1937 के विधानसभाओं में मूलनिवासी विधायक।।
बिहार विधानसभा में मूलनिवासी विधायक
1 बाबू राम प्रसाद, 2 बाबू सुक्कारी पासी, 3 बाबू बूंदी पासी, 4 बाबू जगजीवन राम बीएससी, 5 बाबूराम बास्वान रविदास, 6बाबू बाल गोविंद भगत, 7बाबू शिवनंदन पासवान, 8 बाबू केश्वर पासवान, 9 बाबू सुंदर पासी, 10 रघुनंदन प्रसाद,11 बाबू बरसू चमार, 12 बाबू जगलाल चौधरी पासी, 13 मिस्टर कालू दुसाद, 14 मिस्टर जीतू राम, 15 मिस्टर गुल्लू धोपा।
उड़ीसा में जीते मूलनिवासी विधायक।।
बाबू कनाई समाल, बाबू बीरा किशोर बेहेरा। बाबू निधि दास, बाबू पुनिया नैको, बाबू विश्वास नाथ बेहेरा, बाबू बीसी बिभार।
मद्रास में जीते मूलनिवासी विधायक।
अदिमूलम जमेदार, बालाकृष्णा कुंडूमवन के, चैनगम पिल्लई ओ, चिन्नमुथु पी,दोरैकन्नू एम, गोविंदा दोस, गुरुवुलू एस, ईश्वरा के, कादिरप्पा डी, काननान ई, कोलानदावेलु नयनार, कृष्णा कुंडूमबान एस, कुलासे करण के, कुरमायया वी, लाकेसयुमानास्वामी पी, मनीककाम आर एस, मारीईम मीयूथु एम, मारी थाई आर, मिस्टर वी आई मुनीस्वामी पिल्लई (मनीस्टर), मिस्टर बी एस मूर्ति, नागप्पा एस, नागिआह एस, पेरीया स्वामी एम पी, एम सी राजा एम एल ए, रामालिंगम ए, साहा जानानदा स्वामी ए एस, शानमुगम के, शिवा शानमुघाम पिल्लई जे, मिस्टर पी सुववैया, मिस्टर जी वैंकानना।
अनुसूचित जाति विधानसभा विधायक केंद्रीय प्रॉविंसज 1937।।
एल एन हारदस, मिस्टर सीता राम लक्ष्मण पाटिल, मिस्टर दशरथ लक्ष्मण पाटिल, डी बी खोबरागडे (देवा जी भीवाजी) महाड, मिस्टर जी आर जंभोलकर, मिस्टर मतुआ चैतू मैहरा, जालम मोती, मिस्टर भागीरथ रखान चौधरी, मिस्टर रामेश्वर अग्निभोज, महंत पूर्ण दास सुधीन, महंत नैन दास राजाराम सतनामी, मिस्टर सुकृत दास, मिस्टर मुक्ताबन दास, अजबन दास, मिस्टर बाहोरिक लेडवा रविदास, मिस्टर पोसू सतनामी, मिस्टर राघोबा गंभीरा घोडी कोरे, गणेश अकाजी गवई, मिस्टर केशो जानू जी, मिस्टर दौलत किशन भगत, मिस्टर लक्ष्मण शरावन भाटकर।
मार्च 1937 में मूलनिवासी विधायक यूनाइटेड प्रोविंसेस इन सोसाइटी
भवानी, भीमसेन, राय साहेब विभूति सिंह, बिहारीलाल, चेतराम, दयालदास, गजाधर प्रसाद, हरि, हरिप्रसाद टम्टा, हरनाथ प्रसाद, लखन दास जाटव, लोटन, डॉक्टर मानिक चंद आगरा, मिजाजी लाल, नरैणदास, पलटू राम, प्रागी लाल, पूर्णमासी, राम प्रसाद टामटा, विश्वनाथ प्रसाद।
यही वह ऐतिहासिक स्वर्ण युग था, जिस में स्वामी अछूतानंद जी महाराज, साहिबे कलाम गद्दरी बाबा मंगू राम मुगोवालिया जी के नेतृत्व में सामाजिक लड़ाई लड़ कर मूलनिवासियों को मौलिक अधिकार प्राप्त हुए थे जिसके परिणाम स्वरूप जब भारत के 85% मूलनिवासियों में से जो विधायक चुने गए थे, वे स्वतंत्रतापूर्वक अपने समाज की समस्याओं को विधानसभा में उठाया करते थे मगर वर्तमान सांसद और विधायक मनुवादी राजनीतिक दलों के गुलाम बन कर के केवल और केवल 85% मूलनिवासियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और अपने परिवार का पालन करते हैं, जिस से निजात पाने के लिए 85% मूलनिवासियों को बहुजन मुक्ति पार्टी को ही जीता कर के बहुजन समाज की स्वतंत्र सरकार बनानी होगी, तभी मूलनिवासियों का बहुमुखी विकास होगा, नहीं तो मनुवादियों के अत्याचार और गुलामी कभी भी समाप्त नहीं होंगे।
रामसिंह आदवंशी।
महासचिव,
बहुजन मुक्ति पार्टी, हिमाचल प्रदेश।
Comments
Post a Comment