हर शाख पर बैठ कर उल्लू लूट रहे।।
हर शाख पर बैठ कर उल्लू (भ्रष्टाचारी) लूट रहे! शायर रियासत हुसैन रिजवी उर्फ शौक बहराईची का जन्म छ: जून 1884 ईस्वी को अयोध्या के सैयदवाड़ा मोहल्ले में हुआ था लेकिन जन्म के बाद वे बहराईच में बस गए थे, इसलिए उन को शौक़ बहराईची के नाम से अधिक जाना जाता है, इस देश प्रेमी शायर ने आजादी के तत्काल बाद फैल रहे भ्रष्टाचार को अनुभव किया था और अक्षर:श उसी रूप में उन्होंने भ्रष्टाचारियों के ऊपर कटाक्ष करते हुए लिखा था, कि--- बर्बाद ऐ! गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी है! हर शाख पे उल्लू बैठे हैं अंजाम ऐ गुलिस्तां क्या होगा?" शौक बहराईची ने यह शेर बहराईच की कैसरगंज विधानसभा से विधायक और 1957 के प्रदेश मंत्री मंडल में कैबिनेट स्वास्थ्य मंत्री रहे हुकम सिंह की एक स्वागत सभा में भ्रष्टाचारियों के ऊपर कटाक्ष करते हुए पढ़ा था। शौक साहिब ने जिस मंच पर यह शेर पढ़ा था, वह दंड दिलाने वाले शासक का मंच था मगर बेखौफ लेखनी चलाने वाले निडर और साहसी शौक बहराइची ने देश में फैलते जा रहे भ्रष्टाचार के ऊपर कड़े शब्दों में कटाक्ष करते हुए जो लिखा है, उस से राजनेताओं की लूटघसूट का जनाजा निकलता आ रहा है। आज जो ...