Posts

Showing posts from October, 2022

चँवर वंश का अंतिम योद्धा।। भाग 9।।

।।चँवर वंश का अंतिम वीर योद्धा भाग ।।9।। बादशाह सिकंदर लोधी गुरु रविदास महाराज को राज पाठ और पीर, पैगंबर का दर्जा देता रहा मगर गुरु रविदास जी महाराज ने उस के दोनों ही पदों को ठुकरा दिया, उन्होंने यह साफ  कह दिया कि:---- आद से प्रगट भयो जा कोउ ना कु अंत। आद धर्म रविदास का जानै बिरला संत।। मैं आदि धर्म को छोड़ कर के इस्लाम धर्म को कतई स्वीकार नहीं कर सकता हूँ, तू चाहे मेरा सिर कलम दे, यह सुन कर बादशाह सिकंदर लोधी वहुत परेशान हो गया था। बादशाह सिकन्दर लोधी जर्जर:--- आज तक बादशाह सिकन्दर लोधी ने तोपों और तलवारों से युद्ध जीते थे मगर आज वह गुरु रविदास जी महाराज के अभेद्य शब्द रूपी मिसाइलों से बुरी तरह जर्जर और घायल हो कर टूट चुका था। गुरु रविदास जी बादशाह सिकंदर लोदी की दयनीय स्थिति को देखते हुए, फिर प्रहारों के ऊपर प्रहार करते ही गए और कहते हैं कि दींन और मजहब दोनों ही महामूर्ख मींडे हैं, जो आकारण आपस में एक दूसरे के साथ लड़भिड़ कर अपना खून बहाते हैं, फिर भी इन को कोई भी वीर, वहादुर, शूरवीर नहीं कहता है। बुद्धिमान लोग दोनों को ही कानों से पकड़ कर के दूर-दूर ले जाते हैं तभी इन का झगड़ा ख...

चँवर वंश का अंतिम योद्धा।। भाग 8।।

     ।। चंवर वंश का अंतिम योद्धा भाग 8।।                बादशाह सिकन्दर लोधी, गुरु रविदास महाराज को पंजाब का सूबेदार बनाने और इस्लाम धर्म का सर्वोच्च औलिया, पीर, पैगम्बर बनाए जाने के लिए घात लगा कर अर्ज करता रहा। उस ने दोनों बड़े बड़े पदों का लालच दे कर फुसलाने की खूब कोशिश की, मगर गुरु जी ने उस की फितरत को समझ कर कड़े से कड़ा और करारा जबाब दे दिया, जिस से बादशाह सिकन्दर लोधी हिल और बौखला गया था मगर गुरु जी उस को अच्छा इंसान बनने के लिए प्रवचन भी देते ही गए और वे फरमाते हैं, हे बादशाह! मनुष्य चाहे कितनी ही फितरत करे, कितनी ही चालाकियाँ करे, मगर होता वही है जो आदपुरुष को मन्जूर होता है। जिसे ईश्वर मान सम्मान बख्श देता है, उस से कौन किसी को दूर कर सकता है अर्थात आदि पुरुष जिस व्यक्ति को स्टार लगाता है उसे कोई भी छीन नहीं सकता, यदि भगवान किसी से भीख मंगवाना चाहे तो कोई भी उस काम को रोक नहीं सकता। जिस प्रकार ईश्वर रखना चाहे वैसे ही प्राणी को रहना पड़ता है और रहना भी चाहिए। इसीलिए सम्पूर्ण भगवान पर विश्वास कर के जीवन में, प्रत्येक स्थिति में मस्त हाथी की तरह चलते रहना चाहिए।               ...

