24 जनवरी की यूक्रेन जंग की विस्मयकारी घटना

24 जनवरी की युक्रेन जंग की विस्मयकारी घटना!!! राजाओं को सत्ता इसलिए सौंपी जाती है, कि वे जनता और उस के जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित कर के, उन के पालन पोषण का बन्दोबस्त करे मगर ये लोग पावर मिलने पर इतने अहंकारी और अंधे हो जाते हैं, कि जनता को ही जनता से मरवाना शुरू कर देते हैं। अंतर्देशीय युद्ध तो असंख्य हो चुके हैं मगर दो विश्व युद्धों की रक्त रंजित दास्तानें कभी नहीं भूलती, जिन में हिटलर आदि तानाशाहों का इतिहास मानव संहार का प्रमाण है। ऐसा ही एक और नया इतिहास 24 फरवरी 2022 को रूस और युक्रेन के युद्ध के शंखनाद से लिखा जाने लगा है, जिस का क्या अंत होगा, ये भविष्य के गर्भ में है। 29 जनवरी को युद्ध का 341वां दिन:--- नाटो देशों ने अपनी अपनी सर्वोच्चता बर्करार रखने के लिए और अपने प्रतिद्वन्दि रूस को नीचा दिखाने के लिए, उस के अलग हुए भाई युक्रेन के सनकी राष्ट्रपति जलेंसकी को मोहरा बना कर रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ भिड़ा दिया गया है। चौबीस फरवरी 2022 से दोनों देशों के राष्ट्रपति अपने देशों को युद्ध की आग में झोंक कर अपनी ही बर्बादी करते आ रहे हैं। रूस की राजधानी कीव पर युद्ध की तैयारी:---अब लगता है नाटो देश, यूक्रेन को तबाह कर के ही दम लेंगे क्योंकि अमेरिका के नेतृत्व में नाटो रसिया को वर्ल्ड वार करने के लिए उकसा रहा है जिस के परिणामस्वरूप रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी अपने देश की अखंडता को बहाल करने के लिए किसी भी सीमा तक जाने की तैयारी में लगे हुए हैं और इसी कड़ी में वे यूक्रेन की राजधानी पर आक्रमण करने की भी बहुत बड़ी तैयारी कर रहे हैं, जिस के लक्षण प्रकृति के प्राणी और जीव जंतु भी दिखा रहे हैं। कीव के आसमान पर उड़े हजारों कौए:--- चौबीस जनवरी को कीव के ऊपर आसमान में उड़ते हुए असंख्य कौवे यह दिखा रहे थे, कि यूक्रेन की राजधानी कीव के ऊपर बुरे दिन आने वाले हैं, इसी कारण ये प्रकृति के मूक जीव मानव जाति के भविष्य के लिए चिंतित नजर आ रहे हैं। कीव के ऊपर उड़ते कौओं के प्रति चिंतन:--- भीषण युद्ध की विभीशिका में जलने वाले यूक्रेन देश की राजधानी कीव के ऊपर से उड़ने वाले कौओं को देख कर के विश्व के बुद्धिजीवी अनुभव कर रहे हैं, कि इस प्रकार पक्षियों का उड़ना विश्व युद्ध का द्योतक नजर आ रहा है क्योंकि जब कोई अनहोनी घटना घटना होती है तो पक्षियों और जानवरों के विस्मयकारी हलचलें शुरू हो जाती हैं। आने वाली मुशीबतों को पक्षी भांप लेते:--जब चूहे, कुत्ते, बिल्ले, पशु और पक्षी रोना-धोना, दौड़ना और चिल्लाना शुरू करते हैं, तब बुरे समय के आगमन के संकेत होते हैं क्योंकि ये जीव अनहोनी घटना के बारे में समझ जाते हैं, तभी अजीव, अजीव अपशगुन करने लग पड़ते हैं, लगता है कि इसीलिए ही युक्रेन की राजधानी के ऊपर से असंख्य कौए उड़ रहे थे। जमीन और आकाश में हलचल:--- यूक्रेन और रूस की चल रही लड़ाई जमीन और अकाश में हलचल पैदा