17जनवरी।। बहुजना! वर्तमान सांसद विधायक आपकी प्रतिनिधि नहीं है।

वहुजनो! वर्तमान सांसद, विधायक आप के प्रतिनिधि नहीं। गद्दरी बाबा मंगू राम मुगोवालिया ने सन 1924 ईस्वी में भारत के गुलामों के गुलाम मूलनिवासियों को आजाद करवाने के लिए अंग्रेजों को कई बार मेमोरेंडम दिए थे कि हम दोहरी गुलामी में जिंदगी जी रहे हैं। पहली बार जब लार्ड साईमन कमीशन भारत में आया था, तो उन्होंने लाहौर में मेमोरेंडम सौंपते हुए कहा था कि हमें जमीन और जायादात रखने का कोई अधिकार नहीं है। नौकरी करने का कोई अधिकार नहीं है, यहां तक कि अछूतों को पढ़ने, लिखने और बोलने की भी आजादी नहीं है। जिस रिपोर्ट को लार्ड साईमन ने गुलाम भारत के शासक वर्ग ब्रिटिश सरकार को सौंप कर, गद्दरी बाबा मंगू राम मुगोवालिया जी की मांगों को ब्रिटिश प्रधानमंत्री लॉर्ड मैंकनाडल्ड को प्रस्तुत किया था, जिस के परिणामस्वरूप ही, उस मांग पत्र की सचाई को जानने के लिए दूसरा कमीशन लार्ड लोथियन की अध्यक्षता में सन 1932 ईस्वी में भारत आया था, जिस के सामने फिर गद्दरी बाबा मंगू राम गोवालिया ने अपनी दोहरी गुलामी के प्रमाण प्रस्तुत करते हुए सिद्ध किया था, कि हम गुलामों के गुलाम हैं, इसीलिए लंबी लड़ाई लड़ने के बाद भारत के मूलनिवासियों को नौकरियों में आरक्षण की सुविधा मिली थी, जिस के परिणाम स्वरूप 1937 के विधानसभा चुनावों में भारत के केवल अछूतों को राजनीति और सरकारी सेवाओं में आरक्षण लागू हुआ था। प्रथम विधानसभा चुनाव में आरक्षण लागू हुआ:-- सन 1936-37 के विधानसभा चुनावों में भारत में अनेकों विधायक आरक्षित सीटों से चुने गए थे मगर ये विधायक अपने अपने मूलनिवासी संगठनों के टिकटों पर जीते थे, जिस प्रकार आदि धर्म मंडल के नौ विधायक लायलपुर से लेकर दिल्ली तक जीते थे। महाराष्ट्र में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के अनुसूचित जाति फेडरेशन और बिहार में बाबू जगजीवन राम जी के संगठन के लोग विधायक बने थे। इन विधायकों को किसी भी मनुवादी राजनीतिक दल ने टिकट नहीं दिए थे, जिस के परिणाम स्वरूप विधायक निसंकोच और निडर हो कर भारत के मूलनिवासियों का प्रतिनिधित्व करते हुए विधानसभा में अपनी मांगों को पूरे जोर-शोर के साथ प्रस्तुत करते थे। मूलनिवासियों के दुश्मन सरदार पटेल:---ज्यों ही स्वतंत्रता मिली त्यों ही मूलनिवासियों के दुश्मन पिछड़ी जाति के नेता सरदार वल्लभभाई पटेल ने, महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू से मिल कर के गद्दरी बाबा मंगू राम मुगोवालिया ने जो विशेष अधिकार प्राप्त किए थे, उन अधिकारों को मनुवाद के पास गिरवी रख दिया और मंगू राम मुगोवालिया, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और बाबू जगजीवन राम के निडर योद्धा विधायकों को कांग्रेस में शामिल करवा कर के इन विधायकों को मनुवादियों के गुलाम बना कर के भारत के मूलनिवासियों के ऊपर दुबारा दोहरी गुलामी ठोक दी गई, जिस के परिणाम स्वरूप आज जो विधायक और सांसद चुने जाते हैं, वे किसी अनुसूचित जाति, जन जाति, पिछड़ी जाति, आदिवासी और मूलनिवासी संगठन द्वारा स्पॉन्सर नहीं किए जाते हैं अपितु जो जो मूलनिवासी अछूत जातियों में