साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और पहला गोलमेज सम्मेलन।।

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और पहला गोलमेज सम्मेलन।। भारतवर्ष के मूलनिवासी गुलामों की गुलामी के संहारक साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने गांधी एंड कंपनी के कपटी स्वराज आंदोलन को ग्रहण लगा दिया था। उन के आदधर्म मंडल ने, सारे ब्रिटिश साम्राज्य को हिला कर रख दिया था। जहां गांधी एंड कंपनी ब्राह्मणवाद को पुनः जिंदा करने की विसात बिछा रही थी, वहीं पर साहिबे कलाम मंगू राम और स्वामी अच्छूतानंद जी महाराज, दिन रात उन के पर करतरते जा रहे थे।  अपने ज्ञापनों के द्वारा गुलामों के गुलाम मूलनिवासियों की गुलामी की सच्ची कथाएँ ब्रिटिश सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर के, ढोंगी महात्मा की काली करतूतें जगजाहिर कर के रख रहे थे, जिस के परिणाम स्वरूप जॉर्ज पंचम को 12 नबंबर 1930 को पहला गोलमेज सम्मेलन बुलाना पड़ा था, जिस की अध्यक्षता इंग्लैंड के प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडॉनल्ड ने की थी। ब्रिटिश सरकार का प्रतिनिधित्व सोलह प्रतिनिधियों द्वारा किया गया था। अंग्रेजों द्वारा शासित 57 राजनीतिक दलों और भारत की रियासतों के सोलह प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के चमत्कार के कारण इंडियन कांग्रेस और व्यापारिक संगठनों ने भाग नहीं लिया था और अवज्ञा आंदोलन का बहाना बना कर जेल में बैठ गए थे, ताकि अपनी अछूत विरोधी रणनीति को छुपा कर के अपनी जान को बचाया जा सके। जनवरी1931 को अछूतों के दुश्मन गांधी को जेल से रिहा किया गया था। सम्मेलन में मुस्लिम लीग:--- मुस्लिम लीग के मुहम्मद जिह्ना, मौलाना अली जौहर, मोहम्मद सफी, मोहम्मद जफरुल्ला खान, ए के फजलुल हक ने भाग लिया था। हिन्दू महासभा:--- हिन्दू महासभा के बी एस मुंजे, एम आर जयकर शामिल हुए थे। उदारवादी:---उदारवादी संघ के तेज बहादुर सप्रू और सी वाय चिंतामणि, श्री निवास शास्त्री ने सम्मेलन में भाग लिया था। सिख:---सिख धर्म के सरदार उज्ज्वल सिंह ने भाग लिया था। कैथोलिक ईसाई:---कैथोलिक ईसाईयों की ओर से ए टी पन्नीरसेल्वम सम्मेलन में शामिल हुए थे। अछूत वर्ग:---आदधर्म मंडल ने डॉक्टर बी आर अम्बेडकर को सम्मेलन में  भेजा था। रियासतें:---अकबर हैदरी हैदराबाद के निजाम मैसूर के दीवान, ग्वालियर के कैलाश नारायण हकसर, पटियाला रियासत के महाराजा भूपिंद्र सिंह, बड़ौदा के महाराजा सयाजी गायकबाड़ तृतीय, जम्मू काश्मीर के महाराजा हरिसिंह जी, बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह, भोपाल के नबाब हमीदुल्लाह खान, नवां नगर से के एस रणजीत, अल्बर के महाराजा जयसिंह प्रभाकर, इन के अतिरिक्त इंदौर, रीबा, धौलपुर, कोरिया, सांगली और सरीला के शासक भी शामिल हुए थे। उपरोक्त सभी प्रतिनिधियों ने भारत को महासंघ बनाने पर ही जोर दिया गया था, केवल आदधर्म मंडल के दिशानिर्देश के अनुसार, डॉक्टर भीम राव अंबेडकर ने ही मूलनिवासी, आदिवासी अछूतों की गुलामी पर गोलमेज सम्मेलन का ध्यान आकर्षित किया था। जिन के तर्कों से ब्रिटिश सरकार गाँधी के फरेबों को समझ कर, डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर के विचारों से पूरी तरह से सहमत हो गई थी, इसीलिए ब्रिटिश सरकार ने आदिधर्मी, आदिवासियों को विशेष अधिकार देने का मन बना लिया था। गांधी की मक्कारी को अंग्रेज सरकार भलीभांति समझ चुकी थी कि ये आदमी छलिया और कपटी है। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मार्च 11, 2021।

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