साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और आदधर्म मंडल का पंजीकरण।।

।।साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और आदधर्म का पंजीकरण।।। आज हम मूलनिवासी अगर ब्राह्मणों के गुलाम हैं तो केवल अपने गद्दार धार्मिक और राजनेताओं की स्वार्थपूर्ण राजनीति के कारण ही हैं। सन 1926 से आदधर्म मंडल, जान हथेली पर रख कर अछूत आदवंशी, आदिवासी, मूलनिवासी जनता के लिए लड़ रहा था, लेकिन उन के किये पर पानी अपने ही मूलनिवासी स्वार्थी फेरते जा रहे थे। साभा राम निवासी लायलपुर, नारे लगाते हुए, लार्ड साईमन को, गुलाम मूलनिवासियों की कातर आवाज सुना रहे थे, क्रांतिकारी आदधर्म मंडल ने, सन 1928 में साईमन कमीशन को अपना मेमोरेंडम देते हुए, कहा था कि हम ना तो हिन्दू हैं, ना ही मुस्लिम, सिख और ईसाई ही हैं। केवल हम ही भारतवर्ष के मूलनिवासी नागरिक हैं, हमें मनुवादियों ने गुलाम बना कर रखा हुआ है, इसीलिए हमें इन से अलग विशेष अधिकार दिए जाएं। हमारी जनसंख्या के अनुपात में, हमें सभी क्षेत्रों में आरक्षण दिए जाएं, ताकि हमारा मूलनिवासी समाज भी सुख, चैन और आजादी से जिंदगी जी सके। हमें सेना में भी भर्ती किया जाए, सरकारी नौकरियां दीं जाएं। हमारे वच्चों को पढ़ने के लिए विद्यालयों में प्रवेश अनिवार्य किया जाए, उन की सारी फीस भी समाप्त की जाए, वच्चों को स्कालरशिप दिया जाए, ताकि उन की पढ़ाई का खर्चा उन्हें मिल सके। सन 1911 के इंतकाल अराजी कानून को समाप्त कर के, अछूतों को जमीन खरीदने के अधिकार दिए जाएं, छुआछूत, ऊँच नीच समाप्त की जाए, छुआछूत करने वालों को दण्ड दिया जाए। लार्ड साईमन ने, आदधर्म मंडल की मांगों पर सहमति जताते हुए, अपनी सकारात्मक रिपोर्ट ब्रिटिश सरकार को सौंप दी थी मगर आदधर्म मंडल के अपने ही अछूत राजनेता एम सी राजा ने कांग्रेस के साथ सांठगांठ कर के, जो कृतघ्नता की, उस के कारण, जब ब्रिटिश सरकार की रिपोर्ट आई तो उस में, लिखा था कि पंजाब के अछूत भारत के अन्य अछूतों से अधिक सम्पन्न और बेहतर हालत में हैं क्योंकि आर्य समाज के लोग उन की सहायता करते हैं। जब साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने, एम सी राजा की काली करतूतों का संज्ञान लिया, तो उन्होंने उस का बहिष्कार कर दिया और सरकार को कहा कि, ये व्यक्ति हमारा नेता नहीं नहीं है। सन 1929 में, जब गवर्नर पंजाब आए तब फिर आदधर्म मंडल का प्रतिनिधित्व मंडल पुनः उन से मिला और अपनी मांगों को पुनः तर्कसंगत ढंग से दोहरा कर पुनः गौर करने का अनुरोध किया था जिसमें आदधर्म मंडल ने, गवर्नर से अपील की, कि आदधर्म को पंजीकृत किया जाए। अछूतों को हिंदुओं और मुसलमानों से अलग अधिकार दिए जाएं। जिस के परिणामस्वरूप गवर्नर ने, आठमी तक अछूत छात्रों की फीस समाप्त कर दी थी। ये भी आदेश जारी दिये थे कि, 80 शिक्षित अछूत युवकों को अध्यापक प्रशिक्षण देकर, तत्काल अध्यापक नियुक्त किया जाए। आदधर्म मंडल की मांग को स्वीकार करते हुए, आदधर्म को 26 जनवरी 1930 को पंजीकृत कर दिया गया, जिस के अनुसार ही 1931 में हुई जनगणना में, भारत के मूलनिवासियों के साथ 4,18,789 हिन्दू ब्राह्मण, मुस्लिम, सिखों ने भी आदधर्म को स्वीकार कर के, जनगणना में दर्ज करवाया था, जो आदधर्म मंडल व साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल की वहुत बड़ी सफलता थी। सन 1930 में ही अस्सी आदधर्मी छात्रों को जे बी टी अध्यापक प्रशिक्षण देकर अध्यापक नियुक्त किया गया था, जिन्हें 25 रुपये मासिक वेतन मिलने लगा था। बड़े दुख की बात ये हो रही थी कि, मनुवादियों की कांग्रेस धड़ाधड़, भारतवर्ष के मूलनिवासी नेताओं को चोग डालती जा रही थी, जिस के कारण वे खरीदे और बिकते जा रहे थे। अछूतों के अधिकारों को बेच कर अपनी गद्दी सुरक्षित करते जा रहे थे, जिस के कारण ही आदधर्म मंडल आंदोलन को गहरा धक्का लगना शुरू हो गया था। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी, ने कभी हार नहीं मानी और ब्राह्मणों के नहले पर दहला मारते ही रहे। सन 1937 में, उन्होंने विधानसभा चुनाबों में, अछूतों के लिये आरक्षण लागू करवा कर, आदधर्म मंडल के नौ विधायक जिता कर, वहुजन राज की नींव डाल दी थी। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष। विश्व आदधर्म मंडल। मार्च 08, 2021।

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