आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। विदेशी अंग्रेजों के गुलामों के गुलाम आदवंशी आदिवासी और मूलनिवासी गुलामी की दोहरी चक्की तले पीसे जा रहे थे, जिन की आजादी के लिए कोई भी माई का लाल अपनी जुवान तक नहीं खोल रहा था। ओबीसी अर्थात पिछड़ी जातियों को नाई ठाकुर और राजा, कुम्हारों को ब्रह्मा के बराबर प्रजापति, चमार जाति को सिल वहिये मिंयें, घिरत, बाहती, चाहंग और जाट को चौधरी, सुनार को सोनी आदि घोषित कर के मूलनिवासियों के अक्ल के अंधे  नेताओं को उल्लू बना कर, कांग्रेस के नेताओं ने अपने साथ मिला कर रखा हुआ था, वे आदधर्म मंडल के विरोध में कांग्रेस का साथ देते आ रहे थे। वे चन्द सिक्कों के लिए, केवल कांग्रेस के ही नहीं सभी मनुवादियों के दुमछुल्ले बने हुए थे, जो आदधर्म मंडल मूलनिवासियों की गुलामी की जंजीरों को काटने की विसात विछाते थे, उस को इन्हीं अंध भक्तों के द्वारा कांग्रेस कटवाती जाती थी। आदधर्म के परवाने स्वामी ईशरदास महाराज, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवालिया जी, सेठ सुंदर दास घनेहिया लाल हकीम जी, सेठ लभु राम , लच्छू मल साह, ठाकुर चन्द जी, गुरबन्ता सिंह, शूद्रानंद, बीडीओ हजारा राम, हंस राज, पंडित हरि राम आदि नेता 26/27 जुलाई सन 1929 को सम्पन्न हुई, आदधर्म मंडल की कांफ्रेंस के बाद जनगणना की तैयारियों में जुट गए थे। इन नेताओं ने, दिन रात एक कर के सारे पंजाब प्रांत में अलख जगा कर अपने ग्रामीण आदधर्मियों के साथ जनगणना में, अपना धर्म, आदधर्म लिखवाने का जोरदार प्रचार प्रसार शुरू कर  दिया था, जिस के परिणाम चौंकाने वाले आए थे, जिन का उल्लेख किसी भी मनुवादी अखबार, पत्रकार, मीडिया और लेखक ने नहीं किया था। केवल विदेशी स्कालरों, पत्रकारों और लेखकों ने ही, आदधर्म मंडल के  क्रांतिकारी अध्यक्ष बाबू मंगूराम मुगोवालिया और उन के योग्य आदधर्मी साथियों के आंदोलन को अपनी कलम का विषय बनाया था। आदधर्म मंडल आंदोलन का इतिहास प्रसिद्ध स्कॉलर डॉक्टर मार्क जरगन जमाइर पीएचडी ने लिख कर के कुछ सबूतों का वर्णन अपनी पुस्तक में किया है। सन 1931 की जनगणना के बारे में, डॉक्टर मार्क जी लिखते हैं कि, आदधर्म आंदोलन का आवेग सन 1931 की मर्दम सुमारी की ओर उसर (विकसित) हो रहा था, जो आदधर्म की स्थापना के बाद, पहली बार हो रही थी। इस जनगणना के अच्छे प्रदर्शन ने आदधर्म की वैधता और मौलिकता को स्थापित कर दिया था, जिस ने मूलनिवासी जनता के बीच भी आदधर्म के नेताओं और अनुयायियों की शक्ति को भी प्रमाणित कर दिया था, परन्तु जनगणना से भी बढ़ कर आदधर्म के प्रति आकर्षण की व्याख्या के बीच इस आंदोलन के लिए चमत्कारी, प्रसिद्ध सृजनात्मक और ऐतिहासिक घटना भी थी। डॉक्टर मार्क जी अपनी पुस्तक में लिखते हैं कि, महात्मा गांधी के सब से बड़े सत्याग्रह की तरह ईस्बी सन 1931 की जनगणना आदधर्म द्वारा हमेशा याद रखी जाएगी। उस आंदोलन के सारे कार्य और विचार अर्थपूर्ण हैं। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मार्च 29, 2021।

Comments

Popular posts from this blog

गुरु रविदास जी की क्रांतिकारी वाणी दोधारी है।

क्रांतिकारी शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज।।

।।राम बिन संशय गाँठि न छूटे।।