4 जनवरी।। मजदूरों का खून चूसने वाले देवता।।
मजदूरों का खून चूसने वाले देवता!
मजदूर कौन हैं:---- विश्व में दो प्रकार के लोग रहते हैं, एक परजीवी और दूसरे स्वजीवी। परजीवी वे आदमी हैं जो दूसरों की कमाई पर पलते हैं और स्वजीवी वे लोग होते हैं जो अपनी कमाई पर जीवन जीते हैं। जितने भी स्वजीवी लोग हैं, वे ही किसी देश की रीढ़ की हड्डी हैं, जिन को ही मजदूर कहते हैं मगर जो लोग परजीवी हैं अर्थात दूसरों की कमाई पर जीवन जीते हैं।
भारत के आदिवासी स्वजीवी थे:--- आदिकाल से भारतवर्ष में आदिवासी साम्राज्य चलता आया है, जिस के शासक जनता को टैक्स लगा कर अपना पेट नहीं भरते थे, वे खुद खेतीबाड़ी करते थे, पशु पालन करते थे और अपनी हक हलाल की कमाई खाते हुए राज करते थे, वे शासक स्वजीवी थे मगर जब से विदेशी यूरेशियन भारत में घुसे हैं, तब से उन्होंने भारत के मूलनिवासी लोगों को अपना गुलाम बनाया हुआ हैं और यही मूलनिवासी इन निठ्ठलों का पालन पोषण करते आए हैं, जिन को परजीवी कहा जाता है। स्वजीवी अपनी हक हलाल की कमाई खाते हैं और परजीवी स्वजीवियों का खून चूसते हैं।
मजदूर क्यों बना हुआ है:--- यूरेशियन आक्रांताओं ने भारत के मूलनिवासी लोगों की धन, धरती को छीन कर निहत्थे बना रखा हुआ है और अपनी सेवा करवा कर अपनी सेवा करने के लिए विवश कर रखा है इन्हीं गुलामों को मजदूर कहते हैं।
मजदूर के कार्य:----- जितने भी विकास कार्य किए जाते हैं, उन सभी कार्यों को यही मजदूर लोग करते हैं। खेतीबाड़ी, पशुपालन रचनात्मक कार्य और सभी प्रकार के निर्माण कार्य यही मजदूर ही करते हैं। उदाहरण के तौर पर, लोक निर्माण विभाग में कार्य केवल मजदूर ही हाथों से करता है मगर उस के ऊपर ठेकेदार, मुंशी, सुपरवाईजर, जूनियर इंजीनियर, एसडीओ, एक्शन, एस सी, चीफ इंजिनियर, इंजीनियर इन चीफ, अंडर सेक्ट्री, डिप्टी सेक्ट्री, जुआइंट सेक्ट्री, सेक्ट्री, लोक निर्माण मंत्री, मुख्यमन्त्री परजीवी लोग ही कार्य करते हैं अर्थात हाथ से काम करने वाले मजदूर और बाकी उस की कमाई पर अफसरशाही करने वाली सेना मजदूर का ही खून चूसते हैं।
मजदूर की मजदूरी:---अफसरशाही को बेतन मिलता हैं, हजारों, लाखों रुपए मासिक मगर मजदूर को केवल मात्र तीन सौ रुपए दैनिक जबकि मजदूर को सब के बराबर मजदूरी मिलनी चाहिए।
मजदूर की मजदूरी कम क्यों:---- मजदूर को मजदूरी इसलिए कम मिलती है ताकि वह केवल मजदूर ही बना रहे और खून चूसने वालों की चाकरी करता रहे अन्यथा वह भी पढ़ लिख गया तो वह भी अमीर बन कर अपने हक, अधिकारों के प्रति सोचना, समझना और बोलना शुरू कर देगा, फिर वे पशुओं की तरह परजीवियों का काम नहीं करेंगे। ।
मजदूर के साथ अन्याय, अत्याचार:---- परजीवी इतना काफिर, अत्याचारी, निर्दयी, क्रूर हैं कि वे जहाँ मजदूर से कठोर सेवा भी लेते हैं, वहाँ उस का मानसिक, शारीरिक शोषण तो करते हैं ही मगर उतपीडन भी करते हैं, जिन को शोषक परजीवी न्यायविद्ध भी न्याय नहीं देते।
मजदूर के प्रति सरकार का रवैया:---- जब सरकार ही, बेईमान खून चूसने वाले परजीवियों की बनती है, तो फिर वे मजदूर के प्रति हमदर्दी क्यों करें?
मजदूरों क्रांति करो:--- मजदूरो! अपने हकों, अधिकारों को समझो, पहचानो, और न्याय प्राप्त करने के लिए एकजुट हो जाओ। वन्य पशुओं, वन्य जीवों से कुछ सीखो, उन से प्रेरणा लो कि वे किस तरह अपना भरण पोषण करते हैं, यहाँ तक दस बीस कुत्ते भी इकठ्ठे हो कर बड़े बड़े शेरों, चीतों को मार कर अपनी भूख मिटा लेते हैं, इसलिए आप भी इकठ्ठे हो कर साहिब कांशी राम के बताए रास्ते पर चल कर एकता बना कर वहुजन राज स्थापित करो और अपनी गुलामी खत्म कर के गुरु रविदास जी महाराज के समाजवाद की स्थापना कर के समतामूलक् जीवन जिओ!
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