चंवर वंश का अंतिम योद्धा भाग सात।

चमार वंश का अंतिम योद्धा भाग सात।।    बादशाह सिकन्दर लोधी, आदि धर्म के ध्वज वाहक सतगुरु रविदास जी महाराज की अथाह स्तुति करता ही जा रहा था। वह सोच रहा था कि इस फकीर को मैं लालच देकर और अपनी मिठी मिठी बातों में उलझा कर, फुसला कर, मुसलमान बना कर इस्लाम धर्म के प्रचार प्रसार के लिए तैयार कर लूंगा, जब गुरु रविदास जी महाराज लोधी की बातों में नहीं आए, तब फिर भी उन को अपना बनाने के लिए उन के गले में अपना पल्लू डाल कर कहता है कि, हे महाराज! मुझे अपने चरण कमलों में शरण दे कर मेरी इल्तजा स्वीकार कर के मेरा मान रख लो। हम ने आप को सर्वोच्च, परिपूर्ण गुरु मान लिया है, हमें अपने चरण कमलों में लगा लो। संसार के सभी मुसलमान मेरे मुरीद हो चुके हैं, वे भी सभी आप के अनुचर बन जाएंगे, इसलिए महाराज आप तत्काल इस्लाम धर्म को स्वीकार कर लो।                         ।।शब्द।। श्री गुरु रविदास अगे अर्ज किती शाह सिकंदर पलड़ा गल पाईके ते।। मेरी अर्ज नूं अज कबूल करना रखो सवजा कदमी जाई के ते।। असीं मन लिया तुहानू पीर डाडा सानू रखना कदमी लाईके ते।। सभी मुसलम मम मुरीद होई मन लऊ इसलाम नूं धाईके ते।। क्रांति वीर योद्धा का...

चंवर वंश का इतिहास।। भाग 6।।

   ।।चंवर वंश का इतिहास।।भाग 6।। सिकंदर लोदी सदना कसाई की आश्चर्यजनक बातों को सुन कर के आपे से बाहर हो गया और क्रोधित हो कर के कहता है, कि मैं ऐसे व्यक्ति को एक क्षण के लिए भी संसार में जिंदा नहीं छोडूंगा। बादशाह कहता है, कि हे सदनिया! तू उस व्यक्ति की पहचान के बारे में बता, कि उस की क्या जात और औकात है? जो मोहम्मद से भी बड़ा नूर बन बैठा है। मैं अभी अपने अहदियों को भेज कर, उठा कर मंगवा लूंगा और मनसूर की तरह सूली पर लटका दूंगा।                        ।।स्वामी जी शब्द।। सुनी गल असचरज दी पातशाह ने आया दिल दे विच मगरूर भारा।। ऐसे बसर नूं छोडू ना एक खिंन भी बीच खलकत जमिआ शुर भारा।। की जात ते की ऊकात उसदी बण बैठा मुहम्मदों नूर भारा।। हुणे आहदियां भेज के सद लैसां चकूँ सूली जिवें मनसूर भारा।।              ।।पातशाह दा खत लिखना।। मन में छल कपट रखते हुए बादशाह सिकंदर लोदी ने गुरु रविदास जी महाराज को पत्र खुद लिखना शुरू कर दिया और उस में लिखता है कि:------                ।।शब्द।। पर्चा लिखदा पातशाह घात रख के मूहों दारूद सलाम लखांवदा ऐ।। मुख मोमन दिल में तुर्क बसिआ कूड़ बोल फफड़े करांवदा ऐ।। महम्मद...

जलियांवाला बाग हत्याकांड

।।जलियांवाला चमार जाति की हत्या।। भारत के  मनुवादियों ने तो जाति पाती का ठेका ले रखा है मगर पंजाब के जाटों ने भी ब्राह्मणों, राजपूतों और वानियों की नकल कर के जातीय व्यवस्था को खूब मजबूती से पक्का किया हुआ है। प्रथम विश्व युद्ध 28-07-1914 से ले कर के 11-11-1918 तक चला था, जिस में चमार रेजिमेंट ने भारत का नाम विश्व में रौशन किया था। सुप्रसिद्ध पंजाबी लेखक प्रोफेसर गुरनाम सिंह जी के अनुसार प्रथम विश्वयुद्ध में (चमार) चंवर वंशी योद्धाओं ने 1918 में सब से अधिक वीरता के जौहर दिखाए थे, जिस को देख कर उन के पैरों तले मिट्टी खिसक गई थी। उस समय ये मनुवादी कायर कहीं नजर नहीं आते थे। इस विश्व युद्ध में जो चमार रणबांकुरे सकुशल विश्व युद्ध में से सुरक्षित बच कर पंजाब वापस आ गए थे, वे रब का शुक्रिया मनाने के लिए 1919 में गुरुओं के दरबार साहब अमृतसर में मत्था टेकने के लिए गये थे मगर अछूत, चँवर वंश के वीर सपूतों को जाट सिखों ने स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने ही नहीं दिया था। इन लोगों ने अछूत चंवर वंश के वीर सपूतों का केवल अपमान ही नहीं किया था अपितु जाट सिखों ने इन वीर जांवाज सपूतों को गालियाँ भी दी थी। प...

