साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और उन के साथी लायलपुर के "साभा राम"।

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और लायलपुर के "साभा राम जी"।। जिस दिन मुगोवाल के जाट ने, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के परिवार की स्त्रियों का काटा हुआ घास जबरन छीन कर, अपने घर ले गया था, तब से ही वे घर पर आराम से नहीं बैठ रहे थे। उन्होंने ना केवल अपने ही घर की बहू, बेटियों, स्त्रियों के अपमान का बदला लेने के लिए आंदोलन शुरू नहीं किया था, अपितु सभी आदवंशी, आदिवासी, मूलनिवासी समाज की स्त्रियों के मान सम्मान और उन की आजादी के लिए, घर बार त्याग कर निकल पड़े थे। एक दिन जब वे, वर्तमान पाकिस्तान के लायलपुर पहुँचे तो किसी ने, उन्हें लायलपुर के एक रईस साभा राम जी के घर पहुँचा दिया था। साभा राम जी का परिचय।। साभा राम जी, वर्तमान पाकिस्तान के प्रसिद्ध, ऐतिहासिक शहर लायलपुर के निवासी थे। वे अत्यंत धार्मिक व्यक्ति थे। गुरु रविदास जी के अनन्य अनुचर, अनुयायी और भगत थे। गुरु रविदास जी की कृपा से उन के घर में, धार्मिक वृति वाले बालक ताभा राम का जन्म हुआ था। उन की अर्धांगनी का नाम जीवी संधू था, वे भी अत्यंत धार्मिक वृति वाले दंपति थे। उन्हें भी गुर रविदास महाराज की कृपा से माधो राम नामक आदर्श बालक की दात मिली हुई थी। इन के घर पर ही मन्दिरों वाला शांत माहौल था। घर में सभी सतगुरु रविदास जी महाराज की वाणी का सत्संग किया करते थे। यही कारण था कि, उन के घर पर भी धन दौलत की कोई कमी नहीं थी। साभा राम व्यापारी थे:---लायलपुर के निवासी साभा राम जी कपड़े के बड़े व्यापारी थे। उन का बेजोड़ कपड़ा लायलपुर के चारों ओर भेज कर सप्लाई किया जाता था। वे कपड़े के साथ साथ चमड़े के भी वहुत बड़े व्यापारी थे, उन के कारखानों में तैयार चमड़ा भी पंजाब और दिल्ली तक सप्लाई किया जाता था। उन के कारीगर भी अनेक प्रकार का बहुमूल्य प्रॉडक्ट तैयार कर के दुकानदारों को सप्लाई किया करते थे, जिससे वे संपन्नता का जीवन व्यतीत करते थे। साभा राम आदधर्म मंडल में:---साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने, साभा राम के घर पहुँच कर उन के साथ आदधर्म के लक्ष्यों के बारे में विस्तार से बातचीत की, जिस से आकर्षित हो कर वे भी अपने परिवार सहित पंजाब आदधर्म मंडल में शामिल हो गए थे। लायलपुर का नेतृत्व ही, उन के पास दे दिया गया था। उन के पुत्र ताभा राम जी ने भी साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के साथ कंधे से कंधा मिला कर, मूलनिवासी समाज को दोहरी गुलामी से मुक्त कराने के लिए, अपना जीवन अर्पित कर दिया था। जब 1928 में, साईमन कमीशन भारत आया, तब साभा राम जी ने ही, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के 5000 मूलनिवासी आंदोलनकारियों का नेतृत्व किया था, जिस में मुख्य रूप से, चौधरी लभु राम सूची, चौधरी सुंदर दास धनाल, भगत गुलाबा मल मुसाहपुर मुकेरियां, महात्मा गणेश दास हरिपुर, चौधरी गेंदा राम गांव धनी, चौधरी ईशरदास जी गाँव सोखी, चौधरी पूर्ण चन्द सन्धबा फराला, चौधरी माघी राम नारोट, चौधरी भुल्ला राम गांव व्यास, चौधरी उत्तम चन्द गाँव व्यास, चौधरी दियाला राम आदमपुर, चौधरी लाहिया राम लंगेरी माहल पुर, चौधरी गाहिया राम चक नंबर 14 चीचा वचनी, चौधरी रल्ला राम चक नंबर 16 चीचा वतनी, चौधरी बाबू राम चक नंबर 88 चीचा वतनी, चौधरी गुरदित्ता राम रसियाणा समुंदरी, चौधरी पूरन चन्द जी और सुंदर दास डिचकोट, चौधरी बजीरा राम निवासी मियां चँनू, चौधरी ईशरदास तरखान माजरा, मास्टर लाल चन्द वाल्मीकि कादरवाला, मनी राम वाल्मीकि बाघा पुराना फिरोजपुर, चौधरी श्यामा राम हैसोआल, हरदित्ता मल जी तपा खेड़ा फिरोजपुर, चौधरी किरपा सिंह शंकर दास गाँव डमैना और भगत राम जी गाँव किदरियाणां, चौधरी खड़कू राम जमादार सुजानपुर, घुंगर मल, जुल्फी राम वर्तमान जिला हमीरपुर, चौधरी बूटा राम, शेरा राम गाँव गूड़ा गुरदासपुर, चौधरी किरपा सिंह और चौधरी सुंदर सिंह निआडी कांगड़ा हिमाचल प्रदेश आदि जाने माने, समाजसेवक अपने अन्य सभी साथियों सहित, आदधर्म मंडल की ओर से, विशेष रेल द्वारा आठ बजे लाहौर में, साईमन कमीशन के सामने पेश हुए थे। जब, लाहौर में आंदोलनकारी ऊंचे ऊंचे स्वरों में, साभा राम जी नारे लगवा रहे थे, गुरु रविदास शक्ति अमर है, अमर है, तब उन की आवाज सुनकर, साईमन ने, आदधर्म मंडल के नौ सदस्यों को, सम्मेलन में बुलाया था, जिन में से एक थे "साभा राम जी"। साभा राम जी के बारे में जब पंजाब के प्रसिद्ध साहित्यकार सी एल चुंबर जी को उन की कार्य प्रणाली और अछूतों की आजादी के लिए लड़ी गई लड़ाइयों का पता चला था, तो वे भी बड़े हैरान हुए थे। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मार्च 05, 2021।

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