नाग वंश का इतिहास।
मेरे 85% मूलनिवासी साथियो,
सोहम्, जय गुरुदेव!
हिंदुओं ने भारत के ऊपर छल बल से अधिपत्य जमाने के बाद, भारत का सम्पूर्ण इतिहास बदल दिया है, ये काम आज भी जारी है। हिंदुओं ने भारत के मूलनिवासियों के इतिहास को समाप्त करने के लिए ऐतिहासिक स्थानों के नाम बदल दिए हैं और बदल कर बाकियों को ध्वस्त किया जा रहा है, ताकि मूलनिवासी सभ्यता, संस्कृति का समूल नामोनिशान मिटा कर केवल यूरेशिया से आए हुए आक्रमणकारियों का ही इतिहास जिंदा रहे।
नागवंश का इतिहास:--- विश्व की स्थापना के बाद आदि पुरुष की ऐतिहासिक रचना में दूसरे स्थान पर जुगाद का नाम आता है, जिस की प्रमाणिकता का वर्णन गुरु रविदास जी महाराज ने अपने मूलमंत्र में करते हुए कहा है:-----
कि इक ओंकार सतनाम, कर्ता पुरख निर्भाऊ निर्वैर अकाल मूरत अजूनी सैभंग गुर प्रसादी आद सच जुगाद सच है वी सच होसी वी सच। इस मूल मंत्र से ज्ञात होता है कि आदि पुरुष ने आद को ही सब से पहले धरती पर अपनी टेस्ट ट्यूब से पैदा कर के मानव जाति का शुभारंभ किया था, इस से ही आगे मानव जाति का उदय हुआ है, जिस में एक वंश था *नागवंश* पुरातत्व विभाग की खोज के अनुसार जो पुराने सिक्के मिले हैं, उन से नौ नाग महाराजाओं का वर्णन मिलता है अर्थात नाग राजाओं की जानकारी मिलती है, जिन में एक बृहस्पति नागदेव और गणपति नाग आदि नामों का जिक्र मिलता है। इन नामों की आलोचनात्मक परख की जाए तो ज्ञात होता है कि इसी बृहस्पति नाग के नाम पर बृहस्पति ग्रह का नाम रखा गया है, क्योंकि आदिकाल से ही महापुरुषों के नाम को अमर करने के लिए किसी विशेष प्रकृति के पिंड के ऊपर किसी स्थान का नाम करण किया जाता है। नाग वंश के आठ उपवंश और हुए हैं, जिन में बसुकी, तक्षक, कर्कोटक,सिंह, रुद्र, महापदम, पदम और धनंजय हुए हैं, कहीं 80 नाग वंशों का वर्णन किया गया है। इतिहास में कुषाण युग के बाद गुप्त युग से पहले भारशिव नाम से जाने जाते थे, जोकि नागों की उपाधि थी। इतिहास में पाया गया है, कि फणि मुकुट राय महाराज ने छोटा नागपुर की स्थापना की थी। वह एक बहुत ही मेधावी और योग्य शासक था। दिव्य नागवंश साम्राज्य की स्थापना भी इसी सम्राट ने की थी। नागपुर का नामकरण भी इसी नागवंश के नाम पर हुआ है। यह नागपुर आज भी भारतवर्ष के सुप्रसिद्ध शहरों में विशेष स्थान रखता है। नागों के पूर्वज कौन थे? इस के बारे में किसी भी इतिहासकार को कोई तर्कसंगत ज्ञान नहीं है। केवल नाग जनजातियों की मौखिक परंपराओं, गाथाओं, दंत कथाओं, किंबदंतियों के आधार पर यह कहा जाता है, कि नागों के पूर्वज चीन, यूनान, म्यमार में रहते थे, जो आदिकाल में भारत के भूभाग थे, जिन का इतिहास आर्यों ने मिटा दिया है।
नाग वंश के प्रति भ्रांतियां:----- विश्व में नाग जातियों के बारे में बहुत अधिक विरोधाभास हैं भारत में आज भी यह नाग सपेरा, कालबेलिया की जाति निवास करती है। कश्मीर में नाग प्रजाति के लोग निवास करते थे, ये सभी सभी स्थानीय जलवायु और वातावरण के कारण झारखंड और छत्तीसगढ़ में जा कर बस गए थे इस के प्रमाण सपेरा जाति का कालबेलिया नृत्य है, जो वहां आज भी लोकप्रिय है, इन सब का वर्णन सम्राट सिद्ध चानो के समय तक उपलब्ध होता है, जिस का वर्णन सम्राट सिद्ध चानो जी के मंत्रों में और उन के मंत्रिमंडल से स्पष्ट होता है क्योंकि बाबा सिद्ध चानो जी महाराज के समय एक नाग दरबारी हुआ करते थे, जिन का जिक्र उनके मंत्र में मिलता है, जिन को बाद में हिंदुओं ने अपमानित करने के लिए नाग से नांगावल्ली भी कहा गया है अर्थात नंगा रहने वाला, जो इन यूरेशियन लोगों द्वारा संदेह पैदा करने का षडयंत्र ही लगता है। आज भी सम्राट सिद्धचानो जी महाराज के सेवक, पुजारी नांगावल्ली के बारे में अपने मंत्रों में इन का वर्णन करते हैं।