वर वंश का अंतिम योद्धा भाग पांच।।

चंवर वंश का इतिहास।।भाग 5।। गुरु रविदास जी महाराज विश्व के पहले ऐसे महान क्रांतिकारी योद्धा हुए हैं, जो फरमाते हैं कि------ सतिसंगति मिली रहियो माधो जस मधुपमखीरा अर्थात हे भाईयो! अच्छी संगत बना कर रहना चाहिए, जिस प्रकार मधुमक्खियां रहती हैं, ये मधुमक्खियां शहद भी देती हैं मगर उन के छत्ते को कोई तवाह करे, पत्थर मारे तो वे खुद भी शहीद होती हैं और पत्थर मारने वाले दुश्मन को भी मार देती हैं, इसीलिए गुरु जी खून का बदला खून से लेने का उपदेश देते हैं, क्योंकि जब तक कातिल को उस के कतल अर्थात खून करने की सजा नहीं दी जाती है, तब तक वह सुधर ही नहीं पता है। बादशाह सिकंदर लोधी के हाथ खून से लथपथ हो चुके थे, जिस के कारण वह आदमखोर बन चुका था, ऐसे क्रूर, कातिल आदमखोर को बंदा बनाने के लिए ही उन्होंने उस के राजदूत सदना कसाई को बुरी तरह मानसिक रूप से तोड़ा और उस के माध्यम से बादशाह सिकन्दर लोधी को भी जलील किया, जिस के कारण वह उन का मुरीद बन गया था। पराजित सदना कसाई:--- पराजित सदना कसाई गुरु जी के प्रवचन से बुरी तरह विक्षिप्त हो चुका था और निराश, हताश हो कर बादशाह सिकन्दर लोधी के पास दिल्ली पहुँच गया, जा...

चंवर वंश के अंतिम योद्धा।। भाग 4।।

चंवर वंश का इतिहास भाग 2

     ।।चंवर वंश इतिहास भाग दो।। मुस्लिम शासकों के खून खराबे के बाद भारत के राजपूत राजाओं, महाराजाओं ने जनता की रक्षा करने के लिए अपने हाथ खड़े कर दिए थे, खुद राजपूत राजाओं ने मुस्लिम शासकों के सामने हथियार डाल दिए थे और अपने प्राणों की रक्षा करने के लिए कुछ राजपूत राजाओं ने अपनी मान मर्यादा को खत्म करते हुए अपनी बेटियों को भी मुस्लिम शासकों को नजराना कर दिया था, जिस का साक्षात उदाहरण जोधाबाई है। ऐसी परिस्थितियां पैदा हो गई थी, कि भारत की जनता की रक्षा करने वाला कोई वीर सपूत नहीं बचा था, तब ऐसी परिस्थितियों में तत्कालीन केवल मूलनिवासी (अछूत) गुरुओं ने मोर्चा संभाला था, जिस का नेतृत्व केवल गुरुओं के गुरु, संतों में शिरोमणि संत गुरु रविदास जी महाराज ने किया था। गुरु रविदास जी महाराज ने अत्याचारी खूनी, क्रूर, कातिल और निरंकुश बादशाह सिकंदर लोदी का डट कर सामना किया था। सिकंदर लोदी को कड़ी टक्कर देते हुए उन्होंने अपनी वीरता का प्रदर्शन किया था, जिस का वर्णन स्वामी ईशर दास जी महाराज, *गुरु आदि प्रकाश* ग्रंथ में करते हुए फरमाते हैं कि:--- दोहा सिकंदर लोधी पातशाह हुकूमत उसले जान। दीन इस्लाम दे ...

