15 जनवरी।। क्रांतिकारी वीरांगना फूलन देवी।।

मनुवादी दुर्गाओं के शरीर अस्त्रों-शस्त्रों से लदे पड़े हैं, जिन्होंने भारत के मूलनिवासी शासकों को छल-बल कर के मारा था। इन नारियों ने, नारी जाति को कलंकित करने के लिए आत्महत्या कर के मनुवादी शासन कायम करने के लिए निरीह, सत्यवादी, दानवीर मूलनिवासी राजा बलि महाराज, महिषासुर आदि को मार कर सुरों ( शराब पीने वालों का, नशेड़ियों का राज )राज स्थापित किया है, जो आज भी जारी है। मूलनिवासी औरतों को ये मनुवादी अपनी हबस का शिकार बना कर हबस तो पूरा करते ही हैं मगर कानून के भय से मूलनिवासी कन्याओं को बड़ी क्रूरता से हत्या कर के मुख्यमन्त्रियों और मंत्रियों की सह पर रात के अंधेरे में ही जलवा देते हैं। यदि मूलनिवासी कन्याओं को अपनी अस्मत की रक्षा करनी है, तो वीरांगना फूलन देवी बनो ताकि भेड़िये आक्रमण कर ही ना सकें। फूलन देवी का जीवन परिचय:--- फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 में उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के घूरा का पुरवा नामक छोटे से गांव में गरीब परिवार मल्लाह जाति में हुआ था। उसके पिता का नाम देवी दीन मल्लाह और माता का नाम मूला देवी था। फूलन देवी के साथ अत्याचार:--- जब फूलन देवी 15 वर्ष की हुई तब गांव के ठाकुरों ने उसके साथ गैंगरेप किया सारे गांव में उसे निर्वस्त्र करके अपमानित किया गया। अपने अत्याचार के खिलाफ बेदर्द गांव में न्याय पाने के दर दर भटकी थी मगर कहीं उस को कोई इंसाफ नहीं मिला फूलन देवी विद्रोही बन गई:---जब फूलन देवी को दर-दर भटक कर कहीं भी न्याय नहीं मिला तो वह विद्रोही हो गई और अपने अन्याय का बदला लेने के लिए कमर कस कर के ठाकुरों के खिलाफ रणभूमि में उतर पड़ी। डकैतों द्वारा अपहरण:--- एक दिन कुछ डकैतों ने फूलन देवी के गांव पर हमला किया और वे फूलन देवी को उठा कर के ले गए और उस से लगातार बलात्कार करने लगे। फूलन देवी और विक्रम मल्लाह:--- जब डाकूओं ने भी उस की अस्मत लूट करके उस को बुरी तरह तोड़ कर बिखेर दिया, तब उस की अपने ही जाति के विक्रम नामक डाकू से मुलाकात हो गई। दोनों सजातीय मल्लाह होने के कारण मिल कर एक गैंग बना ली। हिम्मत से काम लिया फूलन देवी ने:--- फूलन देवी ने विक्रम के साथ मिल कर के जो गैंग बनाई उसका लक्ष्य था कि वह उन लोगों को मिट्टी में मिला देगी, जिन्होंने उसके साथ गैंग रेप किया था। जिंदा रह कर अत्याचार का बदला लेने का निश्चय:--- फूलन देवी ने जिंदा रहते हुए ही अपने अत्याचारों का बदला लेने का निश्चय किया हुआ था, जिस के परिणाम स्वरूप उसने 18 वर्ष की आयु में 14 फरवरी 1981 को बेहमई गांव के 22 ठाकुरों को एक पंक्ति में खड़ा करके अपनी गोली का निशाना बना कर के अपना न्याय खुद कर लिया, जिस से दिल्ली में संसद हिल गई। