साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल को आस्था"गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ"

।।साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल जी की आस्था "गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ"।। स्वामी ईशरदास, कभी विद्यालय में पढ़ने नहीं गए। एक तो छुआछूत का जोर था दूसरा माता, खेमों का साया बचपन उठ गया था। सोलह वर्ष की आयु में, वे घरबार छोड़ कर, हिमाचल प्रदेश की पवित्र धरती की ओर चले गए थे। यह कहा जाता है कि वे पंजाबी लिपि के वर्णों को, उंगली से धरती पर लिखते और पंजाबी भाषा सीखने का अभ्यास किया करते थे। बस यही उन की शिक्षा थी। इसी शिक्षा के कारण वे, अमूल्य गुरु रविदास जी महाराज की वाणी रचने लग पड़े थे। सोलह वर्ष की आयु में ही वे अपनी रचित अनुपम वाणी का सत्संग सँगत को देने लग गए थे।हिमाचल प्रदेश के ऊना शहर के समीप एक गाँव अर्नियाला है, वहां के सन्त रनियां राम के घर पर वे वाणी भी रचते थे और गाँव वासियों को शब्द कीर्तन से भी मोहित भी करते थे, इसी कारण वे देश विदेश में चर्चा के विषय बन गए थे। स्वामी जी की बढ़ती लोकप्रियता के कारण साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल भी उन की ओर आकर्षित हुए थे। सभी उन की शिक्षा और ज्ञान से आश्चर्यचकित थे। स्वामी जी की प्रत्युन्नमती बुद्धि को देख कर ही, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल ने, उन्हें अछूतों के लिए धर्म ग्रँथ तैयार करने के लिए, सब से अधिक उपयुक्त समझा था। जब स्वामी ही ने, गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ तैयार कर दिया था, तब वे इसी ग्रँथ का पाठ करते थे और मूलनिवासियों को भी इसी ग्रँथ का अपने घरों में प्रकाश करने के लिये निर्देश देते थे। साहिबे कलाम मंगू राम जी ने, गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के प्रचार प्रसार का नेतृत्व स्वयं किया था। वे जहां भी जाते वहां गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ की चर्चा अवश्य किया करते थे। सन 1977 में साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी हिमाचल प्रदेश के गाँव किदरियाणां, जिला हमीरपुर में, अपने विशेष मिशनरी साथी स्वर्गीय लंबरदार भगत राम के घर ठहरे हुए थे। वहां भी वे स्वामी जी की दिव्य ज्योति और आलौकिक ईश्वरीय ज्ञान की चर्चा कर रहे थे, वे हमें बता रहे थे, कि कोई भी व्यक्ति जो स्कूल का मुंह तक ना देखे और सभी गुरुओं की समाप्त की हुई वाणी को पुनः सृजित कर दे, वह कोई आम साधारण व्यक्ति नहीं हो सकता है। उन की दिल को छूने वाली वाणी के सत्संग को सुन कर हमें, बड़ी हैरानी होती है। साहिबे कलाम मंगू राम जी ने बताया था कि, मैं ने तो अपनी वसीयत कर रखी है कि मेरी मृत्यु के बाद, मेरे आदधर्म को मानने वाले, अनुयायी मुझे श्रद्धांजलि केवल गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के सिद्धांतों के अनुसार ही दें। उन के अनुयायी कहते हैं कि, जब साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी, मोक्ष को प्राप्त हुए थे तब, उन का अंतिम संस्कार गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के रीति रिवाजों के अनुसार ही किया गया था, गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के अंतिम समा प्रसंग को ही पढ़ कर, उन को श्रद्धांजलि दी गई थी। जब तक धरती रहेगी तब तक, गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ साहिब के साथ साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी का नाम भी अमर रहेगा। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। 03 मार्च, 2021।

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