18जनवरी।। वोटिंग मशीन से बोट चोरी करके मनुवादी गुलामी जारी है
वोटिंग मशीन से वोट चोरी कर के मनुवादी गुलामी जारी है।
मनुवादी युरेशियन, मनुस्मृति के काले कानून कायदे थोंप कर भारत के मूलनिवासियों को गुलाम बना कर रखते आए थे मगर जब 1924 में गद्दरी बाबा मंगू राम मुगोवालिया जी ने भारत के कोने कोने में, भ्रमण कर के भारत के मालिक मूलनिवासी लोगों को मनुवादी गुलामी के बारे में जागृत कर के, विश्व का पहला आदिवासी, आदि धर्म सम्मेलन 11/12 जून 1926 को अपने ही गाँव मुगोवाल (पंजाब) में किया और घोषणा कर दी कि हम भारत कें मूलनिवासी हैं और हम सभी हिंदू नहीं हैं, हम आदि धर्म को मानने वाले आदधर्मी हैं, तब मनुवादी समझ गए कि अब तो हमारे बुरे दिन आने वाले हैं, और आ भी गए थे। आदधर्म मंडल ने अंग्रेजों से आरक्षण ले कर, भूमि और शिक्षा का अधिकार ले कर मनुवादी मनुस्मृति को दफन कर दिया, जिस से विदेशी हिंदू अंग्रेजों से चिढ़ गए मगर कुछ कर नहीं सके।
सन् 1937 के चुनाव में आरक्षण:---आदधर्म मंडल ने 1937 के विधान सभाओं की कुल 1585 सीटों में से 148+3= 151सीटें आरक्षित करवा कर चुनाव में आरक्षण लागू करवा लिया था। जिन में क्षेत्रानुसार मद्रास को 215/30, सेंट्रल प्रोविन्सिस को 112/20, बॉम्बे और सिंध को 110/15, पंजाब को 175/ 8, बिहार 152 + उड़ीसा 60 को 212/18+3=21,असम को 108/7, बंगाल को 250/30, यूनाईटिड प्रोविन्सिस यू पी को 228/20 सीटें आरक्षित मिलीं थी। इन आरक्षित सीटों से जीते विधायक स्वतंत्र और निडर हो कर काम करते थे, किसी के ऊपर मनुवादी दल का अनुशान नहीं था। स्वतंत्रता के बाद गुलाम विधायक और सांसद:--- आजादी के बाद मनुवादी दलों ने अपने अपने गुलाम अछूतों को टिकट दे कर गुलाम प्रतिनिधि चुन कर, उन का मुँह पार्टी अनुशासन थोंप कर हमेशा के लिए बंद कर दिया, जिस के कारण ये लोग मूलनिवासी समाज के नाम पर कलंक ही नहीं भार बन गए।
साहिब कांशीराम जी का उदय:-- जब साहिब कांशी राम ने अनुभव किया कि भारत के 85% मूलनिवासी 15% मनुवादियों के गुलाम हो गए हैं, तब उन्होंने नारा दिया कि वोट *हमारा राज हमारा नहीं चलेगा, नहीं चलेगा*, *जो वहुजन की बात करेगा सो दिल्ली से राज करेगा*, इन नारों से घबरा कर सभी मनुवादी राजनीतिक दल एक मंच पर इकट्ठा हो गए थे, जिस के परिणामस्वरूप सभी दलों के मनुवादियों ने राज बचाने के लिए एक बहुत बड़ी योजना बनाई, जिस के तहत वोटिंग मशीन खरीदने का निर्णय लिया गया। 1982 में तत्कालीन प्रधानमन्त्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में ही वोटिंग मशीन खरीदने का बिल संसद में पेश करवाया गया था, जिस का सब से पहले समर्थन विपक्ष के ब्राह्मण नेता अटल बिहारी बाजपेई ने किया था और उस के बाद दूसरे ब्राह्मण सांसद कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी ने किया था। इस से स्पष्ट होता है कि कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के तीनों ब्राह्मण नेताओं ने मिल कर के यह षड्यंत्र रचा था, कि वोटिंग मशीन खरीदी जाए और उस को हाईजैक कर के वोटिंग मशीन से ही वोट चुरा कर चुनाव जीते जाएं और साहिब काशीराम को उन का लक्ष्य पूरा करने से रोका जा सके। जब वोटिंग मशीन द्वारा चुनाब शुरू किये गए तब से ही कांग्रेस ने लगातार 10 वर्षों तक वोटिंग मशीन के सहारे राज किया और उस के बाद 2014 में भारतीय कांग्रेस पार्टी ने आपसी समझौते के अनुसार सत्ता छोड़ दी और जानबूझ कर लोक सभा का चुनाव हार लिया ताकि भारतीय जनता पार्टी से किए गए समझौते के अनुसार भारत में भारतीय जनता पार्टी की सरकार 10 वर्षों के लिए बनाई जा सके। इसी षडयंत्र से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई। भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेंद्र दास मोदी को प्रधानमंत्री चुना गया और उस ने राजसत्ता संभालते ही पहले ही दिन अपने संबोधन में यह घोषणा कर दी थी कि अब 2024 तक मैं ही प्रधानमंत्री पद पर बना रहूंगा। हम उसी समय समझ गए थे कि अगले 5 वर्षों की घोषणा किस प्रकार, किस तर्क के आधार पर कर रहा है मगर जब 2019 में चुनाव हुआ तो सचमुच भारतीय जनता पार्टी जीत गई। मोदी ने भारत में राजतंत्र लागू कर के लोकतंत्र की हत्या कर के देश की इतनी दुर्दशा कर दी है, कि भारत में मोदी तो क्या मोदी का एक भी सांसद जीतने वाला नहीं था। जब मोदी और उस के सहयोगी भारत में चुनावी रैलियां करते थे, तो उस समय मोदी की रैलियों की कुर्सियां खाली ही रह जाती थी, उस से अनुमान लगाया जा सकता था कि मोदी और भारतीय जनता पार्टी कदापि जीत नहीं सकेंगे परंतु इस के बावजूद भी मोदी जीत गया और पुनः प्रधानमंत्री बन गया और अब 2024 तक मोदी प्रधानमंत्री रहेगा। मोदी का कहना बिल्कुल सत्य निकला कि वह 2024 तक भारत का प्रधानमंत्री रहेगा, ये इसलिए हो सका है, क्योंकि कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने कम्युनिष्ट पार्टी को खुद ही खत्म कर के आंतरिक समझौता कर रखा है, कि हम 10,10 साल तक वोटिंग मशीन से राज चलाते रहेंगे और बहुजन समाज को धोखा दे कर के सत्ता पर काबिज रहेंगे परंतु एक दिन चोरों की चोरी पकड़ी जाती है और पकड़ी गई जिस के परिणाम स्वरूप आज कांग्रेस पार्टी भी सत्ता प्राप्त करने के लिए तड़प रही है।
मूलनिवासी राजनीतिक दलों के नेता मनुवादी छल को समझ कर आपसी एकता नहीं बना रहे हैं और मूलनिवासी वोटों का विभाजन कर के मनुवादी सरकार बनाते आ रहे हैं, जब कि अल्प संख्यक मनुवादी दो मोर्चे यू पी ए और एन डी ए बना कर सता बाँट कर पन्द्रह वर्षों से कुशासन चला रहे हैं। मूलनिवासी राजनेताओं को तत्काल मूलनिवासी मोर्चा बना कर चुनाव लड़ना होगा अन्यथा मूलनिवासी गुलाम ही रहेंगे।
रामसिंह आदवंशी।
महासचिव,
वहुजन मुक्ति पार्टी, हिमाचल प्रदेश।
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