आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।

।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।। आदधर्म मंडल ही सड़कों पर मूलनिसियों की लड़ाई लड़ रहा था मगर अपने ही मूलनिवासी गद्दार विभीषण आदधर्म मंडल की टांगे खींचे जा रहे थे। महात्मा गांधी के मरण व्रत की साजिश इन अंधों को नजर नहीं आ रही थी, जिस के कारण साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी को भी गांधी के समानांतर मरण व्रत रखने के लिए विवश होना पड़ा था। सीएल चुंबर जी लिखते हैं कि, बाबू मंगू राम जी का मरण व्रत, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के लिए भी एक मददगार यत्न था। बाबू जी तत्काल शिमला चले गए और वहां अपनी मांगों के लिए आवाज उठाई थी और किंग जार्ज को एक खुला पत्र लिख कर ब्रिटिश सरकार को धमकी भी दे दी थी कि, अनुसूचित जातियों को अलग चुनाब क्षेत्रों के अधिकार नहीं दिए गए तो पंजाब में ही नहीं सारे भारत में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ हो सकती है। उन्होंने ब्रिटिश सरकार को बता दिया था कि, उन का अछूतों के ऊपर पूरा कंट्रोल है, यदि जरूरत पड़ी तो, उन के साथ पंजाब के सभी आदधर्मी अपने प्राण तक कुर्बान कर सकते हैं। बाबू मंगूराम मुगोवाल जी के लिए, ये मसला सचमुच ही बड़ा पेचीदा था, क्योंकि आदधर्म मंडल इसी राजनीतिक प्रगटाबे के लिए, एक अलग कौम के लिए खड़ा हुआ था। उन के विचारानुसार हिन्दू बोटों के द्वारा विधान पालिका के बीच नुमांयदगी हासिल करने का प्रयत्न करना केवल राजनीतिक और सैद्धांतिक आत्महत्या होगी। इस का भाव होगा, हिन्दू समाज के बीच मुड़ वापस जाना, जिस से आजाद करवाने के लिए केवल आदधर्म मंडल ही संघर्षशील था। गांधी मनुस्मृतियों के काले सिद्धांतों के अनुसार मनुवादियों की छद्म लड़ाई लड़ रहा था, जिस के लिए वह जो भी ड्रामा कर सकता था, करता ही रहता था। महात्मा गांधी आदधर्म मंडल और ब्रिटिश सरकार को झुकाने के लिए कटिबद्ध रहता था। इसी कारण साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी को भी मरण व्रत रखना पड़ा, जो बारह दिनों तक चला मगर अम्बेडकर द्वारा पूना पैक्ट कर के सारे का सारा संघर्ष मिट्टी में मिल गया। जो पाया था वह सब कुछ खो दिया गया था। अगर उस समय पूना पैक्ट ना होता और मुस्लिमों की तरह सब अत्याचार सहन कर लिए गए होते, तो आज मूलनिवासी भी मुसलमानों की तरह आजादी से जिंदगी बिताते और भारत विश्व का शक्तिशाली देश बन गया होता। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मार्च 22, 2021।

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