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की विधानसभा में खूब तूफान आ गया। फूलन देश विदेश में प्रसिद्ध हो गई। सरकार ने उस को पकड़े जाने के लिए उस के सिर के ऊपर इनाम रखा। उत्तरप्रदेश और मध्य प्रदेश की पुलिस फूलन को पकड़ने के लिए पीछे पड़ गए परंतु वह किसी के हाथ नहीं आ रही थी और जिंदा मांस नोचने वाले मनुवादियों के खिलाफ अपना क्रांतिकार अभियान जारी रखा। मनुवादियों को अस्मत लूटने का दण्ड दिया:--- फूलन देवी ने विक्रम के साथ मिल कर के गरीबों के साथ होने वाले और बलात्कारों का बदला लेना जारी रखा, ताकि भविष्य में कोई हबसी अपनी कामुक इच्छा पूरा करने के लिए किसी गरीब लड़की के साथ बलात्कार करने से पहले फूलन देवी के खौफ को याद करके बलात्कार कर ही ना सके। इंदिरा गांधी की फूलन देवी को अपील:--भारत सरकार फूलन देवी के प्रतिशोध से टकरा कर हतास हो गई और समझौते पर उतर आई और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, भिंड के एस पी राजेंद्र चतुर्वेदी और लेखक कल्याण मुखर्जी ने अपील जारी की कि फूलन देवी तत्काल पुलिस के सामने अपने साथियों सहित आत्मसमर्पण कर दे, उस के साथ किसी प्रकार का कोई अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाएगा। उस समय उस का साथी विक्रम मल्लाह मारा जा चुका था। फूलन देवी ने आत्मसमर्पण करने से पहले शर्ते रखी थी-- 1 उसे और उसके साथियों को मृत्युदंड ना दिया जाए। 2 आत्मसमर्पण करने वालों को जमीन के पट्टे दिए जाएं। 3 किसी को भी 8 वर्ष से अधिक जेल की सजा ना दी जाए।वीरांगना का आत्मसमर्पण,:---जब सरकार ने फूलन देवी की सभी शर्तों को मान लिया तो उसने अपने साथियों सहित 13 फरवरी 1983 को भिंड में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह के समक्ष 300 पुलिस कर्मियों और 10000 जनता और अपने पूरे परिवार की उपस्थिति में राइफल उठा कर जनता को अभिवादन करते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। फूलन देवी पर 22 हत्याओं, कई लूटपाट और अपहरण अपराधों के मुकदमे दर्ज थे। फूलन को गवलियर केंद्रीय जेल में 11 वर्ष तक किसी मुकदमे का सामना किए बिना जेल में रखा गया। आदर्श जीवन के रूप में फूलन देवी:--- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने सन 1993 में फूलन देवी पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने की घोषणा कर दी। सन 1994 में फूलन देवी को जेल से रिहा करने के बाद उस के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हो गया। सन 1983 ईस्वी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उसे सांसद का चुनाव लड़ने का प्रस्ताव भेजा जिसे फूलन देवी ने स्वीकार कर लिया और चुनाव लड़ कर जीता, मिर्जापुर सीट से सांसद बन कर भारत के सर्वोच्च सदन में पहुंची, जहां उस ने बेखौफ हो कर के गरीबों, दलितों, पिछड़ों की समस्याओं के प्रति अपनी आवाज बुलंद की, जिस से वह देश विदेश में चर्चा का विषय बन गई। बैंडिट क्वीन के रूप में फूलन देवी:---फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने फूलन देवी के जीवन के ऊपर आधारित बैंडिट क्वीन नामक एक फिल्म बनाई इस फिल्म की कहानी माला सेन द्वारा लिखी गई पुस्तक इंडियाज बैंडिट क्वीन के ऊपर आधारित थी। फिल्म में फूलन को मेन करेक्टर के रूप में रखा गया था, जिस के ऊपर उसने आपत्ति प्रकट की थी, फिर प्रोड्यूसर और उस के बीच समझौता हो गया और फिल्म भी रिलीज हो गई, इस फिल्म ने कई अवार्ड जीते थे। 25 जुलाई 2001को शेर सिंह ने फूलन देवी की हत्या कर दी थी।

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