चंवर वंश का इतिहास भाग 2

     ।।चंवर वंश इतिहास भाग दो।। मुस्लिम शासकों के खून खराबे के बाद भारत के राजपूत राजाओं, महाराजाओं ने जनता की रक्षा करने के लिए अपने हाथ खड़े कर दिए थे, खुद राजपूत राजाओं ने मुस्लिम शासकों के सामने हथियार डाल दिए थे और अपने प्राणों की रक्षा करने के लिए कुछ राजपूत राजाओं ने अपनी मान मर्यादा को खत्म करते हुए अपनी बेटियों को भी मुस्लिम शासकों को नजराना कर दिया था, जिस का साक्षात उदाहरण जोधाबाई है। ऐसी परिस्थितियां पैदा हो गई थी, कि भारत की जनता की रक्षा करने वाला कोई वीर सपूत नहीं बचा था, तब ऐसी परिस्थितियों में तत्कालीन केवल मूलनिवासी (अछूत) गुरुओं ने मोर्चा संभाला था, जिस का नेतृत्व केवल गुरुओं के गुरु, संतों में शिरोमणि संत गुरु रविदास जी महाराज ने किया था। गुरु रविदास जी महाराज ने अत्याचारी खूनी, क्रूर, कातिल और निरंकुश बादशाह सिकंदर लोदी का डट कर सामना किया था। सिकंदर लोदी को कड़ी टक्कर देते हुए उन्होंने अपनी वीरता का प्रदर्शन किया था, जिस का वर्णन स्वामी ईशर दास जी महाराज, *गुरु आदि प्रकाश* ग्रंथ में करते हुए फरमाते हैं कि:--- दोहा सिकंदर लोधी पातशाह हुकूमत उसले जान। दीन इस्लाम दे फिरन उपदेशी करते मुसलमान।१। गुरु रविदास, कबीर साहिब वक्त उसे होई। हुकूमत शाह सिकंदर दी प्रगटे सी जब दोई।२।इक तां शत्रु शत्री ब्राह्मण दूसरा है इस्लाम। शरदूल दोहाँ में गरजदे खड़ग नाम कतलाम।३।हिंदूआं नूं अंधे आखदे कांणे ने मुसलमान। गिआनी दोहाँ तउ सिआणा आंखन करन इह बखिआन। ४। मगध देश प्रचार कबीरा काली चूर श्री रविदास। नयमी शारण सधना पीर मध गोस्ट होई खास। ५। बादशाह सिकंदर लोदी सदना कसाई को कह रहा है, कि तू जा कर गुरु रविदास जी महाराज को इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए विवश कर दें, इसलिए सदना कसाई गुरु रविदास जी के पास जा कर कहने लगा, महाराज-- मंन दीन इस्लाम नूं रविदासा एहो जिहा ना मखलू अनमोल कोई।१। फासंमा बजहूला दसदा ऐ ऐसी वसत ना होई दस दिन ऐसी वस्तु ना जग अनतोल कोई।२।बारगाह खुद आदि चों पढ़ कुराना रती जिंद रोल ना कोई आ गया बारगाह खुदा दी चों पढ़ कलमा होर ना टोल कोई।३। मसीत मन लै घर कर खुदा दा ऐ पढ़ अल्लाह नमाज बोल सोई। ४। गुरु रविदास जी महाराज सदना कसाई को कड़े शब्दों में पैगंबरों के पाखंडों का खंडन करते हुए बताते हैं कि हे साधनिया! :----- बुत खाने खुदाइ ना राम ना ठाकर दुआरे। काबे गंग बनारसी गुर विन पच पच हारे।१।मस्जिद माहे खालिक गुसल करेवत नाहें। राम ना तिलक लगा कर ठाकुर दुआरे आहे।२। गुरु रविदास जी के शब्द बाण सदना कसाई के हृदय में इस तरह जख्म कर गए कि वह इस्लाम की आलोचना सुन कर के बेचैन हो उठा और गुरु रविदास जी महाराज को कहने लगा कि--- सधना पीर आखे रविदास ताइं वक्त हथ इस्लाम वाला आऊँणा नहीं।१। सच्ची आन मसीत असमान चौथे उत्थे बिन मुहम्मद ते जाणा नहीं।