मजदूरो तुम्हारा खून पी गए अमीर!
मजदूरो! तुम्हारा खून पी गए अमीर, फिर भी चुप!
मजदूर देश की रीढ़ की हड्डी:--- प्रत्येक देश की रीढ़ की हड्डी केवल और केवल उस देश के मजदूर ही होते हैं, मजदूर ही सारे निर्माण कार्य करते हैं। मजदूर के ऊपर ठेकेदार शासन करता है, ठेकेदार के ऊपर विभाग का सुपरवाइजर, उस के ऊपर जूनियर इंजीनियर, उस के ऊपर सहायक इंजीनियर, उस के उपर कार्यकारी इंजीनियर, उस के ऊपर सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर उस के ऊपर चीफ इंजीनियर उस के ऊपर इंजीनियर इन चीफ, उस के ऊपर उस विभाग का कमिश्नर, उस के ऊपर उस विभाग का मंत्री, उस के ऊपर मुख्यमंत्री, ये सभी मजदूर का खून निचोड़ कर पीते हैं। ठेकेदार अपने ठेके में लाखों रुपए बचा कर के कमाता है, उस के ऊपर तो जितनी अफसरशाही होती है, वह सारी सरकारी बजट को चुना लगाती है, जिस का तो अनुमान ही नहीं लिया लगाया जा सकता है। ये सारे अधिकारी लाख, डेढ़ लाख, दो लाख, तीन लाख के करीब वेतन लेते हैं मगर जिस मजदूर के सिर पर ये लुटेरी जमात काम करती हैं, जिस का खून ये सारे मिल कर पीते हैं, उस मजदूर को मात्र 300 रुपए दैनिक मजदूरी देकर के उसे और उस के परिवार को भूखा मारते हैं, जबकि उस के ऊपर जितने लोग काम करते हैं, वे अपने हाथ से कोई काम नहीं करते हैं, इस के विपरीत ये लोग थोक में भ्रष्टाचार कर के सरकारी बजट को खूब चूना लगाते हैं, यदि इन चोर लोगों के खिलाफ सरकार कोई आदेश जारी कर देती है, जिस से इन को वित्तीय हानि होती है, तो ये सारी की सारी सेना सड़कों पर उतर कर काम बंद कर देती है मगर बेचारा मजदूर इस लायक भी नहीं होता है, कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर बैठ कर के हड़ताल कर सके, क्योंकि यदि वह हड़ताल करता है, तो उस को उस दिन की मजदूरी नहीं मिलेगी और यदि उसे मजदूरी नहीं मिलती है, तो शाम के समय उस का खाना नहीं बनता है और बच्चे भूखे पेट सो जाते हैं, जो निर्बल मजदूर पूरी लगन और ईमानदारी से अपना काम करता है, उस के बदले में उसे पूर्ण मजदूरी नहीं दी जाती है और जो उस के खून पसीने की गाढ़ी कमाई होती है, उसे बड़े बड़े डाकू, लुटेरे खाते पीते हैं, बेचारा मजदूर मन मसोस कर रह जाता है, उस की आंखों से छलकते आंसुओं को कोई भी समझ नहीं पाता है, उस के पेट और पीठ मिल कर दोनों एक हुए होते हैं मगर अंधे, बहरे, गूंगे, मूर्ख निर्दयी कर्मचारी, अधिकारी और मंत्री उस की दयनीय दशा देखने में समय बर्बाद नहीं करते हैं। सरकारें इतनी बेईमान और कठोर हृदय वाली हैं कि वे बड़ी निर्दयता से मजदूर का खून खुद भी पीते हैं और अपने दलालों को भी पिलाती हैं, जिस के बारे में किसी को भी सोचने का समय नहीं है और ना ही किसी के हृदय में हमदर्दी पैदा होती है।
किसान मजदूरों की स्थिति:--- भारत देश का किसान भी मजदूर की तरह ही खेतों में काम करते करते, पिट-पिट कर मर जाता है, कोल्हू के बैल की तरह सारा सारा दिन खेतों में काम करता रहता है, चाहे कड़कती धूप हो या सर्दी, आग उगलता सूर्य हो या मूसलाधार वर्षा लगी हुई हो मगर उसे काम करना ही पड़ता है मगर उस का खून पीने वाले अमीरों को उन की कड़ी मेहनत का कोई एहसास नहीं होता है और उन के तैयार खाद्य पदार्थों को सस्ते से सस्ते रेट पर खरीदने का काम करते हैं, उन के मोटे-मोटे चश्मो के बीच किसान की कमाई के प्रति कुछ नजर नहीं आता है, उस की झुकी ही रीढ़ की हड्डी को देख कर कोई दुख दर्द नहीं होता है।
मजदूरो कभी अपने बारे में सोचा:---मेरे देश के मजदूरो! क्या कभी आप ने सोचा की हमारी हड्डियों के ऊपर केवल चमड़ी ही क्यों है, जबकि विधायकों, सांसदों के शरीर के ऊपर ना तो कोई हड्डी दिखाई देती है और ना कोई झुर्री। आप की हड्डियों का मांस भारत के लुटेरे अधिकारियों, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्रियों ने छीन कर अपनी हड्डियों अपने अमीर उद्योगपतियों के शरीरों के ऊपर छाप लिया है, इसलिए आप की हड्डियों के ऊपर मांस की अपेक्षा झुरियां ही हैं, इन्हीं लोगों ने आप को झुग्गी-झोपड़ियों में रहने के लिए विवश कर रखा है मगर आप ने कभी नहीं सोचा कि हमें झुग्गी झोंपड़ियों में क्यों रहना पड़ता है? क्यों हमारी रक्त विहीन हड्डियां हैं? क्यों हमारे वच्चे मजदूर ही बनते हैं जबकि आप बड़े-बड़े आलीशान महल, बंगले और अटारियाँ बना कर के लुटेरे अदानी, अंबानी, टाटा, बिरला डालिमा को तैयार कर के देते हैं और राजनैतिक डाकुओं के लिए सुंदर सुंदर विश्राम गृह बनाते हो।
कंगाल विधायक, सांसद अरबपति:--- जब एक कंगाल अनपढ़ विधायक और सांसद बन जाता है, तो 5 सालों में ही वह करोड़पति और अरबपति बन जाता है, उस के बड़े-बड़े होटल बन जाते हैं, बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रियां लग जाती हैं, बड़े-बड़े कंपलेक्स बन जाते हैं मगर आप लोग इन से कुछ नहीं सीखते हैं, बस दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह काम ही करते जाते हैं, अपने अधिकारों के प्रति आप तनिक भी नहीं सोचते हैं, जब तक आप सभी लोग कोई संगठन बना कर के अपने अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ते हैं, तब तक आप का खून इसी ढंग से चूसा जाता रहेगा, क्योंकि कहा भी है कि *संघे शक्ति कलि युगे* अर्थात कलियुग में जो लोग इकट्ठे मिलकर के रहते हैं, अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ते हैं, वही लोग सुखी और समृद्ध जीवन जी सकते हैं। जब तक आप संगठित नहीं होंगे, तब तक गंदगी ढोंते-ढोंते मरते ही रहेंगे, इसलिए मजदूरों की लड़ाई लड़ने वाले महामानव बामन मेश्राम और कमल कांत काले के कंधे के साथ कंधा मिलाते हुए बहुजन मुक्ति पार्टी को सत्ता में लाने का प्रयास करो, तभी आप का कल्याण संभव होगा अन्यथा ब्राह्मणवादी राजनेता आप का खून पीते ही रहेंगे।
राम सिंह आदवंशी।
महासचिव,
वहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश।
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