नाग वंश का उदय पतन।।

आदि पुरुष से चली आ रही मानव सभ्यता का विस्तार अनादि काल से ही चलता आ रहा है, जिस के प्रमाण धरती के ऊपर देखे जा सकते हैं। धरती के सभी प्रखंडों के ऊपर जितने भी मानव जाति के कबीले रहा करते थे, उन सभी की पहचान अलग-अलग बनी हुई है। सभी देशों की मनुष्य जाति का अपना अपना रंग, स्वरूप, स्वभाव, भाषा, रहन सहन, वेशभूषा, व्यवहार, रीति रिवाज, खानपान सभी भिन्न भिन्न प्रकार के हैं। इन्हीं कबीलों को बाद में वंश कहा गया है, जिन में नागवंशी लोग विश्व के सभी देशों में रह रहे हैं। भारतीय मूलनिवासी:---- युरेशियन लोगों ने भारतीय मूलनिवासी लोगों में फूट डाल कर राज करने का षड्यंत्र रचा हुआ है, जिस के कारण इन के लेखकों ने भी ऐसा षड्यंत्र रचा हुआ है कि भारत के मूलनिवासियों का इतिहास तोड़ मरोड़ करके लिखा हुआ है और आज भी इसी तरह लिख रहे हैं परंतु भारतीयों के रूप, रंग और स्वभाव को यह लोग बदल नहीं सके हैं। इन लोगों ने भारतीय मूलनिवासी जनता को भ्रमित करने के लिए उन के नाम बदल कर रख दिए गए हैं। आदिकालीन नागवंश :---- आदि काल से ही नागवंश भारत का सर्व श्रेष्ठ वंश रहा है। सम्राट सिद्ध चानो के दरबारी नाग बलि हुए हैं। सम्...

नागवंशी शासकों को विषैले नाग लिखा गया

।।नाग शासकों को विषैले नाग कहा गया है।। बड़ी हैरानी की बात है कि हिंदुओं के देवी देवता गले में सांप डाल कर के घूमते हैं और उनके सिर के ऊपर छत्र के रूप में खड़े हो कर उन्हें दुश्मनों और सर्दी, गर्मी, वर्षा से रक्षा भी करते हैं, यदि तर्कपूर्ण बुद्धि और दिमाग से काम लिया जाए, तो ऐसा लिखना और कहना महामूर्खों का काम लगता है क्योंकि आज भी देखने में आता है कि यदि सांप के मुँह से नकली वायु किसी को लग जाए तो वह मर जाता है फिर अगर कोई मनुष्य सांपों को गले में डाल कर रहता होता तो क्या वह जिंदा रह सकता था? आज भी कई सपेरे गले में सांपों को डाल कर घूमते फिरते, मगर वे केवल उन्हीं साँपों को पिटारे में बंद कर के घूमते हैं, जिन के विषैले दांत निकाल कर विष खत्म कर दिया जाता है। नाग शासकों को सांप लिखा गया:---हिंदुओं ने नाग शासकों को सांप का पर्यायवाची सिद्ध कर के साहित्य में दर्ज किया हुआ है। यह घृणित कार्य मूलनिवासी शासक नाग वंश को कलंकित करने का केवल निंदनीय षड्यंत्र मात्र है क्योंकि सांप जाति धरती में बने हुए बिलों के बीच रहती है, इसलिए इन का ना कोई घर होता है, ना कोई ठिकाना होता है और ना कोई इतिहास ...

नागवंश का प्रादुर्भाव

नाग वंश का प्रादुर्भाव:---प्रतापी नाग वंश का प्रादुर्भाव आदि पुरुष के बाद जुगाद के समय हुआ था, क्योंकि इसी कड़ी में सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज हुए हैं, जिन के मंत्रिमंडल में नाग बलि का महत्वपूर्ण स्थान था, जिस का इतिहास यूरेशियन आर्य ने हमेशा हमेशा के लिए मिटा दिया था और नाग बलि को संदेहास्पद बनाने के लिए उन के नाम को बदल कर नांगा बलि नाम साहित्य में लिख डाला है, ताकि उन्हें संदेहास्पद बना कर, मूलनिवासी लोग उन के इतिहास के बारे में जान ही ना सकें, परंतु नाग बलि के बारे में सम्राट सिद्ध चानो महाराज के मंत्रों से पूर्ण जानकारी मिल रही है, कि नाग बलि का संबंध अनादि काल से है। जब कि उस समय यूरेशियन आर्य भारतवर्ष में घुसे ही नहीं थे और ना ही भारत को अपना गुलाम बनाया था, फिर भी नाग बलि का संबंध विष्णु से जोड़ दिया गया है, जब कि विष्णु एंड कंपनी ने मूलनिवासियों को जड़ से उखाड़ने का कार्य किया है। नाग वंश का प्रथम राजा नाग बलि:--- नाग वंश का संबंध सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज के साथ था, नाग बलि उन के श्रेष्ठ दरबारियों में से एक थे, इस से यह स्पष्ट होता है कि नाग वंश का शुभारंभ नाग बलि से ही ह...

