27 जनवरी।। मूलनिवासी बहुमत में हो कर भी गुलाम क्यों?

मूलनिवासी बहुमत में हो कर भी गुलाम क्यों? भारत के 85% मूलनिवासी अपनी ही धरती के ऊपर गुलाम क्यों हैं, चिंतनीय विषय है! चार हजार वर्षों से विदेशी यूरेशियन आर्य 85% मूलनिवासियों के ऊपर गुलामी थोंप कर के खुद बादशाह बने हुए हैं और विदेशी हो कर के भारत के मूलनिवासियों की किस्मत का फैसला करते आ रहे हैं, जिस के बारे में भारत के मूलनिवासी राजनेता समझ तो जरूर रहे मगर इस गुलामी को समूल नष्ट करने के लिए जो जरूरी उपाय हैं, वे नहीं कर पा रहे हैं। मूलनिवासियों की गुलामी के कारण:--- मनुवादियों ने साम दाम, दण्ड, भेद नीतियों को खोज कर विश्व की सर्वश्रेष्ठ धरती भारत को मूलनिवासियों से हथिया रखा है, जिन के सहारे ही मनुवादी शासन चलाने में सफल होते आए हैं। मनुवादी छल कपट:--भारत के मनुवादी छल बल कर के पचासी प्रतिशत मूलनिवासी जनता को नंगा, भूखा रख कर गुलाम बना कर रखते आ रहे हैं, जिस के सहारे मनुवादी कुशासन चलता आ रहा हैं। मूलनिवासी चिंतकों, नेताओं की हत्या:--- मूलनिवासी मेधावी, बुद्धिजीवी राजनेताओं, समाज सुधारकों, चिंतकों को मनुवादी व्यवस्था के साथ चलने के लिए राष्ट्रपति, मंत्री, सांसद, विधायक आदि के लालच दिए जाते हैं मगर जब कोई इन लालचों में नहीं फंसता तो उस को छल बल द्वारा दुनियाँ से विदा करवा दिया जाता। मूलनिवासी बुद्धिजीवियों का शोषण:--- मूलनिवासी बुद्धिजीवी युवाओं, लड़कों और लड़कियों को मनुवादी अपने बेटों और बेटियों की शादी करवा कर अपना लेते हैं, जिस से वे भी अपनी मूलनिवासी जनता से दूर कर दिये जाते हैं। मूलनिवासी धन धरती से वंचित:---मनुवादियों ने मूलनिवासी लोगों को भारत की धन धरती से वंचित कर के रखा हुआ है ताकि ये मनुवादियों के गुलाम बन कर उन के खेतों में मजदूरी कर के पेट पालने के लिए विवश रहें। शिक्षा से वंचित:--- युरेशियन आर्यो ने अंग्रेजों के शासन से पहले तो सभी मूलनिवासी लोगों को शिक्षा से वंचित रखा हुआ था मगर स्वतंत्रता के बाद दोहरी शिक्षा व्यवस्था थोंप कर अपने वच्चों को अंग्रेजी मिडियम में उच्च स्तर की शिक्षा देते हैं और गरीब लोगों को प्रादेशिक भाषाओं में निम्न स्तर की शिक्षा देकर केवल साक्षर किया जा रहा है और केवल मात्र बाबू, गार्ड बना कर शोषण किया जा रहा है। निष्प्रभावी आरक्षण:--- मूलनिवासी समाज सेवियों ने अंग्रेजी हुकूमत से लंबी लड़ाई लड़ कर आरक्षण की व्यवस्था कराई थी मगर वह भी पूर्ण ना देकर चोर दरवाजे से बंद कर दिया गया है। अहंकारी मूलनिवासी राजनेता:-- मूलनिवासी नेता अहंकारी हो कर आपस में एकता बना कर के चुनाव लड़ने का प्रयास नहीं करते हैं, जिस के कारण मूलनिवासियों का वोट विभाजित हो जाता है, जिस से यूरेशियन अपनी राजसत्ता कायम करते आ रहे हैं अहंकारी मूलनिवासी राजनेता एक राष्ट्रीय नेता स्वीकार नहीं करते :--- 85% मूलनिवासी वहुमत में हो कर मूलनिवासी राजनेता अहंकार की मूर्खता के शिकार बने हुए हैं, क्योंकि ये राजनेता किसी एक व्यक्ति को अपना राष्ट्रीय नेता स्वीकार नहीं करते हैं और अपने आप को 