साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल के सिपाह सलार "हजारा राम"

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल के सिपाह सालार "हजारा राम"। पंजाब की पवित्र धरती धन्य है कि जहां, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल, बीडीओ हजारा राम, साहिब कांशीराम जैसे महापुरुष वहुजन समाज के कल्याणार्थ अवतरित हुए हैं। होशियारपुर शहर के साथ लगते गाँव पिपलांवाला में बी डी ओ हजारा राम का जन्म हुआ था। उन के पिता जी ने, परतंत्रता में भी उन्हें मैट्रिक पास करवाई थी। वे हजारा राम पिपलांवाला के नाम से जाने जाते थे और सरकारी नौकरी करते हुए भी वे समाज सुधार के काम में लगे रहते थे। उन्हीं दिनों गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के रचयिता स्वामी ईशरदास जी महाराज भी, होशियारपुर जिले के समीप गाँव नंदगढ़ महिलांवाली में आ कर, रहने लगे थे, जिन के सत्संग की धूमें विश्व में फैलती जा रही थीं। होशियारपुर के चारों ओर से लोग उन्हें सत्संग करवाने के लिए, पालकी में बैठा कर ले जाते थे। हजारा राम जी भी उन दिनों, होशियारपुर में ही बीडीओ के पद पर तैनात थे। वे स्वामी जी के सत्संग से प्रभावित हो गए थे। वे उन के पास नंद गढ़ महिलां वाली अवश्य आते थे और सत्संग सुनते थे। जब साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने, स्वामी जी को आदधर्म के लिए, धर्म ग्रँथ तैयार करने के लिए आग्रह किया था, तब से बीडीओ हजारा राम भी उन से और अधिक नजदीक आ गए थे। स्वामी जी आदधर्म के पुरोधा बन चुके थे, इसीलिए हजारा राम भी स्वामी जी के, आदधर्म प्रचार प्रसार में जुट गए थे। साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल जी के साथ भी यहीं साक्षात्कार हुआ था। हजारा राम जी भी आदधर्म आंदोलन के साथ जुड़ गए और वे भी आदधर्म मंडल के महासचिव नियुक्त किये जा चुके थे। जब साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी को ज्ञात हुआ कि, लार्ड लोथियन लाहौर आ रहे हैं, तब उन्होंने बीडीओ हजारा राम के साथ मिल कर, पांच हजार प्रदर्शनकारियों के हजूम का नेतृत्व देकर, उस आंदोलन की बागडोर उन्हें सौंपी थी। बीडीओ हजारा राम ने, इस आंदोलन को ,साभा राम निवासी लायलपुर के साथ मिल कर सफल बनाया था। जब स्वामी ईशरदास जी महाराज ने, बीडीओ हजारा राम को, गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के प्रचार प्रसार करने के लिए कहा था, तब वे इस काम में भी जुट गए थे। वे गुरु आदिप्रगाश ग्रँथ ट्रष्ट के महासचिव   बनाए गए थे। उन्होंने ही इस ट्रष्ट का संविधान बना कर, इस को सन 1980 में, रजिस्टर्ड करवा कर ऐतिहासिक कार्य किया था। स्वामी ईशर दास जी महाराज ने, उन्हें गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ को, छपवाने का दायित्व संभाला था, जिस को छापने के लिए वे दिन रात संघर्ष करते रहे, तत्कालीन इन्दिरा गांधी सरकार से, सस्ते रेट पर ग्रँथ के लिए कागज भी प्राप्त किया था, देशों विदेशों से धन इकट्ठा किया था मगर सन 1980 में अकाल काल कवलित हो गए। ऐसा सुना गया कि वे कुछ ही घण्टों के वाद, पुनः जीवित हो उठे थे। जब वे जीवित हो गए थे, तब उन्हों ने बताया था कि, मुझे स्वामी ईशर दास जी महाराज ने कहा कि, आप ने श्री गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ को छपवाने का बायदा पूरा नहीं किया है, इसलिए उसे छाप कर, अपना बायदा पूरा कर के आओ। ये खबर उन दिनों सभी अखबारों में भी छपी थी। हजारा राम जी ने छः महीने जिंदा रह कर, ग्रँथ को छपवाया था और फिर उस के बाद वे स्वर्ग सिधारे थे। जब 2008 में उसी ग्रँथ के ट्रष्ट का मुझे महासचिव बना गया था, तब मैं ने भी उस का पंजाबी से हिंदी अनुवाद किया था और 2009 में, पहला संस्करण, श्री अक्षय आदवंशी और अशोक जी के सहयोग से छाप कर, सँगत को उपलब्ध करवाया था। ये काम केवल बी डी ओ हजारा राम जी के किये गए कार्य के कारण ही हो सका है। बीडीओ हजारा राम जी ने, जो आदिवासी सँगत का कार्य किया है, उस के लिए वे कभी भी भुलाए नहीं जाएंगे। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मार्च 06, 2021।

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