आदधर्म मंडल के संघर्ष को कांग्रेस हजम कर गई थी।
।।साहिब कांशीराम जी के जन्मदिन पर समर्पित।।
।।आदधर्म मंडल के संघर्ष को कांग्रेस हजम कर गई थी।।
भारत के मूलनिवासियों को लाल रंग का प्रयोग करना भी वर्जित था। लाल रंग के कपड़े पहनने पर मूलनिवासियों को जिंदा जला दिया जाता था। सन 1932 तक ऐसी अनेकोँ दुर्दांत घटनाएं घटी जा चुकी थी। इस राक्षस राज के मनुवादी मनुस्मृतियों के कानूनों ने ना जाने कितनी वहु बेटियों की बलि ले ली थी। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने इस काले काले कानून के विरोध प्रकट करने के लिए अंग्रेजों को यूरेशियन कातिलों के जघन्य अपराधों को बताने के लिए लाल पगड़ीधारियों की पांच पांच हजार वीर योद्धाओं की सेना को तैयार कर किया था, जिस सेना ने, लाहौर की सड़कों पर पास मार्च कर के लार्ड साईमन और लार्ड लोथियन कमीशन का ध्यान आकर्षित कर के मेमोरेंडम दिए थे, ताकि मनुस्मृतियों के काले कानून का सरकार के समक्ष पोस्टमार्टम किया जा सके। यही नही, लाल पगड़ियां पहन कर लाल क्रान्ति को सफल बना कर, ब्राह्मणों के लाल रंग पर जमाए हुए अधिपत्य को भी समाप्त कर दिया था। ब्राह्मणों ने साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल के इस क्रांतिकारी कदम के सामने आत्मसमर्पण तो कर दिया, अपनी जुवान बन्द तो कर ही ली मगर मनुवादियों को भड़का कर अंदर ही अंदर से ये कहावत मानसपटल पर बैठा दी कि लाल रंग चमारों का रंग है, जिस के कारण मनुवादियों ने लाल रंग का प्रयोग कम दिया है। आज जब भी कोई लाल रंग के कपड़े पहने तो यही कहा जाता हैं कि ये कोई चमार ही है।
आदधर्म मंडल के वीर सिपाही इसी लाल रंग से रँगी हुई पगड़ियां पहन कर, लाहौर की सड़कों पर गुरु रविदास शक्ति अमर है, अमर है कि नारे लगाते हुए आसमान को गुंजा देते थे, जिन से भयभीत हो कर अंग्रेज साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी को वार्ताओं में शामिल कर लेते थे और वे अपनी मांगों को मनवा लिया करते थे, यहीं आदधर्म मंडल के संघर्षों की जीत थी, इन्हीं संघर्षों से मिला था दो वोट का अधिकार। उन्हीं संघषों की जीत हो रही थी कि मुसलमानों को पाकिस्तान और अछूतों को आदिस्तान मिलने वाला था। सन 1937 में आदधर्म मंडल ने आरक्षण लागू करबा कर तहलका मचा दिया था। पंजाब में आदधर्म मंडल के नौ विधायकों की जीत के कारण गांधी एंड कंपनी भयभीत हो गई थी, इसी कारण गांधी ने अंग्रेजों को कहा कि, हमे दस सालों तक स्वतंत्रता नहीं चाहिए। दस वर्षों में कांग्रेस ने आदधर्म मंडल के स्वार्थी नेताओं को खरीद फरोख्त कर कर कांग्रेस में शामिल कर लिया, नङ्गे भूखे आदधर्म के गद्दारों ने साहिबे कलाम मंगू राम को अकेला अलग थलग कर दिया और आदधर्म मंडल को भी गुरु रविदास मंदिर चकहक़ीम पंजाब में सम्मेलन बुला कर भंगवा करवा दिया। उधर चमार शक्ति को खत्म करने के लिए, गुरु रविदास शक्ति की एकता को खत्म करने के लिए, गुरु रविदास मंदिर पंजाब के चकहक़ीम के सामने ही एक और नया गुरु रविदास मंदिर बना कर कांग्रेस ने, सोहम शव्द को ग्रहण लगाने के लिए हरि निशान का झंडा चढ़वाया और गुरु रविदास एकता को भंग करवा दिया, जिस सत्य को चमार जाति समझ नहीं सकी और आज ये लोग सोहम और हरि निशान के लिये कोर्ट कचैहरियों में झगड़ते आ रहे है। यही नहीं आज पुनः जब आदधर्म देश विदेश में पनपने लगा तो कुछ स्वार्थी साधु संतों को मनुवादियों ने, अपने शिकंजे में ले कर आदधर्म को मिटाने के लिए गुरु रविदास ही नहीं आदि गुरुओं की एकता को खत्म करने के लिए गुरु रविदास जी महाराज के अनुयायियों का एक और नया धर्म तैयार कर दिया।
आदधर्म से हिन्दू धर्म को खतरा ये है कि कहीं पुनः आदधर्म होंद में आ गया तो सभी ब्राह्मण भी आदधर्म में शामिल हो जाएंगे क्योंकि 1931 की जनगणना में, हिंदुओं के साथ की मुलसमान भी आदधर्म में शामिल हो गए थे। आदधर्म ही विश्व में ऐसा धर्म है जिस के उसूल मानवतावादी हैं, जिस में कोई सतिप्रथा नहीं है, कोई विधवा रखने की प्रथा नहीं है, कोई जातिवादी प्रथा नही है, कोई ऊँच नीच नहीं है, तभी तो गुरु रविदास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि:--
आद से प्रगट भयो जा को ना कोऊ अंत।
आदधर्म रविदास का जाने कोऊ बिरला सन्त।
भले ही आज धन बल से मनुवादियों के द्वारा आदधर्म आंदोलन को दबाया जा रहा है, भले आदधर्म के गद्दार चमार शक्ति को टुकड़े टुकड़े करते जा रहे हैं, मगर जिस कांग्रेस पार्टी ने आदधर्म को खत्म करवाया था, उसी को भष्म करने के लिए साहिब कांशीराम भारत में जन्में थे, अब फिर नए साहिब कांशीराम जन्म ले कर मनुवाद को ही खत्म करने आएंगे।
साहिब कांशीराम जी को नमन।
सोहम जय गुरुदेव।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
मार्च 15,2021।
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