यशस्वी नाग वंश।।

        ।।यशस्वी नाग साम्राज्य।। मैंने अपनी ऐतिहासिक पुस्तक *सम्राट सिद्ध चानो और लोना उर्फ कामाख्या देवी* में आद पुरुष से चली आ रही, मूलनिवासी वंशावली के बारे में विस्तार से लिखा है, जिस में आदिकाल से चली आठवीं पीढ़ी में अवतरित सम्राट सिद्ध चानो जी के बारे में विस्तार से वर्णन किया है। उन के दरबारियों में लाल बली, भैरव बली, नाग बलि, मणिमहेश राजा उर्फ पहाड़िया बलि, होला बलि, डाऊ बली, दाई बली और भंगी बली का जिक्र किया है। वास्तव में मुझे इन्हीं महाबलीयों का कुछ इतिहास मिला है, जिस को मैंने उन के मंत्रों के आधार पर प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है मगर इस के अतिरिक्त और भी अन्य महा बलि हुए हैं, जो खोज का विषय है, क्योंकि तत्कालीन इतिहास यूरेशियन आर्यों ने समूल नष्ट कर दिया है, जिस के कारण सच्चाई सामने नहीं आ पा रही है, मगर जो जो तत्कालीन भाषा, सभ्यता, संस्कृति, स्थानीय लोक गाथाएं, किंबदंतियाँ, दंत कथाएं चली आ रही हैं, उन को यूरेशियन लोग आज तक मिटा नहीं सके हैं और उन्हीं के आधार पर आज हम प्राचीन इतिहास की खोज करने में लगे हुए हैं, इन्हीं प्रमाणों का जिक्र हम उन के साबर मंत्...

नाग वंश

महाभारत काल तक नागवंश:--- आदिकाल से लेकर महाभारत काल तक नागवंश अपनी चरम सीमा पर था मगर भारत में आए विदेशी यूरेशियन आर्यों को नागवंशियों का सुशासन भयभीत करता था और सताता था। नागवंशी अपने मूलनिवासी भारतीयों के जान माल और सुरक्षा में यूरेशियन लोगों को आड़े नहीं आने देते थे। यूरेशियन लोगों ने भारत के भोले भाले लोगों को फूट डालो राज करो, छल बल, और नारी जाति का दुरूपयोग कर के भारत में पैर पसारे थे। भारत के वीर शासकों के इतिहास को खत्म कर के, मूलनिवासी वीरों को अपमानित करने का काम करना इन लोगों का पेशा बन गया था और ऐसा आज भी करते जा रहे हैं। इस समय महाराजा कालिया नाग भी मथुरा के आसपास शासन करता था। उस समय मथुरा में महाराजा कंस शासन कर रहा था, महाराजा कंस अत्यंत धर्मात्मा और लोकप्रिय शासक था, उस को भी नीचा दिखाने के लिए एक कल्पित कथा घड़ी गई है, जिस में किसी कृष्ण नामक बालक  को राजा कंस के साथ लड़ाने-झगड़ाने का नाटक लिखा गया है, जिस में राजा कंस को अत्यन्त करूर, निर्दयी, अहंकारी के रूप में दिखाया गया है, यही नहीं लाखों साल पूर्व आदिवासी सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज को नीचा दिखाने के लिए, उन्हें...

