मणों के गुलाम अछूतों की कोई परवाह नहीं की थी। जब जगजीवन राम को प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया, तब अंत में उस को ये कहना पड़ा था कि, " इस कम्बख्त मुलख में चमार कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकता है"। पचास साल तक रहे सब से बरिष्ठ ही नहीं अजेय 🤗🤗🤔 बाबू जगजीवन राम को, काँग्रेस पार्टी ने भी कभी लूओप्रधानमंत्री बनने नहीं दिया तो फिर किस मूलनिवासी को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा इस उदाहरण से आज भी वहुजन समाज के नेता सबक नहीं सीख रहे हैं और कांग्रेस भाजपा, कम्युनिष्टों की अर्थी उठा कर जलील होते आए हैं। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मार्च 20, 2021।

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। जब महात्मा गांधी और सभी कांग्रेसी नेता अपने अछूत पिठ्ठुओं के कंधों पर बंदूकें तान कर के, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के आदधर्म मंडल को निशाना बना रहे थे, तब दोनों पक्षों के बीच कुड़तन इतनी बढ़ गई थी कि, जो लड़ाई अंग्रेजों के साथ लड़नी चाहिए थी, वही लड़ाई हिंदुओं और आदधर्मियों को आपस में लड़नी पड़ गई। सन 1930 में जब नमक आंदोलन चल रहा था तब मूलनिवासी आदधर्मियों और नमक आंदोलनकारियों के बीच जालंधर में जबरदस्त झड़पें होने लगी। इण्डियन नैशनल कांग्रेस की पंजाब शाखा महात्मा गांधी के नमक आंदोलन की हिमायत में, विदेशी नमक का बायकाट करने और स्वयं नमक बनाने का निर्णय ले कर ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध संघर्ष शुरू किया हुआ था मगर आंदोलन में अछूतों को ही प्रयोग किया जा रहा था और उन्हीं के अधिकारों पर मनुवादी डाका भी डाल रहे थे। मूलनिवासियों की गुलामी को बनाए रखने के लिए ब्रिटिश सरकार के साथ ही महात्मा गांधी एंड कम्पनी काम करती जा रही थी, जिस के कारण साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और उन के आदधर्मी भी, कांग्रेस के विरोध में मुजाहरे रैलियां और जलूस निकाल रहे थे। एक दिन तो शाम के...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने ब्रिटिश सरकार को कहा था कि, मनुवादी भारतर्ष की मूलनिवासी जनता को आजाद नहीं करेंगे और ना ही मौलिक अधिकार देंगे, इसीलिए जब तक भारत के कमजोर अल्पसख्यकों को, विशेष कर आदि-धर्मी, मुसलमान और आदिवासियों को हर क्षेत्र में पूरा प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता और उन के साथ अच्छे व्यवहार की गारंटी नहीं दी जाती है, तब तक केंद्रीय सरकार के बीच कोई तबदीली ना की जाए। सीएल चुंबर लिखते हैं कि, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने ब्रिटिश सरकार से पुरजोर आग्रह किया था कि, भारत को उस समय तक आजादी नहीं देनी चाहिए, जब तक अछूत आजाद और बराबर नहीं हो जाते अन्यथा ये बरतानबी सरकार के लिए लानत की ही बात होगी। इस तरह आदधर्म मंडल और कांग्रेस के बीच कोई साम्य नहीं था। कांग्रेस की भी अपनी अनुसूचित जाति लहर की सुपरैसड़ क्लासिज फेडरेशन थी, जिस के द्वारा सन 1924 में गांधी और कांग्रेस मूलनिवासियों को छल कपट से अपने विश्वास में लेने के लिए, बेगार, जबरन मजदूरी करने की प्रथा के विरोध में, लाहौर में छदमी जलूस निकलवाया था, बाद में इस के नेताओं ने, इस संस्था का न...

आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। गोलमेज सम्मेलनों में हिन्दू मुस्लिम, सिख ईसाई संगठनों ने मूलनिवासियों को गुलाम बनाए रखने के षडयंत्र जारी रखते हुए, पचासी प्रतिशत मूल निवासी जनसंख्या को अपने साथ सिद्ध करने के लिए गांधी और कांग्रेस ने, कई पापड़ बेले। चमारों को राजपूत सिद्ध करने के लिए इन को सिल वहिये मिंयाँ कह कर पुकारना शुरू कर दिया था, नाईंयों को ठाकुर, घुमहार जाति को प्रजापति आदि नए नए शब्द ईजाद कर के मूर्ख बनाने का प्रयास किया था, इन्हीं नामों को सुन कर, ये लोग भी ब्राह्मणवाद के शिकार हो गए और जनगणना में, अपनी जाति के यही नाम लिखवाते रहे। महात्मा गांधी की छदमी जमात अनपढ़ मूलनिवासियों को धोखेबाजी से गुमराह कर रही थीं। केवल सवर्ण जातियों को स्वतंत्र करवाने के लिए गांधी एंड कम्पनी बैचेन थी। गांधी का लक्ष्य ही मनुवादी लोगों को बरतानवी राज से आजाद करवाना था ना कि, भारत के मूलनिवासियों को, जिस के लिए सामाजिक एकता, समरसता का ढोंग रचना लाजमी था ताकि अंग्रेज सरकार कोई भी, किसी भी किस्म का जातीय आधार पर, भारत का बंटबारा ना कर सकें, इसीलिए अछूतों की उन्नति के छदमी प्रयास शुरू कर दिए। गांधी की व...

आदधर्म मंडल के संघर्ष को कांग्रेस हजम कर गई थी।

।।साहिब कांशीराम जी के जन्मदिन पर समर्पित।। ।।आदधर्म मंडल के संघर्ष को कांग्रेस हजम कर गई थी।। भारत के मूलनिवासियों को लाल रंग का प्रयोग करना भी वर्जित था। लाल रंग के कपड़े पहनने पर मूलनिवासियों को जिंदा जला दिया जाता था। सन 1932 तक ऐसी अनेकोँ दुर्दांत घटनाएं घटी जा चुकी थी। इस राक्षस राज के मनुवादी मनुस्मृतियों के कानूनों ने ना जाने कितनी वहु बेटियों की बलि ले ली थी। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने इस काले काले कानून के विरोध प्रकट करने के लिए अंग्रेजों को यूरेशियन कातिलों के जघन्य अपराधों को बताने के लिए लाल पगड़ीधारियों की पांच पांच हजार वीर योद्धाओं की सेना को तैयार कर किया था, जिस सेना ने, लाहौर की सड़कों पर पास मार्च कर के लार्ड साईमन और लार्ड लोथियन कमीशन का ध्यान आकर्षित कर के मेमोरेंडम दिए थे, ताकि मनुस्मृतियों के काले कानून का सरकार के समक्ष पोस्टमार्टम किया जा सके। यही नही, लाल पगड़ियां पहन कर लाल क्रान्ति को सफल बना कर, ब्राह्मणों के लाल रंग पर जमाए हुए अधिपत्य को भी समाप्त कर दिया था। ब्राह्मणों ने साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल के इस क्रांतिकारी कदम के सामने आत्मसमर्पण तो कर...

आदधर्म मंडल के मेमोरेंडम 1932 में रंग लाए।

।।आदधर्म मंडल के मेमोरेंडम 1932 में रंग लाए।। भारतवर्ष में गुलामों के गुलाम शूद्रों की आवाज बन कर उभरा आदधर्म मंडल ही ब्रिटिश सरकार को संतुष्ट कर सका था कि, केवल ब्राह्मणों ने ही मूल भारतीयों को जानबरों की जिंदगी जीने के लिए विवश कर रखा है। जब पहली बार लार्ड साईमन के नेतृत्व में आया शाही कमीशन भारत आया था, तब केवल पंजाब आदधर्म मंडल द्वारा उठाई गई, मांगों का जायजा लेने के लिए कमीशन लाहौर उतरा था, तब गांधी और उस के परपंचियों ने, उस का काले झंडों से बहिष्कार कर के सत्य से दूर रखने के लिए, जगह जगह सामूहिक लंगर, सामूहिक मन्दिरों में प्रवेश कर के पूजापाठ, सामूहिक कुओं से पानी भरने का झूठा नाटक रच कर, साईमन को गुमराह किया था, जिस का सच आदधर्म मंडल और उन के वकील डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने महाड़ तालाब पर भांडा फोड़ किया था, जब वे गंदगी से भरे तालाब के किनारे साईमन को घुमा रहे थे और गांधी के फरेब की पोल खोलने के लिए, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने सफेद कुत्ते को तालाब में धकेल कर उसे पानी में तैरने के लिए छोड़ दिया था और बाद में अछूतों को पानी पीने के लिए संकेत किया था, जैसे ही अछूत पानी पीने लगे वैसे ही स...

साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और पहला गोलमेज सम्मेलन।।

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और पहला गोलमेज सम्मेलन।। भारतवर्ष के मूलनिवासी गुलामों की गुलामी के संहारक साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने गांधी एंड कंपनी के कपटी स्वराज आंदोलन को ग्रहण लगा दिया था। उन के आदधर्म मंडल ने, सारे ब्रिटिश साम्राज्य को हिला कर रख दिया था। जहां गांधी एंड कंपनी ब्राह्मणवाद को पुनः जिंदा करने की विसात बिछा रही थी, वहीं पर साहिबे कलाम मंगू राम और स्वामी अच्छूतानंद जी महाराज, दिन रात उन के पर करतरते जा रहे थे।  अपने ज्ञापनों के द्वारा गुलामों के गुलाम मूलनिवासियों की गुलामी की सच्ची कथाएँ ब्रिटिश सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर के, ढोंगी महात्मा की काली करतूतें जगजाहिर कर के रख रहे थे, जिस के परिणाम स्वरूप जॉर्ज पंचम को 12 नबंबर 1930 को पहला गोलमेज सम्मेलन बुलाना पड़ा था, जिस की अध्यक्षता इंग्लैंड के प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडॉनल्ड ने की थी। ब्रिटिश सरकार का प्रतिनिधित्व सोलह प्रतिनिधियों द्वारा किया गया था। अंग्रेजों द्वारा शासित 57 राजनीतिक दलों और भारत की रियासतों के सोलह प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के चमत्कार के कारण इंडियन कांग्रेस...

साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल का ब्रिटिश सरकार पर प्रभाव।

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल का ब्रिटिश सरकार पर प्रभाव।। जब कभी भी शारीरिक और मानसिक यातनाएँ आदमी को झेलनी पड़ती हैं, तब अत्याचारियों के खिलाफ, पीड़ित की आत्मा विद्रोह कर देती है और उसी व्यवस्था को बदलने के लिए, संघर्ष करना शुरू कर देती है, जब साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी को, ब्राह्मण अध्यापक पोहलो राम ने बड़ी नृशंसता से पाशविक पिटाई की थी, तभी साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी की आत्मा ने, खूंखार भेड़ियों को सबक सिखाने की बात मन में ठान ली थी। इसी कारण वे अमेरिका जा कर गद्दर पार्टी में शामिल हो गए थे। यहीं पर वे गद्दरपार्टी के लाला हरदयाल और रास विहारी बोस के विचारों की भठ्ठी में तप कर, कुंदन बन कर, अछूतों के कल्याण के लिए ब्राह्मणवाद के खिलाफ जंगे मैदान में उतर आए थे, जिन्हें वहुत कम लोगों ने, समझा, पहचाना और उन के पथ का अनुशरण किया, कुछ स्वार्थी तो भटक कर, मनुवादी दलाल बन गए थे और उन के आदधर्म मंडल को ही मिट्टी में मिला गए। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने, लार्ड साईमन को मेमोरेंडम देने की जो बिसात विछाई थी, उस का ही अनुशरण स्वामी अच्छूतानंद जी महाराज कानपुर जी ने किया था। वे भी स...

साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और कम्यूनल अबार्ड।

।।साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल और कम्युनल अबार्ड।। साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल ने, साईमन कमीशन के समक्ष जो प्रदर्शन किया था, उस के बड़े सकारात्मक और अत्यंत चकित करने वाले परिणाम निकले। गांधी, नेहरू और पटेल एंड कंपनी को इन परिणामों की तनिक भी आशा नहीं थी। आदधर्म मंडल ने साफ साफ कहा था कि, हम ना तो हिन्दू हैं, ना ही सिख, मुस्लिम हैं। हम इस भारतवर्ष के आदि बाशिंदे, मूलनिवासी हैं, हिंदुओं ने ये साबित करने का प्रयास किया था कि ये हमारे रीति रिवाजों को अपनाए हुए हैं, मुस्लिमों ने कहा कि ये लोग मुसलमानों की तरह मुर्दों को दफनाते हैं, सिखों ने कहा था कि ये सब लोग सिखों की तरह बाल रखते हैं, गुरुदुआरों में पूजा अर्चना करते हैं, इसीलिए ये सिख हैं। हिन्दू मुस्लिम, सिख अपनी अपनी जनसंख्या बढ़ाने के लिए ही ऐसे कुतर्कपूर्ण वक्तव्य देते जा रहे थे मगर साहिबे कलाम की खण्डे की धार सभी के कुतर्कों को काटे जा रही थी। उन्होंने कहा था, कि सर! हम ना तो वेदों को मानते हैं, ना ही मुर्दों को दफनाते हैं, ना ही बाल रखते हैं, केवल जहाँ जहाँ हिंदुओं की आबादी अधिक है, वहां ये लोग हमारे लोगों को डरा धमका कर अपने कुटिल रीत...

साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और आदधर्म मंडल का पंजीकरण।।

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और आदधर्म का पंजीकरण।।। आज हम मूलनिवासी अगर ब्राह्मणों के गुलाम हैं तो केवल अपने गद्दार धार्मिक और राजनेताओं की स्वार्थपूर्ण राजनीति के कारण ही हैं। सन 1926 से आदधर्म मंडल, जान हथेली पर रख कर अछूत आदवंशी, आदिवासी, मूलनिवासी जनता के लिए लड़ रहा था, लेकिन उन के किये पर पानी अपने ही मूलनिवासी स्वार्थी फेरते जा रहे थे। साभा राम निवासी लायलपुर, नारे लगाते हुए, लार्ड साईमन को, गुलाम मूलनिवासियों की कातर आवाज सुना रहे थे, क्रांतिकारी आदधर्म मंडल ने, सन 1928 में साईमन कमीशन को अपना मेमोरेंडम देते हुए, कहा था कि हम ना तो हिन्दू हैं, ना ही मुस्लिम, सिख और ईसाई ही हैं। केवल हम ही भारतवर्ष के मूलनिवासी नागरिक हैं, हमें मनुवादियों ने गुलाम बना कर रखा हुआ है, इसीलिए हमें इन से अलग विशेष अधिकार दिए जाएं। हमारी जनसंख्या के अनुपात में, हमें सभी क्षेत्रों में आरक्षण दिए जाएं, ताकि हमारा मूलनिवासी समाज भी सुख, चैन और आजादी से जिंदगी जी सके। हमें सेना में भी भर्ती किया जाए, सरकारी नौकरियां दीं जाएं। हमारे वच्चों को पढ़ने के लिए विद्यालयों में प्रवेश अनिवार्य किया जाए, उन की सा...

आदधर्म मंडल का दुश्मन एम सी राजा।।

।।आदधर्म मंडल का दुश्मन एम सी राजा।। पांच हजार सालों से, भारत के मूलनिवासी अगर नारकीय जिंदगी जी रहे हैं तो केवल मूलनिवासी राजनेताओं की फूट और विखंडन से ही जी रहे हैं। शिवशंकर, दानवीर बलि, राजा महिसासुर, एम सी राजा आदि अगर यूरेशियन लुटेरों को पहचान लेते और तत्काल उन का मिल कर के बहिष्कार करते, तो कोई भी यूरेशियन, भारतर्ष के मूलनिवासियों को गुलाम नहीं बना सकता था। यही कृतघ्नता आज भी जारी हैं, भारत में साहिब कांशीराम जी, मान्यवर वामन मेश्राम जी बी एल मातंग जी प्रोफेसर खैरात आदि राष्ट्रवादी नेता, मूलनिवासी समाज की आजादी की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं और मूलनिवासियों के अपने ही गद्दार, मनुवादी कांग्रेस, भाजपा के कार्यकर्ता बन कर, मूलनिवासी राष्ट्रवादियों के किये जा रहे संघर्ष को मिट्टी में मिलाने का कार्य करते जा रहे हैं, ये स्वार्थी अपना उल्लू सीधा कर के अछूतों के अधिकारों को बेच कर खाते आ रहे हैं, ऐसा ही तामिलनाडु के एम सी राजा ने, सन 1928 में अछूतों के साथ किया था। एम सी राजा कौन था? :--- एम सी राजा का पूरा नाम राव बहादुर मिलै चिन्ना थंपी पिल्लई राजा था। इन का जन्म 17 जून सन1883 को मद्रास तामिलन...

साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल के सिपाह सलार "हजारा राम"

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल के सिपाह सालार "हजारा राम"। पंजाब की पवित्र धरती धन्य है कि जहां, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल, बीडीओ हजारा राम, साहिब कांशीराम जैसे महापुरुष वहुजन समाज के कल्याणार्थ अवतरित हुए हैं। होशियारपुर शहर के साथ लगते गाँव पिपलांवाला में बी डी ओ हजारा राम का जन्म हुआ था। उन के पिता जी ने, परतंत्रता में भी उन्हें मैट्रिक पास करवाई थी। वे हजारा राम पिपलांवाला के नाम से जाने जाते थे और सरकारी नौकरी करते हुए भी वे समाज सुधार के काम में लगे रहते थे। उन्हीं दिनों गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के रचयिता स्वामी ईशरदास जी महाराज भी, होशियारपुर जिले के समीप गाँव नंदगढ़ महिलांवाली में आ कर, रहने लगे थे, जिन के सत्संग की धूमें विश्व में फैलती जा रही थीं। होशियारपुर के चारों ओर से लोग उन्हें सत्संग करवाने के लिए, पालकी में बैठा कर ले जाते थे। हजारा राम जी भी उन दिनों, होशियारपुर में ही बीडीओ के पद पर तैनात थे। वे स्वामी जी के सत्संग से प्रभावित हो गए थे। वे उन के पास नंद गढ़ महिलां वाली अवश्य आते थे और सत्संग सुनते थे। जब साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने, स्वामी जी को आदधर्...

साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और उन के साथी लायलपुर के "साभा राम"।

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और लायलपुर के "साभा राम जी"।। जिस दिन मुगोवाल के जाट ने, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के परिवार की स्त्रियों का काटा हुआ घास जबरन छीन कर, अपने घर ले गया था, तब से ही वे घर पर आराम से नहीं बैठ रहे थे। उन्होंने ना केवल अपने ही घर की बहू, बेटियों, स्त्रियों के अपमान का बदला लेने के लिए आंदोलन शुरू नहीं किया था, अपितु सभी आदवंशी, आदिवासी, मूलनिवासी समाज की स्त्रियों के मान सम्मान और उन की आजादी के लिए, घर बार त्याग कर निकल पड़े थे। एक दिन जब वे, वर्तमान पाकिस्तान के लायलपुर पहुँचे तो किसी ने, उन्हें लायलपुर के एक रईस साभा राम जी के घर पहुँचा दिया था। साभा राम जी का परिचय।। साभा राम जी, वर्तमान पाकिस्तान के प्रसिद्ध, ऐतिहासिक शहर लायलपुर के निवासी थे। वे अत्यंत धार्मिक व्यक्ति थे। गुरु रविदास जी के अनन्य अनुचर, अनुयायी और भगत थे। गुरु रविदास जी की कृपा से उन के घर में, धार्मिक वृति वाले बालक ताभा राम का जन्म हुआ था। उन की अर्धांगनी का नाम जीवी संधू था, वे भी अत्यंत धार्मिक वृति वाले दंपति थे। उन्हें भी गुर रविदास महाराज की कृपा से माधो राम नामक आदर...

साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल के साथी लंबरदार भगत राम।।

।। साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल के साथी लंबरदार "भगत राम जी"।। अगर ये कहा जाए कि, 1800 के बाद का युग, आदपुरुष की दिव्य शक्तियों का युग था तो कोई भी अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसी स्वर्ण काल में, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल, खूनी क्रान्ति के महानायक बिरसा मुंडा, झलकारीबाई ज्योतिबाफूले, सावित्रीबाई फुले, लंबरदार भगत राम, ठैनू राम, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के रचयिता स्वामी ईशर दास जी महाराज आदि महापुरुषों का जन्म हुआ था, जिन्होंने अंग्रेजों और यूरेशियन की गुलामी के खिलाफ, मूलनिवासी समाज को क्रान्ति अग्नि पथ पर चलने के लिए तैयार किया था। उन की गुलामी से मूल भारतीयों को आजाद करवाने के लिए, अपनी जान हथेली पर रख कर, अंग्रेजों और भारत मूल के काले अंग्रेजों के साथ, संघर्ष किया था, ब्राह्मणों ने अंग्रेजों के साथ मिल कर, सन 1911 के अराजी एक्ट के द्वारा, भारत के मूलनिवासियों को बन्धुआ मजदूर बनाया हुआ था। साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल जी ने, इसी गुलामी के कानून को, लार्ड लोथियन को निरस्त करने के लिए विवश कर दिया था। स्वतंत्रता सेनानी साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने...

साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल को आस्था"गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ"

।।साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल जी की आस्था "गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ"।। स्वामी ईशरदास, कभी विद्यालय में पढ़ने नहीं गए। एक तो छुआछूत का जोर था दूसरा माता, खेमों का साया बचपन उठ गया था। सोलह वर्ष की आयु में, वे घरबार छोड़ कर, हिमाचल प्रदेश की पवित्र धरती की ओर चले गए थे। यह कहा जाता है कि वे पंजाबी लिपि के वर्णों को, उंगली से धरती पर लिखते और पंजाबी भाषा सीखने का अभ्यास किया करते थे। बस यही उन की शिक्षा थी। इसी शिक्षा के कारण वे, अमूल्य गुरु रविदास जी महाराज की वाणी रचने लग पड़े थे। सोलह वर्ष की आयु में ही वे अपनी रचित अनुपम वाणी का सत्संग सँगत को देने लग गए थे।हिमाचल प्रदेश के ऊना शहर के समीप एक गाँव अर्नियाला है, वहां के सन्त रनियां राम के घर पर वे वाणी भी रचते थे और गाँव वासियों को शब्द कीर्तन से भी मोहित भी करते थे, इसी कारण वे देश विदेश में चर्चा के विषय बन गए थे। स्वामी जी की बढ़ती लोकप्रियता के कारण साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल भी उन की ओर आकर्षित हुए थे। सभी उन की शिक्षा और ज्ञान से आश्चर्यचकित थे। स्वामी जी की प्रत्युन्नमती बुद्धि को देख कर ही, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल ने,...

साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ही देन है, गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ।

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी की ही देन है गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ।। भारत के मूलनिवासी चार पांच हजार वर्षों से, गुलामों की जिंदगी जीते आ रहे थे, यूरेशियन लूटेरे बंधुआ मजदूरों की तरह, शोषण करते आ रहे थे, मौलिक अधिकारों से भी वंचित किया हुआ था। आदपुरुष का सिंहासन हिल चुका था, इसी कारण उस ने, पहले मुस्लिमों को भारत के शोषकों की तवाही के लिए भेजा था, फिर न्याय दिलाने के लिए अंग्रेजों को भारत की धरती पर भेज कर, मूलभारतीयों को मौलिक अधिकारों की व्यवस्था करवाई थी। मन्दिरों में अमानवीय देवदासी प्रथा के कारण हरिजन जन्म ले रहे थे, वहु, बेटियों को चुरा कर, मन्दिरों में हैवानियत का खेल खेला जाता था, जिस से परमेश्वर का तख्ता हिल गया था, जिस के कारण सोमनाथ मंदिर की एक देवदासी बालिका ने, मसलमान शासक महमूद गजनी को पत्र लिख कर, हैवानों से, देवदासियों को मुक्त कराने की गुहार लगाई थी, जिस मार्मिक पत्र को पढ़ कर ही गजनी ने, सत्रह बार आक्रमण किये। सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर के, देवदासियों की सहायता की थी, मगर मिथ्या इतिहास लिखने वालों ने, इस सत्य को छुपा कर, भारतवासियों को अंधेरे में रखा हुआ है। ये सत्य मु...