आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। गोलमेज सम्मेलनों में हिन्दू मुस्लिम, सिख ईसाई संगठनों ने मूलनिवासियों को गुलाम बनाए रखने के षडयंत्र जारी रखते हुए, पचासी प्रतिशत मूल निवासी जनसंख्या को अपने साथ सिद्ध करने के लिए गांधी और कांग्रेस ने, कई पापड़ बेले। चमारों को राजपूत सिद्ध करने के लिए इन को सिल वहिये मिंयाँ कह कर पुकारना शुरू कर दिया था, नाईंयों को ठाकुर, घुमहार जाति को प्रजापति आदि नए नए शब्द ईजाद कर के मूर्ख बनाने का प्रयास किया था, इन्हीं नामों को सुन कर, ये लोग भी ब्राह्मणवाद के शिकार हो गए और जनगणना में, अपनी जाति के यही नाम लिखवाते रहे। महात्मा गांधी की छदमी जमात अनपढ़ मूलनिवासियों को धोखेबाजी से गुमराह कर रही थीं। केवल सवर्ण जातियों को स्वतंत्र करवाने के लिए गांधी एंड कम्पनी बैचेन थी। गांधी का लक्ष्य ही मनुवादी लोगों को बरतानवी राज से आजाद करवाना था ना कि, भारत के मूलनिवासियों को, जिस के लिए सामाजिक एकता, समरसता का ढोंग रचना लाजमी था ताकि अंग्रेज सरकार कोई भी, किसी भी किस्म का जातीय आधार पर, भारत का बंटबारा ना कर सकें, इसीलिए अछूतों की उन्नति के छदमी प्रयास शुरू कर दिए। गांधी की विचारधारा के मुकाबले ने आदधर्म नेतृत्व को क्रोधित कर रखा था। इस के इलाबा भी गुस्से के और भी कारण थे। गांधी की नर्म नीति और अहिंसात्मक सोच आदधर्म मंडल की गतिशीलता और जुझारूपन के अनुकूल नहीं थी। कांग्रेस ब्रिटिश सरकार के विरोध में थी, जिस के कारण सरकार आदधर्म की सुधारवादी नीतियों से सहमत थी, जिस के कारण सरकार भी आदधर्म की मानवतावादी सोच से आदधर्म मंडल नेतृत्व को पूरी सहायता देती जा रही थी। आदधर्म मंडल, गांधी और उस की कांग्रेस की काली करतूतों का जोरदार भाँड़फोड़ कर रहा था जिससे समूचा ब्राह्मणवाद सकते में आ गया था, मगर इतना सब कुछ होते हुए भी ये लोग आदधर्म मंडल का विरोध वहुत कम ही कर रहे थे ताकि उन की मनुवादी विसात को कोई आंच ना सके। कांग्रेस में धोखेबाज उच्च जातियों का एकाधिकार होने के कारण, आदधर्म नेतृत्व उच्च जातियों की कूटनीति को अच्छी तरह से समझ रहा था। ब्राह्मणवाद की पोषक कांग्रेस और उस का एकछत्र नेता गांधी ये जानते थे कि, जब हमें अंग्रेजों से सत्ता मिल जाएगी तब उस शक्ति का प्रयोग पचासी प्रतिशत मूलनिवासी, आदिवासी अछूतों को गुलाम बनाने के लिए किया जाएगा। इसी छलकपट के चलते गांधी और कांग्रेस पार्टी  आदधर्म मंडल की खरी और बुरी बातों को मन मार कर सहन करती जा रही थी, जिस का उन्हों ने पूना पैक्ट कर के बदला ले लिया था। आदधर्म मंडल मूलनिवासियों को मनुवादियों की गुलामी से बचाने की लड़ाई लड़ रहा था, मगर ड़ाक्टर भीमराव अंबेडकर ने, आदधर्म मंडल को बिना विश्वास में लिए पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर कर दिए और अछूत जहाँ पर थे वहीं पहुँचा दिए। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मार्च 17, 2021।

Comments

Popular posts from this blog

गुरु रविदास जी की क्रांतिकारी वाणी दोधारी है।

क्रांतिकारी शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज।।

।।राम बिन संशय गाँठि न छूटे।।