11जनवरी।। भारत में सामाजिक गुलामी के कारण।।
11 जनवरी।। भारत में सामाजिक गुलामी के कारण।।
भारत में गुलामी क्यों है? भारत में 15% लोगों ने 85% लोगों को गुलाम बना कर रखा हुआ हैं मगर यह गुलामी क्यों है? इस के क्या कारण है? इस पर गुलाम लोग चिंतन नहीं करते हैं और गुरु रविदास जी महाराज, गुरु कबीर और साहिब कांशीराम जैसे क्रांतिकारी महापुरुषों ने चिंतन किया भी तो इन गुलामों ने उन का साथ भी नहीं दिया, जिसके कारण ये लोग गुलाम बने हुए हैं
भारतीय मूलनिवासी गुलाम कैसे हुए:--- सम्राट शिव के पतन के बाद यूरेशियन लुटेरों ने भारत की सभ्यता और संस्कृति को नष्ट कर दिया था और इस देश के मूलनिवासियों को गुलाम बना कर इन की शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया था, उन को पढ़ने लिखने पर प्रतिबंध लगा दिए थे। ग्राम स्तर पर मूलनिवासियों को आत्मा-परमात्मा, स्वर्ग-नरक, ऊंच-नीच और छुआ-छूत का पाठ पढ़ा कर मानसिक रूप से सम्मोहित कर के अपने वश में कर लिया। कालांतर में लोगों ने छुआछूत को अपनी नियति स्वीकार कर लिया, जिस के कारण भारत के मूलनिवासी सामाजिक रुप से यूरेशियन के गुलाम बन गए। यह कथा तो तीन चार हजार साल पुरानी है।
डकैत मुहम्मद बिन कासिम:-सातवीं शताब्दी में अरब निवासी मोहम्मद-बिन कासिम भारत में लुटेरा बन कर के ही आया था और उस ने भी भारत को लूटा और भारत की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर के इस्लामिक शासन में बदल दिया। उस के बाद डचों, फ्रेंचों, हूणों, मुगलों ने भारत को लूटने के लिए आक्रमण किये। भारत की जनता को मारकाट कर के धन लूटा और चलते बने। इसी तरह गजनी ने भी भारत को लूटा और भारत का धन देकर के अपने देश भाग गए। बाबर, हुमायूं ने भी यहां के मूर्खों को लूटा और यहां आधिपत्य भी जमा लिया। आज फिर मोदी राज में कई विदेशी धन लेकर कर भाग गए, कुछ भागने की तैयारी में हैं।
नये नये लुटेरों का इतिहास:--अभी अभी पांच छह सौ साल पहले पुर्तगाल और स्पेन के लुटेरे भारत में आए, जिनके बारे में भारत में विद्यमान लुटेरों ने इतिहास में लिखा की वास्कोडिगामा ने भारत की खोज की! जबकि इतिहास के पन्नों को खोल कर देखा जाए तो 1492 से पूर्व पश्चिमी जगत नंगा भूखा घूम घूम कर जगह जगह पर चोरियां और डकैतियाँ करता फिरता था। उस समय भारत सोने की चिड़िया कहलाता था, जिस को लूटने के लिए यह दोनों डकैत विदेशों मे धन ढूंढते फिरते थे।
भारत की खोज इतिहास:--इतिहास में लिखा गया है, कि पुर्तगाल के नाविक वास्कोडिगामा ने संत 1498 ईस्वी में भारत की खोज की थी मगर वह आदमी भारत की अर्थव्यवस्था का पता लगाने आया था कि भारत की धन संपदा को किस प्रकार चुरा करके अपने देश में ले जाया जाए।
क्रिस्टोफर कोलंबस की खोज:---इतिहासकारों ने लिखा है कि 1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस ने अमेरिका की खोज की थी, तब अमेरिका की मूलनिवासी आबादी 11 करोड की थी, परंतु स्पेन की सेना ने जब अमेरिका के मूलनिवासियों का कत्लेआम किया और उन की सेनाओं का शिकार होने पर, 500 वर्षों में वहां की जनसंख्या घट कर केवल मात्र 65000 रह गई थी। इसी कारण आज अमेरिका में सारी प्रजा माइग्रेटेड विदेशी लोगों से भरी हुई है।
