वर वंश का अंतिम योद्धा भाग पांच।।

चंवर वंश का इतिहास।।भाग 5।। गुरु रविदास जी महाराज विश्व के पहले ऐसे महान क्रांतिकारी योद्धा हुए हैं, जो फरमाते हैं कि------ सतिसंगति मिली रहियो माधो जस मधुपमखीरा अर्थात हे भाईयो! अच्छी संगत बना कर रहना चाहिए, जिस प्रकार मधुमक्खियां रहती हैं, ये मधुमक्खियां शहद भी देती हैं मगर उन के छत्ते को कोई तवाह करे, पत्थर मारे तो वे खुद भी शहीद होती हैं और पत्थर मारने वाले दुश्मन को भी मार देती हैं, इसीलिए गुरु जी खून का बदला खून से लेने का उपदेश देते हैं, क्योंकि जब तक कातिल को उस के कतल अर्थात खून करने की सजा नहीं दी जाती है, तब तक वह सुधर ही नहीं पता है। बादशाह सिकंदर लोधी के हाथ खून से लथपथ हो चुके थे, जिस के कारण वह आदमखोर बन चुका था, ऐसे क्रूर, कातिल आदमखोर को बंदा बनाने के लिए ही उन्होंने उस के राजदूत सदना कसाई को बुरी तरह मानसिक रूप से तोड़ा और उस के माध्यम से बादशाह सिकन्दर लोधी को भी जलील किया, जिस के कारण वह उन का मुरीद बन गया था। पराजित सदना कसाई:--- पराजित सदना कसाई गुरु जी के प्रवचन से बुरी तरह विक्षिप्त हो चुका था और निराश, हताश हो कर बादशाह सिकन्दर लोधी के पास दिल्ली पहुँच गया, जा कर आप बीती बताने लगा। सदना कसाई गुरु रविदास जी के अलौकिक स्वरूप का वर्णन करते हुए कहता हैं, कि बादशाह! कोई भी उन के मुंह के आलोकिक नूर को देख तक नहीं सकता है, क्योंकि उन के मुंह के दर्शन करने पर सैकड़ों सूर्य का प्रकाश भी लज्जित होता है, उन के सामने किसी को बात करने की भी हिम्मत नहीं होती है। वे तो धरती के ऊपर फरिश्ता हैं, फरिश्ता, जिस के सामने कोई टिक नहीं सकता है, वे कोई आम साधारण व्यक्ति नहीं है। सदना कसाई गुरु रविदास जी की महिमा का वर्णन करते हुए अपनी लाचारी को बादशाह सिकंदर लोधी को बता कर उस का भी मानसिक संतुलन बिगाड़ देता है, जिस से क्रोधित हो कर बादशाह सिकंदर लोधी अपना आपा खो कर कहने लगा, कि हे सदना! मुझे उस फकीर का नाम, निशान और अता-पता बता दे, मैं उस को ऐसी सजा दूंगा जैसी आज तक मैंने किसी अपराधी को नहीं दी है :---- पातशाह ने आखिआ दस सधने की नाम उस चमार दा ऐ।। किहड़े शहिर ते गांउ विच वसदा, जेहड़ा शेखियां बहुतियां मारदा ऐ।। जिहने दीन इसलाम दा हतक कीता रहूं ना सच पुकारदा ऐ।। उह दी शकल रंग ढंग दस फोटो झट कैद कर हुणेई डारदा ऐ।। पगलाए बादशाह सिकंदर लोधी के फरमान को सुन कर के सदना कसाई सिकंदर लोदी को गुरु रविदास जी महाराज के बारे में बताता है, कि हे बादशाह! वह तो दुनिया में अद्धतीय शक्ति वाला कोई शंहशाह है, उस से दुश्मनी मोल लेना मूर्खों का काम है।                ।।सदना पीर।।शब्द।। उहदा नाम रविदास ते शहिर कांशी रंग ढंग ते दसां तसवीर उस दी।। मत्थे तिलक जनेऊ है गल उसदे शक्ल ब्रह्मा तोउ परे अखीर उस दी।। उहदी शक्ल खलकों नियारी वेखी झलक झली ना सधने पीर उसदी।। की करां बिआन मैं पातशाहा बिना ताकत ना आउ तकदीर उस दी।। दुनिया में आज तक ऐसा कोई महापुरुष पैदा ही नहीं हुआ है, जिस की तुलना गुरु रविदास जी महाराज से की जा सकती है। सदना कसाई के उपरोक्त बयान से ज्ञात होता है, कि वह विश्व के सर्वोच्च पदासीन सर्वशक्तिमान और महान ज्ञानी क्रांतिकारी गुरु हुए हैं                  ।।सदना शब्द।। चौदाँ तबक नूं जाँणदा कुझ नाहीं कुरान मुहम्मद ना मंजूर कीता।। बण बैठा है आप ही पीर ढाढा ब्रह्मा वेद विशन वेद बी चूर कीता।। जेते मजहब इस्लाम जग ते हैं, उस सबना नूं है धूर कीता।। उह नंवा अनोखा इक बेगमपुरा शहिर दसे लखां करोड़ इस्लाम ते दूर कीता।। गुरु रविदास जी सुपर पावर:----- सभी धर्मों के चौदह तबकों को नेस्तनाबूद करते हुए, गुरु रविदास जी महाराज सदना कसाई को विश्व की वास्तविकता दर्शाते हुए अपना गुलाम बना लेते हैं और सदना कसाई बादशाह सिकंदर लोदी को भी उन की विद्वता के बारे में बताता है, कि गुरु रविदास जी महाराज चौदह तबकों को भी निरस्त करते हैं, कुरान और पैगंबर मोहम्मद को अस्वीकार करते हैं, ब्रह्मा विष्णु और महेश को भी रद्द करते हैं। मुझे तो गुरु रविदास महाराज ही सर्वोच्च, सर्वशक्तिमान लगते हैं। वास्तविक सत्य:---वास्तव में सत्य भी यही है, क्योंकि गुरु रविदास महाराज किसी भी प्रकार के दम्भ, आडंबर, पाखंड, अहंकार और दिखावे को मान्यता नहीं देते हैं, वे केवल कर्म में विश्वास करते हैं, जो लोग अपने ही नियम और सिद्धांत तैयार करते हैं, वे लोग कभी भी पीर, पैगंबर या अवतार नहीं हो सकते हैं। गुरु रविदास महाराज ने कहीं भी अपने आप को किसी का गुरु, पीर, पैगंबर या औलिया कभी नहीं बताया। उन्होंने मनुष्य को आत्मनिर्भर बनने के लिए, स्वतंत्रता और स्वाभिमान से जीने के लिए मार्गदर्शन किया है, गुरु रविदास महाराज सभी अवतरित लोगों में सर्वोच्च स्थान रखते हैं, इसीलिए उन को सुपर पावर कहा जा सकता है। रामसिंह आदवंशी। अध्यक्ष, विश्व आद मंडल। हिमाचल प्रदेश।

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