२। हजरत गए मुहम्मद असमान सतवें सिफारिश उन्हादी बिना छुड़ाऊँणा नहीं।३। दुख दोजग दे विच सोग कण जो रसूलइल्ला ते बाझ मुकाऊंणा नहीं।४। गुरु रविदास जी महाराज केवल संत महात्मा ही नहीं थे अपितु वे तो कट्टर क्रांतिकारी और निडर समाजवादी राजनेता हुए हैं। बेतुकी बातों को सुन कर के सदना पीर को समझाते हुए फरमाते हैं कि--- गुरु रविदास जी आखदे ने सुन सधने पीर ध्यान दे के।१। करै चार ते सत असमान दियां गलां  मिलिआ मुर्शिद ना गिआ गिआन दे के।२। सत ला आसमान दी हद बैठो दसूं लखां करोड़ विआंन दे के।३। लखां उत्ते असमाना दे शहर बेगम दुख सुख ना कण हरिखान दे के।३। उत्थे कोई सिफारिश ना चलदी ऐ जित्थे सच्ची सरकार दरबार लगा।४। लखां खड़े मुहम्मद ते विष्णु ब्रह्मा, बिना करनी कौन करन पार लगा।२। उत्थे सच दा होऊ निआं सधने जित्थे फैसला करन करतार लगा।३। बिना मुर्शद दा राह ना हथ आवे गुरु पीर दा इतना सार लगा।४। गुरु रविदास जी महाराज ने भटके हुए सधना कसाई को अनेकों तर्कसंगत प्रमाण दे दे कर के समझाया, कि कोई गुरु पीर किसी की सहायता नहीं करता है। जीव केवल अपने किये कर्मों के हिसाब से ही दुख सुख प्राप्त करता है, तू जिस स्वर्ग की बात कर रहा है, वहां अच्छे कर्मों के बिना लाखों-करोड़ों मोहम्मद, विष्णु और ब्रह्मा खड़े रहते हैं मगर कोई भी अच्छे कर्मों के बिना संसार रूपी सागर से पार नहीं हो पाता है, वहां पर तो सच का न्याय होता है और सच का ही फैसला करने के लिए करतार बैठा हुआ है मगर इन सब परमाणों को सुन कर के भी सधने की आंखों से मूर्खता का पर्दा नहीं हटा और गुरु रविदास जी से कहने लगा---- सधना आखे सुण रविदास अल्ला खुदा है नाम बडेरा। आन नाम सभी लघ लघ बण इस्लाम का तूं चेरा।१ ।गुरु रविदास जी महाराज भूले भटके हुए मूर्ख सदना कसाई को समझाते हुए फरमाते हैं, कि सधने सुन --- ईश नाम है आदि का, यू आन नाम छूटेरे। ईश नाम बिन आन नाम मानसी रखे बथेरे ।१। ईश नाम ही आदि पुरुष का नाम है:--- गुरु रविदास जी महाराज सदना कसाई को समझाते हुए फरमाते हैं, कि हे सधनिया! आदि नाम ही ईश्वर का नाम है, उस के सामने दूसरे सभी नाम छोटे-छोटे हैं, ईश और ईश्वर नाम तो अन्य लोगों ने भी बहुत रखे हुए हैं मगर वे आदि पुरुष नहीं है अर्थात उन को ईश्वर नहीं कहा जाता है, इतने तर्कसंगत प्रमाणों को पढ़, सुन कर हिंदू, मुस्लिम सुधर नहीं सके, इस के विपरीत इन धर्मांध लोगों ने गुरु रविदास जी के इतिहास को ही मिटाने का काम किया है, जो कांग्रेस और भाजपा सरकारों ने आज भी जारी रखा हुआ है। गुरु रविदास जी महाराज और सिकन्दर लोधी का इतिहास खत्म करने के लिए, मोदी सरकार ने 2019 में दिल्ली स्थित तुगलकाबाद में उन की सात सौ कनाल भूमि का सरकारीकरण कर लिया है। कमश: राम सिंह आदिवंशी। अध्यक्ष, विश्व आदि धर्म मंडल। हिमाचल प्रदेश।

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