आदधर्म मंडल का दुश्मन एम सी राजा।।
।।आदधर्म मंडल का दुश्मन एम सी राजा।।
पांच हजार सालों से, भारत के मूलनिवासी अगर नारकीय जिंदगी जी रहे हैं तो केवल मूलनिवासी राजनेताओं की फूट और विखंडन से ही जी रहे हैं। शिवशंकर, दानवीर बलि, राजा महिसासुर, एम सी राजा आदि अगर यूरेशियन लुटेरों को पहचान लेते और तत्काल उन का मिल कर के बहिष्कार करते, तो कोई भी यूरेशियन, भारतर्ष के मूलनिवासियों को गुलाम नहीं बना सकता था। यही कृतघ्नता आज भी जारी हैं, भारत में साहिब कांशीराम जी, मान्यवर वामन मेश्राम जी बी एल मातंग जी प्रोफेसर खैरात आदि राष्ट्रवादी नेता, मूलनिवासी समाज की आजादी की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं और मूलनिवासियों के अपने ही गद्दार, मनुवादी कांग्रेस, भाजपा के कार्यकर्ता बन कर, मूलनिवासी राष्ट्रवादियों के किये जा रहे संघर्ष को मिट्टी में मिलाने का कार्य करते जा रहे हैं, ये स्वार्थी अपना उल्लू सीधा कर के अछूतों के अधिकारों को बेच कर खाते आ रहे हैं, ऐसा ही तामिलनाडु के एम सी राजा ने, सन 1928 में अछूतों के साथ किया था।
एम सी राजा कौन था? :--- एम सी राजा का पूरा नाम राव बहादुर मिलै चिन्ना थंपी पिल्लई राजा था। इन का जन्म 17 जून सन1883 को मद्रास तामिलनाडु के सेंट थॉमस माउंट में हुआ था। इन्होंने मद्रास के क्रिश्चियन कालेज से शिक्षा प्राप्त की थी। प्रारंभ में एक स्कूल में अध्यापक के रूप में काम करने लगे थे। इसी के साथ वे राजनीति में शामिल हो गए थे। चिंगलेपुत जिला बोर्ड के वे अध्यक्ष मनोनीत किये थे। सन 1916 में इन्हें आदि द्राविड़ सभा का अध्यक्ष भी बनाया गया था। वे साऊथ इंडियन लिबरल फेडरेशन के राष्ट्रीय संस्थापकों में से भी एक थे। तामिलनाडु में जस्टिस पार्टी गैर ब्राह्मणों की राजनीतिक पार्टी थी, जिस से वे विधायक बने थे। मद्रास की लेजिस्लेटिव कांउसिल में, वे एक मात्र अछूत नेता थे। उन्होंने मूलनिवासी समाज के लिए परइया, पंचम बोलने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, कि इन शब्दों का निषेध कर के आदि द्राविड़ और आदि आंध्रा कहा जाए। मगर जब समय आया तब, ना तो आदि आंध्रा, ना ही आदि द्राविड़, आदि हिन्दू, आदधर्म को कहीं भी कोई मान्यता दिलाई थी। एम सी राजा का बीस अगस्त सन 1943 को निधन हो गया था।
जब साईमन कमीशन के पास एम सी राजा को मूलनिवासियों की वकालत करने का सुअवसर मिला था, तब वह मनुवादियों के साथ मिल गया था और कहा कि, पंजाब प्रांत के अछूत बाकी भारतीयों से बेहतर स्थिति में, जिस से अंग्रेजी सरकार ने, अछूतों की मांगों को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया था। जब साईमन कमीशन की रिपोर्ट जगजाहिर हुई तब फिर साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने, पुनः पंजाब प्रांत के अछूतों की वास्तविक स्थिति से साईमन को अवगत कराया था। जब साईमन ने पुनः साहिबे कलाम मंगू राम के साक्ष्यों को ब्रिटिश सरकार को बताया, तभी ब्रिटिश सरकार को, अछूतों की सच्चाई का पता चला था और अछूतों को विशेषाधिकार देने की घोषणा की गई थी, जिन में महत्वपूर्ण मांग थी, दो बोट का अधिकार, जिसे हमारे नेताओं ने पूना पैक्ट में खो दिया था।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
मार्च 07, 2021।
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