9 जनवरी।। भारत की न्यू एजुकेशन पालसियाँ
भारत की न्यू एजुकेशन पौलिसियाँ।।
मोहनजोदड़ो हड़प्पा, सिंधु घाटी, राखीगढ़ी की खुदाइयों में जिन सभ्यताओं के अवशेष मिले हैं, उन से ज्ञात होता है कि उन के समय उच्च स्तर का शिक्षा तंत्र था। अनेकों प्रकार के आभूषण, बर्तन, विशाल शहरों का निर्माण तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था के ही परिणाम थे, यदि उस समय शिक्षाविद्ध और वैज्ञानिक ना होते तो ये खोजें नहीं हो सकती थी। वर्तमान काल में भी निर्माण कार्य इंजीनियरों द्वारा करवाए जा रहे हैं और प्रोफेसर, डाक्टर, शिक्षा व्यवस्था के कारण ही बन पा रहे हैं, इसलिए युरेशियन लोगों के आने से पहले ये सब खोजें हो चुकी थी और शिक्षा का भी प्रचार प्रसार हो चुका था। तत्कालीन खोजों से ज्ञात होता है कि भारत के मूलनिवासियों की शिक्षा व्यवस्था वर्तमान शिक्षा व्यवस्था से हजारों गुना अधिक बेहत्तर और उन्नत थी मगर वर्तमान मनुवादी एजुकेशन पॉलिसियाँ केवल मात्र मनुवादी शिक्षा शास्त्रियों के पेट भरने और उन के ऊपर धन खर्च करने के सिवाय कुछ नहीं है।
ये लोग एनसीआरटी के शीशे के महलों में बैठ कर के न्यू एजुकेशन पॉलिसियाँ बनाते हैं, जिन को धरातल पर लागू करना बड़ा मुश्किल है और ये नीतियां लागू भी नहीं हो पा रही हैं, इस के पीछे उन उच्च शिक्षा शास्त्रियों का हाथ है जो खुद अपने हाथों से कभी काम नहीं करते हैं और ना ही उन्हें दस्तकारियों के बारे में कोई ज्ञान होता है, गाँवों के वच्चों को किन किन दुश्वारियों से गुजरना पड़ता है, उन गाँवों के बच्चों के मनोविज्ञान को समझे बिना ही नीतियां निर्धारित करके उन के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जो बच्चे अच्छे कलाकार और कारीगर, इंजीनियर बन सकते हैं,उनको जबरन उन की इच्छा के विरुद्ध दूसरे कामों में धकेल दिया जाता है, जिस के कारण वे जीवन में पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पाते हैं, इन असफलताओं के पीछे शीशे के महलों में बैठ कर न्यू एजुकेशन नीतियां बनाने वाले शिक्षाशास्त्री ही हैं। आर्यों की शिक्षा नीति ने भारत की उन्नत सभ्यता संस्कृति को नष्ट कर के अपनी सभ्यता संस्कृति विकसित कर भारत के मूलनिवासियों की सभ्यता और संस्कृति को तहस-नहस करके अपनी मानव विरोधी सभ्यता संस्कृति थोंप दी है, जिस के अनुसार भारत के मूलनिवासियों की शिक्षा व्यवस्था को खत्म करके मनुष्य को अशिक्षित रख कर जानवर बनाने की नीतियां लागू की थी, जिस को लागू करने के लिए मनुस्मृति मानवता विरोधी संविधान तैयार किया गया था, जिस में शिक्षा प्राप्त करने वालों के लिए अमानवीय दंड व्यवस्था की गई थी, उसी के परिणामस्वरूप भारत में शिक्षा का पतन हो गया था।
अंग्रेजों की न्यू एजुकेशन पालिसी:---जब मुस्लिम और अंग्रेजों ने भारत की मनुवादी व्यवस्था को समझा परखा और अनुभव किया कि ये लोग शिक्षा के पतन के कारण आपस में जातिवाद, ऊंच-नीच, छुआछूत के जाल में फंस कर उलझ गए हैं, इसीलिए इन लोगों ने भारत के ऊपर छल कपट करके अपना आधिपत्य जमा लिया था और यहां पर अपना काम चलाने के लिए अपनी शिक्षा नीति थोंप कर एक नए युग का आरंभ किया था। इन लोगों ने अपना काम चलाने के लिए भारतीयों को शिक्षित करना शुरू किया था, जिस के परिणामस्वरूप भारत के मूलनिवासियों को भी पढ़ने लिखने का शुभ अवसर मिलने लगा था, जिसके कारण कई मूलनिवासी अछूत भी शिक्षित होने लगे।मूलनिवासी अछूतों के घरों में भी शिक्षा का शुभारंभ हो गया था।
