साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और कम्यूनल अबार्ड।
।।साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल और कम्युनल अबार्ड।।
साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल ने, साईमन कमीशन के समक्ष जो प्रदर्शन किया था, उस के बड़े सकारात्मक और अत्यंत चकित करने वाले परिणाम निकले। गांधी, नेहरू और पटेल एंड कंपनी को इन परिणामों की तनिक भी आशा नहीं थी। आदधर्म मंडल ने साफ साफ कहा था कि, हम ना तो हिन्दू हैं, ना ही सिख, मुस्लिम हैं। हम इस भारतवर्ष के आदि बाशिंदे, मूलनिवासी हैं, हिंदुओं ने ये साबित करने का प्रयास किया था कि ये हमारे रीति रिवाजों को अपनाए हुए हैं, मुस्लिमों ने कहा कि ये लोग मुसलमानों की तरह मुर्दों को दफनाते हैं, सिखों ने कहा था कि ये सब लोग सिखों की तरह बाल रखते हैं, गुरुदुआरों में पूजा अर्चना करते हैं, इसीलिए ये सिख हैं। हिन्दू मुस्लिम, सिख अपनी अपनी जनसंख्या बढ़ाने के लिए ही ऐसे कुतर्कपूर्ण वक्तव्य देते जा रहे थे मगर साहिबे कलाम की खण्डे की धार सभी के कुतर्कों को काटे जा रही थी। उन्होंने कहा था, कि सर! हम ना तो वेदों को मानते हैं, ना ही मुर्दों को दफनाते हैं, ना ही बाल रखते हैं, केवल जहाँ जहाँ हिंदुओं की आबादी अधिक है, वहां ये लोग हमारे लोगों को डरा धमका कर अपने कुटिल रीति रिवाजों के अनुसार कार्य करवाते आए हैं मगर हम हिन्दू, मुस्लिम और सिख नहीं हैं, हम इस देश के मूलनिवासी ही हैं। हमारी संख्या के अनुपात में हमें सभी क्षेत्रों में आरक्षण दिया जाए जब लार्ड लोथियन की रिपोर्ट इंग्लैंड पहुँची और उस पर चिंतन हुआ, तब साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के तर्क उचित समझे गए, उन के मेमोरेंडम के अनुसार ब्रिटिश सरकार ने, अछूतों को स्वतंत्रता पूर्वक जीवन जीने के लिए विशेष अधिकार देने के लिए, कम्यूनल अबार्ड देने का ऐतिहासिक निर्णय सत्रह अगस्त 1932 को ले लिया। इस निर्णय के अनुसार, अछूतों को सभी क्षेत्रों में आरक्षण दे दिया गया। 73 सीटें भारत की राष्ट्रीय कौंसिल में भी आरक्षित कर दीं गईं, दो बोट का अधिकार भी दिया गया। अछूतों को जो पृथक निर्वाचन के रूप में अपने प्रतिनिधि स्वयं चुनने और दोहरे वोट के अधिकार दिए गये जिससे अछूत शूद्रों की सवर्ण हिंदुओं की पर निर्भरता खत्म हो जाती, दो वोट के अधिकार से अछूतों का स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व सुरक्षित रह सकता था। मोहनदास कर्मचन्द गांधी सरदार पटेल, तिलक, जवाहरलाल नेहरू सहित सभी कट्टर जातिवादी ब्राह्मण नेताओं को इस निर्णय से आपत्ति हो गई और इन अधिकारों को छीनने के लिए, गांधी आमरण अनशन पर बैठ गया था, जिस के समानांतर साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी भी पंजाब के शहर गढ़शंकर में, कम्यूनल अबार्ड के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठ गए थे मगर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने उन्हें और स्वामी अच्छूतानंद जी महाराज को बिंना पूछे ही पूना में पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर कर दिए, जिस में मनुवादियों ने अछूतों के सारे ही अधिकार छीन लिए और पुरानी ब्राह्मणवादी पद्वति के अधीन कर के भारत के मूलनिवासियों को फिर से अपना गुलाम बना लिया। स्वतंत्रता के उपरांत जितने भी आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधि चुन कर विधानसभाओं और संसद में जाते हैं, उन्हें उन की राजनीतिक पार्टियां अछूतों के पक्ष में बोलने ही नहीं देतीं हैं और ना ही अध्यक्ष लोग भी उन्हें मुद्दे उठाने की इजाज़त ही देते हैं, अगर कोई बोलना चाहे तो अध्यक्ष बीच में अपमानित कर के बिठा देते हैं। ये लोग नामात्र के अछूतों के प्रतिनिधि हैं, ये महाभारत युग के भीष्मपितामह की तरह मूक दर्शक बैठे रहते हैं, अछूतों की वहु बेटियों का अपहरण होता ही रहता, बलात्कारी बलात्कार करते ही रहते, ये बेटियों को जलाते रहते, नङ्गे भूखे अछूत रखे जा रहे मगर ये सभी गुलाम बादशाह जुवान से उफ तक नहीं कर सकते अगर कोई करे तो उसे पुनः टिकट नहीं देते।
अगर कम्यूनल अबार्ड लागू हो जाता तो किसी भी सांसद, विधायक के मुंह पर पार्टी का ताला जड़ा नहीं जाता और ना ही कोई अध्यक्ष किसी भी सांसद विधायक की आवाज को चुप नहीं करवा सकते थे। गांधी की फितरत काफी हद तक राजनीतिक थी, जिस का अनुमान सरदार पटेल को कही इस बात से स्पष्ट होता है, जिस में उस ने कहा था कि, दो वोट के अधिकार से हिन्दू समाज और हिन्दू धर्म विघटित हो जाएगा जिस षडयंत्र को पिछड़ा वर्ग के सरदार पटेल की बुद्धि नहीं समझ सकी थी और अंधाधुंध अपने वहुजन समाज के हितों की बलि देता रहा। आज भी ये पिछड़े वर्ग के नेता पटेल जैसे पिछड़ों के दुश्मन नेताओं की ब्राह्मणवादी सोच को नहीं समझ पा रहे हैं। साहिब कांशीराम जी ने यादवों के नेता मुलायम सिंह यादव के दिमाग में, पटेल की गलतियों को बैठाया था, जिस के कारण उस ने, समाजवादी पार्टी बनाकर मान्यवर कांशीराम जी की वहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर के उतर प्रदेश में वहुजन राज स्थापित कर दिया था जिसे ये लोग, मंद बुद्धि के कारण अधिक दिन नहीं चला सके, जिस के कारण साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल जी का सारे का सारा किया कराया मिट्टी में मिलता गया था। आज जरूरत है कि, उन की विचारधारा को अपना कर सभी अगड़े पिछड़े नेता केबल एक ही मुक्ति फ्रंट बना कर चुनाब लड़ें, तो पूना पैक्ट के भयंकर छलाबे को समाप्त किया जा सकता है।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
मार्च 09, 2021।
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