नाग वंश का इतिहास।

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम्, जय गुरुदेव! हिंदुओं ने भारत के ऊपर छल बल से अधिपत्य जमाने के बाद, भारत का सम्पूर्ण इतिहास बदल दिया है, ये काम आज भी जारी है। हिंदुओं ने भारत के मूलनिवासियों के इतिहास को समाप्त करने के लिए ऐतिहासिक स्थानों के नाम बदल दिए हैं और बदल कर बाकियों को ध्वस्त किया जा रहा है, ताकि मूलनिवासी सभ्यता, संस्कृति का समूल नामोनिशान मिटा कर केवल यूरेशिया से आए हुए आक्रमणकारियों का ही इतिहास जिंदा रहे। नागवंश का इतिहास:--- विश्व की स्थापना के बाद आदि पुरुष की ऐतिहासिक रचना में दूसरे स्थान पर जुगाद का नाम आता है, जिस की प्रमाणिकता का वर्णन गुरु रविदास जी महाराज ने अपने मूलमंत्र में करते हुए कहा है:----- कि इक ओंकार सतनाम, कर्ता पुरख निर्भाऊ निर्वैर अकाल मूरत अजूनी सैभंग गुर प्रसादी आद सच जुगाद सच है वी सच होसी वी सच। इस मूल मंत्र से ज्ञात होता है कि आदि पुरुष ने आद को ही सब से पहले धरती पर अपनी टेस्ट ट्यूब से पैदा कर के मानव जाति का शुभारंभ किया था, इस से ही आगे मानव जाति का उदय हुआ है, जिस में एक वंश था *नागवंश* पुरातत्व विभाग की खोज के अनुसार जो पुराने सिक्के मिले ह...

मूलनिवासियो कुरीतियाँ छोड़ो!

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम, जय गुरुदेव! गतांक से आगे जमीन धन दौलत के लिए कोर्ट में बर्बाद मत करो:--- जमीन जयदाद के लिए में धन बर्बाद मत करो :---जमीन हमारी होती और पटवारी कानूगो, तैसीलदार, वकील हमारना देते हैं, इसलिए अपनी घरेलू पंचायत बना कर, आपसी मन मुटाव और झगड़ों को घर पर ही खत्म कर लो। आपस में प्यार से जीवन जियो, क्योंकि ये धरती छोड़नी ही पड़ती है, फिर आप आपस में जमीन, धन दौलत के लिए लड़ना छोड़ दो। तेती करोड़ देवी देवताओं को छोड़ो मेहनत मजदूरी को भगवान मानो:--- जो हक हलाल की कमाई खाते हैं, वही सुखी रहते हैं, किसी को भी लाखों करोड़ों रुपयों का घाटा नुकसान नहीं होता है, इलाज पर धन बर्बाद नहीं होगा इसलिए तेती करोड़ देवी देवताओं को छोड़ कर केवल और केवल मेहनत मजदूरी को ही भगवान मानो और हर पल पल घर पर ही गुरु रविदास जी द्वारा बताए गए मूलमन्त्र "सोहम" शब्द का जाप किया करो, तभी भगवान आप के घर आएंगे, क्योंकि गुरु रविदास जी महाराज ने खुद जगह जगह जा कर, अपने सत्संगों में समझाया था कि:--- सोहम सोहम जप लै, सोहम सोहम जाप। सोहम सोहम जपदे, लाभ लवेंगे आप।। उठत बैठत जागत सोवत जपिया सोहम ज...

मजदूरो तुम्हारा खून पी गए अमीर!

मजदूरो! तुम्हारा खून पी गए अमीर, फिर भी चुप! मजदूर देश की रीढ़ की हड्डी:--- प्रत्येक देश की रीढ़ की हड्डी केवल और केवल उस देश के मजदूर ही होते हैं, मजदूर ही सारे निर्माण कार्य करते हैं। मजदूर के ऊपर ठेकेदार शासन करता है, ठेकेदार के ऊपर विभाग का सुपरवाइजर, उस के ऊपर जूनियर इंजीनियर, उस के ऊपर सहायक इंजीनियर, उस के उपर कार्यकारी इंजीनियर, उस के ऊपर सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर उस के ऊपर चीफ इंजीनियर उस के ऊपर इंजीनियर इन चीफ, उस के ऊपर उस विभाग का कमिश्नर, उस के ऊपर उस विभाग का मंत्री, उस के ऊपर मुख्यमंत्री, ये सभी मजदूर का खून निचोड़ कर पीते हैं। ठेकेदार अपने ठेके में लाखों रुपए बचा कर के कमाता है, उस के ऊपर तो जितनी अफसरशाही होती है, वह सारी सरकारी बजट को चुना लगाती है, जिस का तो अनुमान ही नहीं लिया लगाया जा सकता है। ये सारे अधिकारी लाख, डेढ़ लाख, दो लाख, तीन लाख के करीब वेतन लेते हैं मगर जिस मजदूर के सिर पर ये लुटेरी जमात काम करती हैं, जिस का खून ये सारे मिल कर पीते हैं, उस मजदूर को मात्र 300 रुपए दैनिक मजदूरी देकर के उसे और उस के परिवार को भूखा मारते हैं, जबकि उस के ऊपर जितने लोग काम करते ...