आदधर्म मंडल के अध्यक्ष मंगूराम मुगोवालिया का शिक्षा आंदोलन:---सन 1924 ईस्वी में साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवालिया ने मनुवादियों के, गुलाम अछूतों को स्वतंत्र कराने के लिए सारे देश में जनजागरण कर के पंजाब आदधर्म मंडल की स्थापना की थी, जिस के द्वारा उन्होंने अंग्रेजों को विवश कर दिया था कि अछूतों के लिए भी शिक्षा की व्यवस्था की जाए और उन्होंने अछूतों को भी शिक्षित कर के अध्यापक नियुक्त करवाया था। जिन के प्रयासों से 1932 में अछूत छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए सदरूद्दीन नामक शिक्षा विद्ध को नियुक्त करवाया गया, जिस ने चालीस, चालीस अछूत युवकों को अध्यापक का प्रशिक्षण देकर के अध्यापक नियुक्त करवाया था। अछूत छात्रों को स्कॉलरशिप दिला कर पढ़ने, लिखने के लिए प्रेरित किया था, इस प्रकार भारत के मूलनिवासियों में शिक्षा का प्रचार प्रसार शुरू हुआ था।
सन 1980 में न्यू एजुकेशन पालिसी:---जब भारत के 85% मूलनिवासियों में शिक्षा का प्रचार प्रसार शुरू हो गया तो उस से मनुवादी परेशान हो गए और उन्होंने देखा कि भारत के अछूत शूद्र परीक्षाओं में सबसे अधिक अंक लेकर के मनुवादियों को पीछे धकेल रहे हैं, तब उन्होंने मूलनिवासियों की शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए न्यू एजुकेशन पॉलिसी लागू की, जिस के अनुसार अछूतों के शिक्षा स्तर को खत्म करने के लिए षड्यंत्र रचा और कांग्रेस ने, पहली, दूसरी, तीसरी कक्षा की परीक्षा समाप्त कर दी, जिस से अछूत ही नहीं सभी बच्चों को नालायक बना कर उनकी शिक्षा व्यवस्था खत्म की जाने लगी,बच्चे चौथी पांचवी कक्षा में चल नहीं सके मनुवादी न्यू एजुकेशन पॉलिसी के लिए परिणाम निकलने लगे
1986 की न्यू एजुकेशन पालिसी:-1986 में दूसरी एजुकेशन पॉलिसी लागू की गई जिसमें टेन प्लस टू सिस्टम शुरू किया गया, जिसमें एक प्राध्यापक को डेढ़, दो सौ बच्चे पढ़ाने पड़े और कभी भी सभी विषयों के प्राध्यापक और अध्यापक नियुक्त नहीं किए गए, जिस से गरीब परिवारों के बच्चों का जीवन बर्बाद होता गया, जो आज भी जारी है।
कौशल भत्ते की न्यू एजुकेशन पालिसी:---- भारत के मूलनिवासी लोगों के बच्चों को बर्बाद करने के लिए मनुवादियों ने एक नई एजुकेशन पॉलिसी शुरू की जिसमें कौशल विकास भत्ते की खोज करके गरीब होनहार बच्चों को अपने पैतृक पेशे अपनाने का फरमान हुआ है, जिस से गरीब होनहार बच्चों का भविष्य खत्म किया जा रहा। यह मनुवादियों की नई एजुकेशन पॉलिसी है जिन का शिकार गरीब होंगे।
वर्तमान बनने वाली न्यू एजुकेशन पॉलिसी:---अब मनुस्मृति और धर्म-कर्म कांडों की शिक्षा नीति लागू होने जा रही, जो ना जाने क्या क्या गुल खिलाएगी।
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