85% मूलनिवासियों के अवतार सिद्ध करने के लिए, मरने के बाद अपनी पूजा करवाने के लिए दूसरे किसी भी नेता को उभरने नहीं देते, स्वामी अछुतानंद जी, गद्दरी बाबा मंगूराम, ज्योतिबा फुले, साहिब कांशीराम आदि ने ही सारे भारत में घूम कर राष्ट्रीय एकता बनाई। मूलनिवासी राजनेताओं ने राजनीतिक पार्टियां बनाकर के अपनी दुकानें खोली हुई:--- ऐसा नहीं कि भारत के मूलनिवासी नेता राजनीति करने में सक्षम नहीं है परंतु जो इन क दलों के मुखिया हैं, उन्होंने क्षेत्रीय पार्टियों बना कर के अपने परिवारों के लिए रोजी रोटी के लिए दुकाने खोल हुई हैं, बसपा, आर जे डी, अकाली दल, सपा आदि ऐसी ही पार्टियां हैं। असंख्य वहुजन ब्रांड पार्टियां:-- बहुजन नायक साहब कांशी राम ने 85% लोगों को एक मंच पर इकट्ठा करने के लिए बहुजन शब्द ढूंढ कर एकता बना कर के वहुजन राज स्थापित किया था मगर तानाशाह मायावती ने उन के सारे आंदोलन को जमीदोज कर के बहुजन समाज को भी जमीदोज कर दिया है, जिस के कारण साहब कांशी राम के योग्य शिष्यों ने बहुजन शब्द को एक ब्रांड बना कर अनेकों वहुजन पार्टियां बना ली मगर ये लोग एक सांसद जिताने की औकात नहीं रहते। मूलनिवासी राजनेता अपनी पार्टी के नेताओं को अपना गुलाम समझते:- मूलनिवासी राजनेताओं को अपने परिवार के सिवाय कोई नेतृत्व करने लायक कोई नजर नहीं आता, जो दूसरे, तीसरे, नंबर पर पार्टी का संचालन कर सके, इन लोगों को अपने ही परिवार के बेटे और बेटियां नजर आते हैं, उदाहरण के तौर पर मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, राम विलास पासवान, मायावती, बादल आदि राजनेताओं को अपनी पार्टियों के संस्थापकों, कार्यकर्ताओं में से कोई भी ऐसा नेता नजर नहीं आता जो पार्टी का नेतृत्व कर सके, यदि कोई मुखिया बनने की हिमाक्त करे तो उस की राजनीतिक हत्या कर दी जाती। परिवारवाद मूलनिवासी जनता की गुमाली का कारण:-- मूलनिवासी राजपरिवार ही मूलनिवासी लोगों की गुलामी के मुख्य कारण हैं, ये अहंकारी लड़के, लड़कियां और बहुएं अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इस योग्य नहीं समझते हैं, कि इन्होंने भी पार्टी के लिए जीवन लगा कर, पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया है, उन का भी मुख्यमन्त्री बनना अधिकार है, जिस के कारण इन राजनीतिक दलों के योग्य और बुद्धिमान राजनेता पर्दे के पीछे रहते आए हैं, जिन की मूर्खता से मूलनिवासी गुलाम हैं। अहँकारी नेताओं की मूर्खता :---अहंकारी राजनेताओं का अहंकार ही मूलनिवासी लोगों की गुलामी का मुख्य कारण हैं, यदि ये सभी एक पार्टी बना कर चुनाव लड़ें तो कोई भी मनुवादी चुनाव जीत ही नहीं सकता। पंजाब की जनता ने साहिब कांशी राम का कहा माना और चार सांसद जिताए मगर ये सभी इकठ्ठे नहीं रहे, एक दूसरे की टांग खीचते रहे और पार्टी का बेड़ा गर्क कर दिया, बसपा की बची-खुची औकात मायावती ने खत्म कर दी, मूलनिवासी जनता तो एकता कर लेती हैं मगर नेता नहीं। रामसिंह आदवंशी। महासचिव, वहुजन मुक्ति पार्टी। हिमाचल प्रदेश

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