साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ही देन है, गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ।

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी की ही देन है गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ।। भारत के मूलनिवासी चार पांच हजार वर्षों से, गुलामों की जिंदगी जीते आ रहे थे, यूरेशियन लूटेरे बंधुआ मजदूरों की तरह, शोषण करते आ रहे थे, मौलिक अधिकारों से भी वंचित किया हुआ था। आदपुरुष का सिंहासन हिल चुका था, इसी कारण उस ने, पहले मुस्लिमों को भारत के शोषकों की तवाही के लिए भेजा था, फिर न्याय दिलाने के लिए अंग्रेजों को भारत की धरती पर भेज कर, मूलभारतीयों को मौलिक अधिकारों की व्यवस्था करवाई थी। मन्दिरों में अमानवीय देवदासी प्रथा के कारण हरिजन जन्म ले रहे थे, वहु, बेटियों को चुरा कर, मन्दिरों में हैवानियत का खेल खेला जाता था, जिस से परमेश्वर का तख्ता हिल गया था, जिस के कारण सोमनाथ मंदिर की एक देवदासी बालिका ने, मसलमान शासक महमूद गजनी को पत्र लिख कर, हैवानों से, देवदासियों को मुक्त कराने की गुहार लगाई थी, जिस मार्मिक पत्र को पढ़ कर ही गजनी ने, सत्रह बार आक्रमण किये। सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर के, देवदासियों की सहायता की थी, मगर मिथ्या इतिहास लिखने वालों ने, इस सत्य को छुपा कर, भारतवासियों को अंधेरे में रखा हुआ है। ये सत्य मुस्लिम इतिहास में ढूंढा जा सकता है। इन्हीं जघन्य अपराधों की सजा क्रूर आक्रांताओं से, बहिसी अत्याचारियों को दे कर, गजनी ने, मासूम बेटियों की अस्मत की रक्षा करने का प्रयास किया था। जब अत्याचार पुनः सीमा से अधिक बढ़ गए तब, फिर भारत भूमि पर, स्वामी ईशरदास महाराज का अवतार हुआ जिन्होंने, मूलनिवासियों की स्वतंत्रता के लिए मार्ग तैयार किया। उन की सशक्त लेखनी ने, कांग्रेस के छद्म को बड़ी बुरी तरह जगजाहिर किया। उन की सहायता के लिए, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी और उन के साथियों को आदपुरुष ने अपना आशीर्वाद देकर, अछूतों की धार्मिक और राजनीतिक गुलामी की जंजीरों को काटा है। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने आदधर्म की स्थापना, सारी मॉनव जाति के लिए की थी, आदधर्म के नियम प्रकृति के उसूलों पर निर्धारित किये हैं, जिन के कारण आदधर्म को ब्राह्मण, राजपूतों सिखों मुस्लिमों ने भी अपनाया था। इस धर्म का सारा साहित्य यूरेशियन आक्रांताओं ने, नष्ट भ्रष्ट कर रखा था। पांच हजार सालों से पूर्व का कोई साहित्य नहीं मिलता, केवल ब्राह्मणों द्वारा लिखा हुआ मिथ्या कथाएं ही मिलती हैं। जब सभी धर्मों की सत्यता जानने के लिए ब्रिटिश सरकार ने, लार्ड लोथियन कमेटी को भारत भेजा था, तब फिर, मूलनिवासियों के लिए धर्म ग्रँथ की आवश्यकता हुई महसूस की गई थी। जिसे तैयार करवाने में सब से अधिक और महत्वपूर्ण कार्य साहिबे कलाम मंगू राम जी मुगोवाल जी ने ही किया था। स्वामी ईशरदास जी महाराज ने कभी भी स्कूल का मुंह नहीं देखा था, मगर उन्हीं से, अछूतों के लिए गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ की रचना करवाई, जब कि कोई भी उच्च शिक्षित स्त्री, पुरूष ऐसा रागों में, कोई ग्रँथ आज तक लिख नहीं सका। ये ग्रँथ सन 1929 से ले कर 1957 तक स्वामी जी ने कड़ी मेहनत कर के लिखा था। इस दैवीय ग्रँथ की सब से बड़ी विशेषता ये है कि, इस मे केवल सात सौ सत्पुरुषों की ही मौलिक, वाणी संगृहीत की गई है, जिस में बाबन रागों का प्रयोग किया गया है।बड़े आश्चर्य का विषय तो ये है कि, इस ग्रँथ में, भाषविज्ञान के सभी नियमों का प्रयोग किया गया है। श्लोकों, भावों, शब्दशक्तियों, छन्दों, दोहों, अलंकारों का बड़ी बुद्धिमत्ता से प्रयोग किया गया है, जो बड़े बड़े उच्च शिक्षा प्राप्त भी नहीं कर सकते हैं। ये इतिहास साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने ही रचा हुआ है। अगर वे नहीं होते तो, आज भी अछूतों के पास कोई भी पवित्र धार्मिक ग्रँथ ना होता। इसी ग्रँथ के कारण, अछूतों को सभी हक हकूक मिले थे, इसी ग्रँथ के कारण अछूतों को मान्यता मिली थी, ये काम केवल अंग्रेज सरकार कर गई थी, ब्राह्मणों ने तो तत्कालीन कानून भी निरस्त कर के, उन्हें लागू करना बंद कर दिया है। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और स्वामी ईशरदास जी महाराज ही अछूतों की किस्मत बना गए हैं, जिन्हें कभी भी भुलाया ना जाए। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। 02 मार्च, 2021।

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