आदधर्म मंडल और1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। डॉक्टर मार्क जरगन जमायर जी अपनी पुस्तक के बीच लिखते हैं कि, यह अजीव दिखाई दे सकता है कि, जनगणना को इतनी ऊर्जा और संवेग के लिए निकास का उद्देश्य बन जाना चाहिये है परन्तु इस का महत्व वहुत ही असली और वास्तविक था। इस के कारण जनगणना आंकड़ों के बीच अपने आप तलाशे जा सकते हैं चाहे पंजाब में धार्मिक भाईचारे की संख्या की शक्ति इलाके के अनुसार बदलती रहती है, परंतु मध्य पंजाब के बीच जहां आदधर्म अपना सब से अधिक प्रभाव रखता है, यहां हिदुओं सिखों और मुसलमानों की गिनती लगभग एक जैसी ही थी। ये संतुलन व्यास नदी से ले कर सतलुज नदी के बीच पड़ते दोआबे के जालंधर और होशियारपुर दोनों जिलों के बीच खास कर के और भी निकट था। इस इलाके की एक और भी खास विशेषता थी कि, जिस प्रकार जनगणना प्रकट करती है। यहां अछूतों के आम लोगों की अपेक्षा उन सब के मकान अधिक थे, जहां इन की आबादी, कुल जनंसख्या का 23 प्रतिशत था, यदि किसी कारण अछूतों को उन की जनगणना श्रेणी में से निकाल दिए गए थे, जिन के बीच उन के विधि अनुसार नाम दर्ज थे, जिस प्रकार सिख, हिन्दू और मुसलमान थे, यदि ये इकठ्ठे एक अलग ग्रुप के बीच गिने गए थे, तब भी अछूतों की गिनती हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों और मुसलमानों की अधिक भाईचारे की जत्थेबंदियों के बिलकुल बराबर थी, या हो सकती थी। जब कोई मन में सोचता है कि, वैधानिक सीटें ब्रिटिश सरकार द्वारा फिरकू प्रतिनिधित्व अनुसार बांटी गईँ थीं, तो वे नंबर जिन का हरेक वर्ग ने दावा किया था, राजनीतिक शक्ति के बीच बदले जा सकते हैं। डॉक्टर मार्क लिखते हैं कि, उस के अर्थ के बीच असली चुनाव हुए थे। किसी भी ऐरे गैरे व्यक्ति के लिए वोट डॉल कर नहीं, बल्कि उम्मीदबारों का बंटबारा कर के जो जनसंख्या नतीजों के आधार पर निर्धारित किये गए थे, यदि निम्न जातियों को उन के पुराने स्थानों के जनसंख्या रजिस्टर में से हटा दिया गया था और नई श्रेणी द्वारा गठित किये गए थे---जिससे सबसे अधिक नुकसान उठाने वाले केवल हिन्दू होंगे। जब कि जनगणना करते समय जनगणना करने वाले को उस श्रेणी का प्रयोग करने के लिए सिखाया ही नहीं गया था। यदि उन अछूतों के उत्तर वाले जबाबदेह (रेस्पोंडेंटस) धार्मिक संबन्धता के मामले में अनिश्चित या संदेहास्पद थे। कोड अनुसार पढ़ा गया:---सारे चूहड़े, जो मुसलमान या क्रिश्चियन नहीं हैं और जो किसी अन्य धर्म के बीच भी वापस नहीं आये हैं, को हिंदुओं के बीच वापस किया जाना चाहिए है। दूसरी दबियाँ कुचलियाँ जमातों के बारे में भी यही नियम लागू होता है, जिन का अपने कबीले का कोई धर्म नहीं है। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मार्च 30, 2021।

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