14जनवरी।। सामाजिक गुलामी से मूलनिवासी स्वतंत्र क्यों नहीं हो रहे?
14 जनवरी सामाजिक गुलामी से मूलनिवासी स्वतंत्र क्यों नहीं हो रहे?
जब यूरेशियन आर्यों ने भारतवर्ष मैं प्रवेश किया था, तब भारत की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, सभ्यता उन्नति की चरम सीमा पर थी। कोई किसी का गुलाम नहीं था, कोई किसी का शोषण नहीं करता था, भारतवर्ष को सोने की चिड़िया कहा जाता था और इसी सोने की चिड़िया को लूटने के लिए यूरेशियन लोग भारतवर्ष में आए थे और छल बल से भारत के मूलनिवासियों को पूर्णरूपेण अपना गुलाम बना लिया था, इस गुलामी से कोई विद्रोह ना करे, उस के लिए इन्होंने भारत के मूलनिवासियों को हिप्नोटाइज करने के लिए ऐसे ऐसे मूलमंत्र तैयार किए, जिन में सब से पहला हथियार अनपढ़ता का प्रयोग किया गया।
मूलनिवासियों की गुलामी का दूसरा हत्थियार:---- भारत के मूलनिवासियों की शिक्षा खत्म करने के बाद दूसरा औजार आत्मा-परमात्मा, स्वर्ग-नरक और पुनर्जन्म को बनाया गया, जिन का खौफ पैदा कर के सारी जनता को फिर हिप्नोटाइज कर दिया गया। वर्षों तक चले इस छल-कपट ने, बुद्धिमान, सुसंस्कृत मूलनिवासियों को मूर्ख, अंध भक्त बना दिया और जो तत्कालीन मुल्लों, पादरियों, तिलकधारियों ने उन के दिमाग में ईश्वर और पुनर्जन्म का मानसिक आतंक फैलाया था, उस से केवल भारत के मूलनिवासी ही नहीं अपितु अरब, यूरोप, भारतीय, यूरेशियन लोग भी हिप्नोटाइज कर दिए गए। मनु और मनुवादियों के बनाए गए सिद्धांतों के खिलाफ चलने वालों को कठोर सजाओं का भय पैदा किया गया, जिस से सभी लोग आतंकित हो गए थे और धर्म के ठेकेदारों के षडयंत्र के जाल में फंस कर के गुलामी की जिंदगी जीने लगे, मनुवादियों ने इन काले कानूनों की पुस्तक तैयार की थी, जिस का नाम मनुस्मृति रखा गया। जिस में यह व्यवस्था की गई कि जो लोग ईश्वरीय आदेशों का पालन नहीं करेंगे, उन को ईश्वर द्वारा निर्धारित दंड भुगतने पड़ेंगे, इसी कारण सभी लोग तिलकधारियों के षड्यंत्र के शिकार होते गए। तिलकधारियों ने जिन औजारों का प्रयोग किया उन में सब से बड़ा हथियार ईश्वर को पैदा किया गया और उस के नाम पर कई झूठी काल्पनिक कथाएँ तैयार कर के मूलनिवासी भारतीयों को ब्लैकमेल किया गया।
ईश्वर ने जातियों की खोज की:--- इन छ्ली तिलकधारियों ने कथा घड़ी कि ईश्वर ने ही सभी जातियों, छुआछूत, ऊंच नीच को पैदा किया है, जिन में ब्राह्मणों को सर्वश्रेष्ठ बनाया हुआ है, इसी जाति को ब्राह्मण देवता भी कहा गया है, जो सरासर महाउपद्रव और झूठ ही है।
ईश्वर ने सभी को व्यवसाय बनाए हैं:- इन मठाधीशों, साधुओं, तिलकधारियों ने, मूलनिवासी भारतीयों को असंख्य जातियों में विभाजित कर के ऐसा मानसिक रूप से सम्मोहित किया है, कि इस वर्ण व्यवस्था को ये लोग ईश्वरीय आदेश मान कर हठधर्मी बन गए हैं। अस्सी के दशक में, मैं ने एक बूढ़े सफाई कर्मी को कहा, कि "आप ये व्यवसाय छोड़ कर दूसरा व्यवसाय क्यों नहीं करते हो?" इस व्यवसाय के कारण आप के वच्चों में हीनता की भावना पैदा होती है, अल्पायु में ही सफाई कर्मी मर जाते हैं, तब वह बूढा आदमी मुझ से बुरी तरह से पेश आया और कहने लगा, आप तो भगवान के हुकम को नहीं मानते हो, ये पेशा तो हमें भगवान ने दिया है, मेरी जुबान तक बंद कर दी और उस ने मेरी एक बात नहीं सुनी, मैं मूक दर्शक बन कर निरुत्र हो गया, ये तिलकधारियों ने ऐसे टीके लगाए हुए हैं कि जिस से मूलनिवासी भारतवासी सम्मोहित हो चुके हैं, इन मानसिक इंजेकशनों ने ब्राह्मणों को सचमुच देवता बना रखा है।
ईश्वर ने अवज्ञा करने वालों को दण्ड निश्चित किये:--मनुवादी षडयंत्रकारियों ने ऐसा भ्रमजाल बुना हुआ है कि लोग यही सत्य मानते आ रहे हैं, कि ईश्वर ने सभी लोगों के लिए उस के आदेशों का पालन ना करने के लिए दंड व्यवस्था बनाई हुई है, जिस के भय के आतंक में डूब कर लोग डर डर कर जी रहे हैं।
अवज्ञा करने वालों को नर्क की व्यवस्था:--- हिंदू मनुवादियों के अनुसार ईश्वर के आदेशों को ना मानने पर नर्क की व्यवस्था ईश्वर ने की हुई है मगर कोई भी धर्म का ठेकेदार स्वर्ग-नर्क के स्थान को नहीं दिखाता कि वह कहाँ पर है? हाँ, आज जो सभी धर्मों के मठाधीश, संत, महात्मा और तिलकधारी अपने काले कारनामे करते हुए पकड़े गए हैं, वे जेल की सीखों में नारकीय जिंदगी अवश्य जी रहे हैं, जिस से ज्ञात हो रहा हैं कि धरती के ऊपर ही बिमारियाँ, मानसिक, शारीरिक दुख, दर्द और जेल की यातनाएं ही नर्क हैं।
धर्म के ठेकेदार मानवता के दुश्मन:-- सारी की सारी मानव जाति मठाधीशों, तिलकधारियों और शैतानों के काल्पनिक ईश्वरीय आदेशों की शिकार हो चुकी है। जिन जिन लोगों ने उन के आदेशों का खंडन किया है, उन के आडंबरों, पाखण्डों, छलों, कपटों का विरोध किया है, उन को कड़ी से कड़ी शारीरिक और मानसिक यातनाएं देकर मानवता को शर्मसार किया है।
समाज सुधारकों को मौत की सजा:--जिन जिन महापुरुषों ने ढोंगियों, पाखण्डियों और भेड़ की खाल में छिपे हुए भेड़ियों को बेनकाब किया है, उन पंडित, पंडों, पुजारियों, मुल्लों, पादरियों और तिलकधारियों ने शासक वर्ग के साथ मिल कर के सूली पर टांग दिया है, जिस के साक्षात प्रमाण ईसा मसीह, मनसूर आदि लोगों की अनेकों शहादतें हमारे सामने हैं। इन हैवानों, शैतानों, की हैवानीयतों और फितरतों को अपना कर के धर्मांध अपना आत्मसम्मान तक भूल बैठे हैं।
रामसिंह आदवंशी।
प्रदेश महासचिव,
वहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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