आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।।

।।आदधर्म मंडल और 1931 की जनगणना।। सन 1909 ईस्बी में जनगणना कमिश्नर एडबर्ड मेट ने ये सुझाव देते हुए गसती पत्र जारी किया था, कि दबियाँ, कुचलियाँ जातियों की उच्च श्रेणी जाति हिंदुओं से अलग सूची बनाई जानी चाहिए। हिंदुओं की ओर से इस का जबाब डर से भरपूर था। यह सुझाव भले ही अपनाया नहीं गया था, परन्तु उन का डर चिर स्थाई बना रहा और सन 1931 ईस्बी की जनगणना के बीच आदधर्मियों के प्रस्तावित दाखले ने उन डरों को पुनर्जीवित कर दिया। विशेष बात तो ये थी कि, इस ने आदधर्म मंडल और आर्य समाज के बीच तनाव को और अधिक बढ़ा दिया था, जिन में से अधिकतर सारे मैंबर जनगणना के मुद्दे को लेकर राजनीतिक परिक्रम के प्रति वहुत संवेदनशील थे। आदधर्म मंडल की चिंता प्रकट होना अंग्रेज सरकार की खुशी का एक कारण हो सकता है। आदधर्म मंडल के बीच इतनी बड़ी ताकत थी कि हिन्दू धर्म के संगठन जिस प्रकार आर्य समाज, जिस ने राष्ट्रीय स्तर का नाम बनाया था, उस से बढ़ कर ये विपरीत प्रभाव डाल रहा था, जिन की ओर से विरोधिता की आशा की जा सकती थी, फिर जब आदधर्म मंडल जनगणना कमिश्नर के ऊपर एक धार्मिक और एक श्रेणी के तौर से उभरा, जो कि एक वहुत बड़े सम्मान की प्राप्ति थी। आदधर्म को एक निश्चित वैधता प्रदान करने के इलाबा इस ने (जनगणना) आदधर्म मंडल के साथी संगठनों और सरकार के साथ बातचीत करने की शक्ति और बल बख़्श दिया था। इस के अतिरिक्त और शायद सब से अधिक महत्त्वपूर्ण बात ये थी कि, इस ने अंदरूनी विचारधारा के लिए इस की जरूरत को आवश्यक समझा गया था कि, आदधर्म मानने वालों को भी एक कौम के रूप में पहचाना जाए, जो कि हिन्दूओं सिखों और मुसलमानों के बराबर थे। ये एक प्रकार की आदधर्म की ही जीत को प्रकट करने वाली बात थी। इस बात का पता आदधर्म की सब से पहली कॉन्फ्रेंस से चलता है, जिस में विशाल पहचान हासिल करने का ऐलान किया गया था और उस में पास किये गए प्रस्ताबों में कहा गया था कि, हम हिन्दू नहीं हैं, हम सरकार के पास जबरदस्त बेनती करते हैं कि, हमें जनगणना में बतौर हिन्दू शामिल ना किया जाए, हमारा धर्म हिन्दू धर्म है ही नहीं, बल्कि आदधर्म है। हम हिंदूवाद के नहीं हैं और ना ही हिन्दू हमारा हिस्सा हैं, ये दिन दस अक्टूबर सन 1929 ईस्बी ही था, जब आदधर्म मंडल के सभी नेताओं ने मिल कर सरकार के पास अपनी यह इच्छा प्रकट की थी कि आदधर्म को जनगणना में एक अलग धर्म के रूप में सूचीबद्ध कर के शामिल किया जाए। ब्रिटिश सरकार द्वारा आदधर्म मंडल का ये सुझाव मान लिया गया था, परन्तु इस के बदले में, उस श्रेणी के निरीक्षकों ने उस दिन से ले कर आज तक अछूतों के लिए, उन के हिन्दू लोगों ने, अलग रखने के लिए गंभीर और निदनीय रवैया धारण किया हुआ है। सरकार अपने पक्ष में ये दर्शाने के लिए बड़ी बेचैन हो रही थी कि, ये तब्दीली किस प्रकार आई। सन 1931 ईस्बी की जनगणना रिपोर्ट ने सिद्ध कर दिया था कि, यह तबदीली मंगू राम मुगोवालिया जी की शानदार पेश करने के अंदाज और आदधर्म मंडल द्वारा किये गए प्रयत्नों को इतना बड़ा हूँगारा मिला था, जिस से यह सब कुछ हो सका।  रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मार्च 31, 2021।

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