आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी के विचार, डॉक्टर मार्क जर्गन जमायर के हैं, डॉक्टर मार्क यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बरकले यू एस ए में विजिटिंग एसोसिएशन एसोसिएट प्रोफेसर आफ रिलिजियस स्टडीज़ (धार्मिक अध्ययन) और एसोसिएट प्रोफेसर आफ एथिक्स एंड दी फिनामिनालोजी आफ रिलीज़न, ग्रेजुएट बायलोजिकल यूनियन थे। हस्तलिखित लेख बाबू मुगोवालिया बनाम महात्मा गांधी, उन की पुस्तक Religion vr social vision से Mangu Ram Vr Gandhi लेख का मुख्य अंश है। ये पुस्तक भारत में Religion Rebels in Punjab टाईटल के अधीन छापी गई है, जिस में उन्होंने बाबू मंगू राम और कांग्रेस की कारगुजारियों का चित्रण किया हुआ है। उन्होंने लिखा है कि, बाबू मंगू राम मुगोवालिया जी ने, कांग्रेसियों की नमक बनाने की भट्ठियां इसलिए तोड़ीं थीं, क्योंकि ये प्रसिद्ध गांधी कांग्रेसी और आर्य समाजवादियों द्वारा आदधर्म मंडल और आदधर्मियों को जलील करने वाला आंदोलन था महात्मा गांधी वायसराय जेम्ज वेवल के पास जा कर तीन मांगे मांग रहा लगा था, कि सभी नमक आंदोलनकारी कैदियों को बिना शर्त छोड़ दिया जाए, नमक टैक्स समाप्त करें, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को वायसराय की कौंसिल से तुरन्त हटाया  किया जाए। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के प्रति महात्मा गांधी की ये नफरत अछूतों के प्रति नफरत का इजहार ही था। जिन की नफरत और ईर्ष्या को उन्होंने अपनी ऐतिहासिक पुस्तक में लिखा हुआ है। महात्मा गांधी की तीनों मांगों से साबित होता है कि, नमक आंदोलन तो केवल एक मात्र बहाना था, मगर इस के पीछे जो साजिश थी, वह यही थी कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को वायसराय कौंसल से बाहर निकाला जाए।, क्योंकि वे कौंसल में रह कर,अछूतों को रोजगार दिला रहे थे, अछूतों को सरकारी नौकरियां भी दिला रहे थे, अछूतों को अपने पांव पर खड़े होने के लिए काम कर रहे थे, जिस के लिए सारी कांग्रेस विरोध कर रही थी। ब्राह्मणों की कांग्रेस पार्टी का ये मोहरा उन के लिए ही कार्य करता जा रहा था, जिस षडयंत्र को ना तो जवाहर लाल नेहरू समझ रहा था, ना ही पिछड़ी जातियों का नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल और डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद समझ रहे थे। आगर ये दोनों नेता उस समय, आदधर्म मंडल के नेतृत्व के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलते तो वर्तमान भारत केवल भारत के मूलनिवासियों का होता, आज भारत में  मूलनिवासी शासन होता, आज मूलनिवासी किसी के आरक्षण के मोहताज ना होते, भूमिहीन ना होते, कोटे के कलंक का शिकार ना होते, आरक्षण बचाने के लिए संघर्ष ना करते, भारत कभी भी कंगाल ना होता मगर उस समय भी पिछड़ी जातियों के ही नेताओं ने, मनुवादियों का साथ दिया और आज भी साहिब कांशीराम जी का साथ नहीं दिया था अन्यथा आज भारत में वहुजन सुशासन होता। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मॉर्च 28,2021।

Comments

Popular posts from this blog

गुरु रविदास जी की क्रांतिकारी वाणी दोधारी है।

क्रांतिकारी शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज।।

।।राम बिन संशय गाँठि न छूटे।।