21जनवरी।। 1970 के विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की पार्टी के विधायक।।
21 जनवरी।।1937 के विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की पार्टी के विधायक।
भारत छोड़ कर जाने से पहले अंग्रेजों ने भारत में लोकतांत्रिक ढंग से राजनीति चलाने के लिए भारत में स्वायत शासन की नींव बनाने के लिए सारे देश में विधानसभाओं का गठन करने के लिए सन 1937 में चुनाव करवाए थे, जिन में भारत के कई सामाजिक, धार्मिक और राजनैतिक संगठनों ने चुनाव लड़ा था, जिस के परिणामस्वरूप विशाल पंजाब में आद धर्म मंडल, महाराष्ट्र में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी, बिहार में जगजीवन राम ने भी डीप्रेस्ड क्लासिज लीग, युनिनिष्ठ पार्टी आदि संगठनों के माध्यम से चुनाव लड़ा गया था।
डाक्टर भीम राव अंवेदकर की पार्टी:--- सन 1936 में डाक्टर भीम राव अंवेदकर ने इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी का गठन किया था। जिस में सवर्ण जातियों को भी शामिल कर के अपनी पार्टी के पदाधिकारी बना कर विधानसभा चुनाव लड़ाया गया था।
इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी का चुनाव लड़ना:--- डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी ने भी सन 1937 के पहले विधान सभा में आरक्षित और अनारक्षित सीटों पर भी अपने उम्मीदवार खड़े किए थे, जिन में सभी टिकट महार जाति और ब्राह्मणों को दिए गए थे मगर किसी भी चमार को टिकट नहीं दिया गया था। जिस के कारण चमार जाति में असन्तोष पनप गया था। चमार जाति ही भारत में मनुवाद का सामना करती आ रही थी, जलियांवाला बाग में केवल चमार जाति को ही शहीद किया गया था मगर अंवेदकर ने महाराष्ट्र में इस जाति को की अधिमान् ना दे कर केवल महाड जाति के साथ ब्राह्मणों को ही आगे रखा। इस ऐतिहासिक चुनाव मे महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में डाक्टर भीम राव अम्बेडकर की इंडिपेंडेट लेबर पार्टी के निम्नलिखित पंद्रह विधायक चुने गए थे, जिन में तेरह विधायक आरक्षित सीटों से जीते थे और दो अनारक्षित से।
1 सबलाराम गुंडजी सोंनगावकर,
2 बीआर अंबेडकर,
3मिस्टर फुलसीनजी भारत सिंहजी ढाबी,
4 पुरुषोत्तम लाल जी चौहान,
5 राम कृष्णा गंगा राम भटांकर,
6 प्रभाकर जनार्दन रोह्म।
7 दौलतराव गुलाजी जादव,
8 भाउराव कृष्णा राव गायकवाड,
9 राजा रामजी भोले,
10 खंडेराव सखा राम सावंत,
11जीवारा सुभना एडले,
12 बलवंत हनमंत बराले,
13 रिवप्पा सोमप्पा एडले,
14 मिस्टर कमला जी रघो तलकर,
15 गंगाधर रघोराम घाटगे।
गुलाम भारत में आजाद मूलनिवासी विधायक बने:---अछूत जातियों के ये विधायक स्वतंत्र मूलनिवासी राजनीतिक दल के रूप में चुने गए थे, जिन पर किसी मनुवादी राजनीतिक दल का कोई भी दबाब नहीं था। ये लोग निडरता पूर्ण उन लोगों के लिए काम कर रहे थे, जिन के लिए ये विधानसभा में गए थे। डाक्टर भीम राव अम्बेडकर बाम्बे विधान सभा के विपक्ष के नेता भी रहे।
स्वतंत्र भारत का संविधान लिख कर भी डाक्टर अंवेदकर चुनाव नहीं जीत सके:--- जब भारत स्वतन्त्र हुआ तो डाक्टर भीम राव अंवेदकर चुनाव तक नहीं जीत सके और कांग्रेस पार्टी के रहमोकर्मों और उस के माध्यम से राज्य सभा के सांसद बन सके थे। राज्य सभा सीट के माध्यम से जीत कर के ही वे भारत के पहले कानून मंत्री बन सके, जिस के बाद वे लोकसभा तो दूर विधायक भी नहीं बन सके, जिस का मुख्य कारण मनुवादी जाति-पाती, ऊंच-नीच, और छुआछूत का षड्यंत्र था।
वर्तमान सांसद विधायक अंवेदकर से कुछ भी नहीं सीख ले रहे:--- जब दुनियाँ का सब से बड़ा संविधान लिख कर भी डाक्टर भीम राव अंवेदकर को नेहरू एंड कंपनी ने लोकसभा का चुनाव जीतने नहीं दिया तब भी आज वर्तमान आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ने वाले मूलनिवासी सांसद और विधायक, उन की हार से सबक नहीं सीख रहे हैं और निर्लज हो कर अपनी अपनी डफली बजा कर अपना उल्लू सीधा करते जा रहे हैं, जिस से मूलनिवासी जनता मनुवाद की चक्की तले पिस रही है।
वर्तमान जरूरत:---आज जरूरत हैं! कि भारत के सभी मूलनिवासी लोग वहुजन मुक्ति पार्टी को ही वोट देकर वीएल मातंग जी के नेतृत्व में वहुजन राज स्थापित करें और कांग्रेस, भाजपा, कम्युनिष्ट, और बसपा जैसे दलों से जीतने वाले मनुवादी दलालों को हरा कर अपना भविष्य संवारें। जब तक वहुजन मुक्ति पार्टी सत्ता में नहीं आएगी तब तक किसी भी मूलनिवासी को न्याय नहीं मिलेगा और गुलाम ही रहेंगे। जय मूलनिवासी!
रामसिंह आदवंशी।
महासचिव,
वहुजन मुक्ति पार्टी, हिमाचल प्रदेश।
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