कर रही है, इतने लंबे समय से चली आ रही लड़ाई केवल मानव जाति की ही नहीं अपितु संपूर्ण जीव जगत के विनाश का संकेत नजर आ रहा है जिस को नाटो देशों के शासक समझ नहीं पा रहे हैं और अपनी हेकड़ी दिखाते हुए निरीह युवाओं को मौत के घाट उतारने के लिए अपनी राक्षस प्रवृत्ति को दर्शा रहे हैं मगर रणभूमि में केवल और केवल गरीब बच्चे ही शहीद हो रहे हैं। इन बच्चों में कोई भी राजनेताओं और अफसरों का वच्चा शहीद नहीं हो रहा है, जिस कारण इन बेदर्द लोगों के दिलों पर कोई घाव नहीं पड़ रहा है। अरबों खरबों का अम्युनिशन जला कर युवाओं को बड़ी बेरहमी से मरवाया जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति की ये बात तो समझ आ रही है कि वह अपने पूर्व राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोब की गलती को सुधारने और अपने टूटे रूस को अखण्ड करने के लिए युद्ध लड़ रहा है मगर अमेरिका और नाटो देश युद्ध का तमासा क्यों देख रहे हैं, इस पर हैरानी हो रही है। प्रेस समझा रही युद्ध को हल्के में मत लो:-- रूस और युक्रेन के युद्ध को अमेरिका और नाटो देश अपनी महत्वाकांक्षा के लिए अपने हत्थियार सप्लाई कर के लम्बा खींच रहे हैं, जिसे देख कर संसार के बुद्धिजीवी, जीनियस लोग और विश्व की प्रैस यूक्रेन, रूस और नाटो देशों को संकेत दे रहे हैं, कि युद्ध को हल्के में नहीं लेना चाहिए, यदि कहीं इस युद्ध ने विराट रूप धारण कर लिया और विश्वयुद्ध में परिवर्तित हो गया तो मानवता का विनाश तय है। परमाणु ऊर्जा, सम्पूर्ण प्राणी जगत का नामोनिशान मिटा देगी। धरती के ऊपर केवल मात्र मिट्टी, पत्थर ही रह जाएंगे, यहां तक कि सागरों का पानी भी सूख जाएगा। यूक्रेन और रूस के जॉनमाल का विनाश, सारे विश्व की तवाही की कुंडली लिख रहा है। विश्व के समस्त शासनाध्यक्ष रूस और युक्रेन के खूनी तांडव नृत्य देख रहे हैं मगर ये बेदर्द शासक विश्व के विनाश के लक्षण देख कर भी अंधाधुंध युद्ध को जारी रखने के लिए यूक्रेन को धड़ाधड़ सहायता देते जा रहे हैं और यूक्रेन का धृतराष्ट्र राष्ट्रपति भी अंधाधुंध अपने सैनिकों को शहीद करवा कर रूस और युक्रेन को बर्बाद कर के नाटो देशों को खुश करता जा रहा है। यदि अमेरिका अपनी महत्वाकांक्षा और दादागिरी को त्याग कर युवाओं के बह रहे खून को देख कर पिघल कर, युक्रेन की सहायता बंद कर दे तो युद्ध तत्काल बंद हो सकता है मगर सारे विश्व के शासनाध्यक्ष भी भीष्मपितामाह बन कर मौन बैठे हुए हैं, जिस का परिणाम धरती पर सर्वनाश ही होगा। विश्व के राष्ट्राध्यक्ष रूस और यूक्रेन की जंग को रोकने के लिए आज तक इकट्ठा नहीं हो सके मगर मूक, बधिर और आसमान में विचरण करने वाले पक्षी इकट्ठा हो गए और कीव के ऊपर जोरदार प्रदर्शन कर के अपनी एकता दिखाते हुए विश्व के बादशाहों को बता दिया, कि हे राष्ट्राध्यक्षों! आप इंसान नहीं हो, हैवान हो! आप अपने ही बच्चों को मरवा रहे हो मगर हम इन को बचाने के लिए मैदान में आ गए हैं। रामसिंह आदवंशी। हिमाचल प्रदेश।

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