मनुवादी नूरा कुश्ती।

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम्, जय गुरुदेव! आप सभी को ज्ञात होगा कि कई वर्षों से नेहरू उर्फ गांधी परिवार का कांग्रेस पार्टी के ऊपर एकाधिकार रहा है और इस परिवार ने कांग्रेस पार्टी को अपनी धरोहर मान रखा है। कांग्रेसी लोगों ने नेहरू उर्फ गांधी परिवार को आगे रख कर के 85% मूलनिवासी वोटों के सहारे राज कर के अपने पेट का धंधा चलाया हुआ है, इन स्वार्थी कांग्रेसियों को इस बात से कोई लेना-देना नहीं है, कि नेहरू उर्फ गांधी परिवार का नेतृत्व योग्य है या अयोग्य, बस इन को अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए, इस परिवार के किसी मोहरे की जरूरत होती है और उस मोहरे को ही आगे रख कर ये दो जून का भोजन कमाने के लिए इस परिवार के यसमैन बने हुए हैं। 1947 में जब केंद्रीय अंतरिम सरकार बनी थी, उस में जवाहरलाल नेहरू को ही प्रधानमंत्री बनाया गया था क्योंकि आजादी की लड़ाई के समय महात्मा गांधी ने जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू से यह कमिटमेंट की हुई थी कि आजादी मिलने पर केवल जवाहरलाल नेहरू को ही प्रधानमंत्री बनाया जाएगा, जब कि पहला चुनाव तत्कालीन ओबीसी नेता वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में लड़ा गया था और उन्हीं को ही प्...

महाराष्ट्र के मूल निवासी राजनेता एक मंच पर इकट्ठे हो जाओ

!!!महाराष्ट्र के पांच नेताओं से विनम्र अपील!!! महाराष्ट्र सारे भारत में दूसरे नम्बर का सब से बड़ा राज्य है, जो हर क्षेत्र में प्रसिद्ध है। इस बड़े राज्य में 34% मनुवादी जनता के सवर्ण नेता भले ही अनेकों ही दलों में विभाजित हैं मगर आंतरिक रुप से सभी एकता बना कर सत्ता में छाए हुए हैं, इस प्रदेश के 64% लोग अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यक हैं, जिन में मुस्लिम 11.4%, बौद्ध 5.81%, मराठा 25%, महाड 15%, धनगर 2% मुस्लिम 12%, आदिवासी10%, कुनबी 8%, माली 4% बंजारी 3%, तेली 2%, कोली के अतिरिक्त अंग्री, भंडारी, मांग, अहीर, कुंभर, पार्धी, चंभर, ढोर, नहावी, धोबी, लोहार, सुनार, बदर, कैकड़ी, सिंपी, सुतार (कार्पेंटर), येलम आदि जातियाँ हैं, मगर इन जातियों के नेताओं ने भारत के 85% मूलनिवासियों के साथ हमेशा धोखा ही किया है और आज इन की फूट के कारण भारतवर्ष के सभी मूलनिवासी गुलामी की जिंदगी जीते हुए 15% मनुवादी शासकों के शिकार बने हुए हैं । महाराष्ट्र के पांच बड़े नेता:--- आज महाराष्ट्र के 5 बड़े बड़े नेता रामदास अठावले, राज रतन प्रकाश आंबेडकर, बीड़ी बोलकर और वामन मेश्राम जी आपस में एक दूसरे क...