से कांग्रेस, भाजपा दलों की जी हुजूरी करते हैं, उन की सभाओं, बैठकों, मिटिंगों के लिए दरियां बिछाते हैं, इन दलों के कार्यालयों में झाड़ू मारते हैं, उन के आदेश के अनुसार निम्न से निम्न स्तर के काम करते हैं, उन्हीं अछूत मूलनिवासियों को टिकट देकर के अपनी नीतियों के अनुसार उन से समर्थन ले कर के मनुवादी सरकारें चलाई जा रही हैं। यह मनुवादियों द्वारा स्पॉन्सर आरक्षित सीटों से जीतने वाले सांसद और विधायक जिन मूलनिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा और देखभाल के लिए विधानसभाओं और संसद में भेजे जाते हैं, उन के लिए ये गुलाम बादशाह कोई आवाज बुलंद नहीं करते हैं। उन के लिए कोई न्याय संगत काम नहीं करवाते हैं, यहां तक इन लोगों के कहने से इन के अपने काम भी नहीं किए जाते हैं। केवल राष्ट्रपति बनाए जाते प्रधानमन्त्री नहीं:-- मनुवादी दलों के बफादारों को राष्ट्रपति अवश्य बना दिया जाता ताकि वे डर कर मूलनिवासी लोगों को खिलाफ बनाए जाने वाले कानूनों और आदेशों पर चुपचाप हस्ताक्षर कर दें मगर प्रधानमन्त्री कभी नहीं बनाते। अजेय सांसद स्वर्गीय जगजीवन राम को कांग्रेस ने प्रधानमन्त्री इसलिए नहीं बनाया क्योंकि वह मनुवादी नहीं थे और अंत में उन्हें ये कहना पड़ा था कि " इस कम्बख्त मुलख में चमार कभी प्रधानमन्त्री नहीं बन सकता"। मूलनिवासियों को कभी भी प्रधानमंत्री, सेनापति, मुख्य न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं बनाया जाता है। साहिब कांशी राम का वहुजन आंदोलन:----साहेब कांशी राम ने जब वहुजन आंदोलन शुरू किया तब उन्होंने कहा था, " भारत के अछूत समाज में से किसी को आज तक प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्य सचिव, मुख्य न्यायाधीश, यहां तक की हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज तक नियुक्त नहीं किए जाते, किसी भी विधायक, सांसद को विदेश मंत्री वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, वित मंत्री, गृहमन्त्री आदि महत्वपूर्ण मंत्रालय नहीं दिए जाते हैं। जमीन सरकारी है मगर बेकार पड़ी हुई है, कृषि करने वाले लोग केवल मात्र अछूत ही हैं, जिन को कांग्रेस ने भूमिहीन रख कर के भूमालिकों का गुलाम बनाया हुआ है, इसलिए उन्होंने कहा था, "जो जमीन सरकारी है वह हमारी है" इसी के परिणाम स्वरूप जब कांग्रेस सरकार ने अपना सारा वोटबैंक खिसकता हुआ देखा तो उन्होंने उबड़-खाबड़, बेकार बन्जर पड़ी जमीन अछूत जातियों को बांटने का काम किया था। साहब कांशीराम के रहस्य उद्घाटन के बाद ही भारत की जुडिशरी में बालाकृष्ण को जस्टिस बनाया गया और बाद में अनुसूचित जातियों में से प्रथम चीफ जस्टिस बनाया गया, उस के बाद ही कई राष्ट्रपति भी बनाए गए मगर आज तक किसी को भी प्राइम मिनिस्टर नहीं बनाया गया, जब कि केवल प्रधानमंत्री ही सर्वोच्च शक्तियों वाला विशेष व्यक्ति होता है। मनुवादी प्रधानमंत्री कभी भी समतामूलक समाज बनाने के लिए समाजवाद की स्थापना नहीं करते हैं और गरीबों को गरीब बना करके रखते आ रहे हैं। रामसिंह आदवंशी। प्रदेश महासचिव, वहुजन मुक्ति पार्टी, हिमाचल प्रदेश।

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