आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।
।।आदधर्म मंडल बनाम महात्मा गांधी।।
साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने ब्रिटिश सरकार को कहा था कि, मनुवादी भारतर्ष की मूलनिवासी जनता को आजाद नहीं करेंगे और ना ही मौलिक अधिकार देंगे, इसीलिए जब तक भारत के कमजोर अल्पसख्यकों को, विशेष कर आदि-धर्मी, मुसलमान और आदिवासियों को हर क्षेत्र में पूरा प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता और उन के साथ अच्छे व्यवहार की गारंटी नहीं दी जाती है, तब तक केंद्रीय सरकार के बीच कोई तबदीली ना की जाए। सीएल चुंबर लिखते हैं कि, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने ब्रिटिश सरकार से पुरजोर आग्रह किया था कि, भारत को उस समय तक आजादी नहीं देनी चाहिए, जब तक अछूत आजाद और बराबर नहीं हो जाते अन्यथा ये बरतानबी सरकार के लिए लानत की ही बात होगी। इस तरह आदधर्म मंडल और कांग्रेस के बीच कोई साम्य नहीं था।
कांग्रेस की भी अपनी अनुसूचित जाति लहर की सुपरैसड़ क्लासिज फेडरेशन थी, जिस के द्वारा सन 1924 में गांधी और कांग्रेस मूलनिवासियों को छल कपट से अपने विश्वास में लेने के लिए, बेगार, जबरन मजदूरी करने की प्रथा के विरोध में, लाहौर में छदमी जलूस निकलवाया था, बाद में इस के नेताओं ने, इस संस्था का नाम बदल कर, डिप्रैसड क्लासिज लाहौर रख लिया था। सन 1928 को जब साईमन कमीशन भारत में आया, तब इस फोर्म ने, गांधी और कांग्रेस की विरोधता करने की अपेक्षा, सन 1911 के भूमि इंतकाल अराजी एक्ट (Land Alienation act) का विरोध करते हुए, शाही कमीशन को बताया कि, इस एक्ट ने, अछूत मूलनिवासियों को घसियारे बना दिया है और बरतानबी सरकार को फिटकारने के लिए डेपूटेशन भेजा, जिस के बारे में उन का कहना था कि, भारतीय हिंदुओं की अपेक्षा ब्रिटिश सरकार शोषण, गरीबी और अनपढ़ता के लिए अधिक जिम्मेवार है। चुंबर जी लिखते हैं कि, ये कांग्रेस की अछूत विरोधी सियासत बाबू मंगू राम मुगोवाल की स्थिति से वहुत परे का चीख चिंघाड़ा था।
वास्तव में, ब्राह्मणवाद विरोधी के घर में प्यार से घुसता है और भीतर घुस कर, घर के लोगों की चीरफाड़ कर के अपना उल्लू सीधा करता आया है। यही नीति उस समय गांधी व कांग्रेस ने अपने समर्थक अछूतों का संगठन बना कर, ब्रिटिश सरकार को भी मूर्ख बनाया और अछूतों को भी मूर्ख बना कर उन के समर्थन में जलूस निकालवा कर अछूतों को विश्वास में लेने का ढोंग रच कर आदधर्म मंडल के प्रति भी अछूतों में नकारात्मक सोच विकसित की थी। गांधी अछूतों को गुलाम बनाए रखने के लिए, हर हथकंडा अपनाए जा रहा था मगर भारत के मूल निवासियों के गद्दार नेता गांधी और कांग्रेस की फितरत को बिलकुल ही नहीं समझ पा रहे थे, जिस खतरनाक हथियार को आदधर्म मंडल का नेतृत्व प्रयोग कर रहा था, उसी को छीन कर के, सन 1937 में गांधी ने प्रयोग किया और उस ने भी, दस सालों तक आजादी ना लेने के लिए ब्रिटिश सरकार को कहा था। इन्हीं दस सालों में, कांग्रेस ने, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के बड़े बड़े सिपाहसालारों, जरनैलों को खरीदा और कांग्रेस पार्टी का टिकट देने का झांसा देकर आदधर्म मंडल को तोड़ा और वहुजन राज का सपना खत्म कर दिया गया था।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
मार्च 18,2021।
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