मोदी प्रधान मन्त्री ना होता तो राम मंदिर में फड़क नहीं सकता।

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम, जय गुरुदेव! जब यूरेशियन घुसपैठियों ने छल बल से घुसपैठ कर के भारत पर अधिपत्य जमा कर भारत के 85% मूलनिवासियों को गुलाम बना कर पशुओं से भी बदतर व्यवहार करना शुरू कर दिया था, तब अपनी अलग पहचान बनाने के लिए अपने युरेशयन गाड अब्राहम को ब्रह्मा पुकार कर उस को अपना जनक लिख कर नया इतिहास लिख लिया था। ब्रह्मा को अब्राहम का आवरण चढ़ाया गया है, जिस के दो साथी विष्णु और महेश का भी अविष्कार किया गया था, इस प्रकार  विदेशी युरेशयन लोगों ने अपनी अलग पहचान बना कर अपने आप को धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप में स्थापित किया था। ब्रह्मा के मुँह से जन्मे ये लोग ब्राह्मण जाति के नाम से प्रसिद्ध हो गए थे। सिंधु घाटी सभ्यता का विध्वंस:---अरबी और फ़ारसी में स ध्वनि को ह उच्चारित किया जाता है, इसीलिए युरेशयन सिंधु शब्द को हिंदू पुकारते थे, इसी हिन्दू  शब्द के कारण ये लोग हिन्दू बन गए और इकठ्ठे हो कर भारत के भोलेभाले 85% मूलनिवासियों को मारते गए। केवल यही ब्राह्मण नामक जाति के विदेशी युरेशयन लोग हैं, इन्होंने राजसत्ता छीन कर फूट डालो राज करो नीति लागू करनी शुरू की थी...

आयुष्मान भारत का छलावा

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम, जय गुरुदेव! जब से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है तब से भारतवर्ष के 85% मूलनिवासियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ऐसे ऐसे आकर्षक और लच्छेदार भाषण देने के लिए ऐसे ऐसे शब्दों को खोजा जा रहा है, जिन को सुनने मात्र से ही मूलनिवासियों के मुंह में पानी आ जाता है। जिन अमृत वचनों को सुन कर वंचित गरीबों के मन में उत्साह जागृत हो जाता है, कि भारतीय जनता पार्टी ही भारतवर्ष की गरीबी का अंत कर के गुरु रविदास जी की इच्छानुसार सभी को सम्मान दे कर समान कर देगी, क्योंकि गुरु रविदास जी महाराज ने अपनी वाणी में लिखा है, कि---- ऐसा चाहूं राज मैं जहां मिले सभन्न को अल। छोटबड़ सभ सम वसै तां रविदास रहे प्रसन्न। इन दो पंक्तियों को पढ़-सुन कर के सारे विश्व में क्रांतिकारी परिवर्तन आ चुका है मगर भारत में इन क्रांतिकारी विचारों को दफन करने के लिए केवल लच्छेदार भाषा में लोगों को गुमराह किया जाता है। इन क्रांतिकारी विचारों को दफन करने के लिए कांग्रेस, भाजपा, कम्युनिष्ट और अन्य मनुवादी राजनीतिक दल दिन रात केवल 85% मूलनिवासियों को गुलाम बनाए रखने के लिए ही योजनाएं बनाते हैं। ज...

बहुजन मुक्ति पार्टी झूठी गारंटी नहीं देगी

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम्, जय गुरुदेव! मनुवादी राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए, भारत के 85% मूलनिवासियों को अपने जाल में फंसाने के लिए अनेकों प्रकार के मन लुभावने लालच से भरी हुई घोषणाएं करती हैं।  झूठे वायदे कर के वोट लेने का षड्यंत्र करती आई हैं। कांग्रेसी प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने अपने समय में एक नारा दिया था, "गरीबी हटाओ, देश बचाओ" मगर इंदिरा गांधी मर गई मगर गरीबी नहीं हटी, बल्कि गरीबों को ही पर्दे से हटाया जाने लगा था। इसी तरह भारतीय जनता पार्टी ने भी कई नारे दिए जिन में से एक है "सब का साथ, सबका विकास" भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भी सर्वहारा की बात करती आई है और नारा लगाती फिरती है " धन धरती बंट कर रहेगी" कम्युनिष्ट राज खत्म भी हो गया मगर धन धरती अमीरों के ही पास रही, ये भी हरे घास में हरे सांप ही निकले और अंततः मिट्टी में मिल गए। इन्हीं छ्ली कम्युनिस्टों के स्थान पर पश्चिमी बंगाल में सुश्री ममता बनर्जी, उतर प्रदेश में सुश्री मायावती और दिल्ली प्रदेश में क्लीन मैंन केजरीवाल ने नई पार्टियां बना कर नई नई सरकारें बनाई मगर इन्होंने भी अपने ...