अमेरिका की आजादी:--- 200 वर्ष पूर्व अमेरिका स्पेन के उपनिवेशवाद से आजाद हुआ है, आज वहां विदेशी लोगों का जमावड़ा इकट्ठा हो गया है परंतु वहां की मूलनिवासी जनता कहां गई? इस के बारे में कोई भी इतिहासकार विश्व को नहीं बताता है।
अमेरिका की तानाशाही:-- ज्यों ही अमेरिका अपने पांव पर खड़ा होता गया त्यो ही वह महालुटेरा बनता गया, जिस के परिणाम स्वरूप उस ने कई वर्षों तक अफगानिस्तान की धन संपदा को लूटने के लिए वहां डेरा डाल लिया था। अरब देशों के अमूल्य संपदा तेल पेट्रोल को लूटने के लिए इराक को ध्वस्त कर दिया, जिस में अमेरिका ने सद्दाम हुसैन की जान तक ले ली, क्या यह वर्तमान चोरी ठगी और डकैती के प्रमाण नहीं हैं। आज यूक्रेन और रसिया 1 साल से खून की नदियां बहा रहे हैं इसके पीछे भी नाटो देशों की यूक्रेन और रसिया के धनसंपदा के ऊपर टेढ़ी नजर है जिसके कारण ये डकैत देश भाई को भाई के साथ लड़ा करके मरवाते जा रहे हैं और खुद दूर बैठकर के खूनी तांडव नृत्य देख रहे हैं
वर्तमान दौर में डकैती के नए ढंग:-- चार हजार साल पहले यूरेशियन लुटेरों ने भारत को लूटने के लिए ब्रह्मा, विष्णु, महेश के नेतृत्व में आक्रमण किया था और छल बल करके भारत की अर्थव्यवस्था को छीन लिया था, वही इतिहास आज नाटो देशों का समूह दोहरा रहा है, जो धनसंपदा इन देशों के पास नहीं है उस को प्राप्त करने के लिए दूसरे देशों के ऊपर कोई ना कोई बहाना लेकर के आक्रमण कर देते हैं और वहां की धनसंपदा को लूट कर अपने देश ले जाते हैं। यही चलन आज भारत में इन के वंशज करते जा रहे हैं, उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को छीन कर के मूलनिवासियों को गुलाम बनाया हुआ है। सामाजिक रुप से भारत के मूलनिवासियों को इतना विभाजित कर दिया है, कि भारत के मूलनिवासी अपने अतीत को भूल चुके हैं और उन की रग-रग में जातिवाद समरस हो चुका है। अपने पेशों को मूलनिवासी वरदान मान रहे है मगर ये लोग यह नहीं समझते हैं, कि ना कोई ईश्वर है और ना ही कोई धर्म-कर्म और जाति-पाती है, यह केवल लुटेरों के मन की उपज है, जिस के कंधों के ऊपर मनुवादी लोगों ने अपने षड्यंत्रों की तोफें फिट की हुई है और उन के सहारे ही भारत के मूलनिवासियों को सामाजिक रूप से पूरी तरह विभाजित कर के अपनी मौज मस्ती की जिंदगी जीते हैं। इन लोगों के अंदर किसी किस्म का कोई भी सामाजिक सद्भावना और प्यार नहीं है। ये लोग केवल अपनी राजसत्ता कायम रखने के लिए किसी की भी जान ले लेते हैं।
भारत के आर्य लोग हिंदू-मुस्लिमो को लड़ाने के बहाने तलाशते हैं और मावलिंचिंग करवा कर एक-दूसरे को मारते हैं, इस संघर्ष में भारत के मूलनिवासियों के घर जला कर उन को बर्बाद किया जाता है, जबकि हिंदू-मुस्लिम का कोई आपस में लेना देना नहीं होता है, अगर होता है तो केवल भारत के मूलनिवासियों को मार काट कर जनसंख्या को कम करना और उन को अपना गुलाम बनाए रखना ही इन लोगों का लक्ष्य होता है।
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