नागवंश के इतिहास को ध्वस्त किया गया है:--- जब यूरेशियन आक्रमणकारियों ने भारत को अपना गुलाम बना लिया था, तब इन लोगों ने सम्माननीय नागवंश के इतिहास को ध्वस्त करना शुरू कर दिया था। नागवंश के महाराजा का नाम नाग शब्द से आरंभ होता हैं। महाराजा नाग दो करोड़ छप्पन लाख नौ सौ पच्चीस वर्ष पहले, सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज के दरबार में दरबारी थे, जिन को जनता की सुरक्षा के लिए उतरदायी बनाया गया था। महाराजा नाग के अधीन ही शेषनाग नामक वीर नाग कार्य करते थे। शेषनाग कोई जहरीला सांप नहीं था, वह महाराजा नाग के सेनापति थे, वे अपनी जनता की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी हुआ करते थे मगर जब से हिंदू भारतवर्ष में आए हैं, तब से शेषनाग को सांप के रूप में दिखा कर के भारतवर्ष की भोली भाली जनता को जहरीले सांप का स्वरूप दिखा कर डराया धमकाया जा रहा है। भारत के मूलनिवासियों को शिक्षा से वंचित रखा गया है, जिस के कारण उन की तर्क करने की शक्ति ही खत्म हो चुकी है, इसीलिए वे ब्राह्मणों की लिखी हुई कल्पित कथाओं, कहानियों के ऊपर विश्वास करते आ रहे हैं, जिस किसी इतिहासकार और लेखक ने इन के छलों और पाखंडों को उजागर करने का प्रयास किया है, उन को इन ब्राह्मणों ने छल कपट से मरवा दिया है, जिस का लेखिका गौरी लंकेश आदि साक्षात प्रमाण हैं, इसलिए भारत के इतिहास को कोई उजागर नहीं कर पा रहा है।
शक्तिशाली नाग वंश:--- महाराजा नाग इतने शक्तिशाली हुए हैं, कि सारे जहरीले सांप उन के आदेश के अनुसार ही काम करते हैं, इसलिए जब कभी भी कोई किसी के साथ अत्याचार और अन्याय करता है, तो पीड़ित दुखी आदमी सच्ची सरकार सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज के पास आग में तेल डाल कर फरियाद करते हैं, कि हे बाबा सिद्धचानो महाराज! मुझे अमुक आदमी ने आमुक अत्याचार कर के मेरे साथ अन्याय किया है, दुख दिया है, जो मुझ से बर्दाश्त नहीं हो रहा है, मुझे न्याय दो, ऐसी फरियादों को सुन कर सम्राट सिद्धचानो जी इन पीड़ित लोगों के आवेदनों पर कार्यवाही और फैसला करने के लिए अपने सभी दरबारियों को आदेश करते हैं जिन को जो जो कार्यभार सौंपा हुआ है, इसी प्रकार जब ऐसे काम महाराजा नाग जी को दिए जाते हैं तब उन के आदेश के अनुसार पहले बड़े बड़े सांप अपराधी के घर में जा कर के दिखाई देने लगते हैं परन्तु यदि उस के बाद भी अपराधी नहीं समझता है, तो नाग घर के चारों ओर लिपट जाते हैं और यह दर्शाने की कोशिश करते हैं, कि हम यहां अपराधी को अपराध स्वीकार कर के अपनी गलती का अहसास कर के, उसे मान कर अपने प्रतिद्वंदी के साथ समझौता करने के लिए संकेत देते हैं मगर जब अपराधी इन प्रमाणों को देख कर भी अनदेखा कर देता है, तो महाराजा नाग के सिपाही अपराधी को काट भी देते हैं, जिस से अपराधी की मृत्यु हो जाती है, यदि उस से भी अपराधी और उस का परिवार अपनी गलती नहीं समझता है, तो परिवार का दूसरा आदमी भी इसी तरह मारा जाता है, परंतु जब सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज का कोई पुजारी सत्य को उजागर कर के अपराधी के परिवार को सिद्धचानों जी के प्रकोप को बता देता है, कि हे भाई! आप ने अमुक आदमी के साथ अमुक घोर अन्याय किया है, इसीलिए आप को सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज ने दंड देना शुरू कर दिया है, इसलिए आप अपने प्रतिद्वंदी के साथ तत्काल समझौता कर लो, अन्यथा आप का सारे का सारा परिवार ही खत्म हो जाएगा, ऐसा सुन कर लोग आपस में समझौता करने के लिए विवश हो जाते हैं। दोनों पक्ष के लोग चन्द्रवंशी अर्थात जिन्हें आज चमार नाम से पुकारा जाता है, के पास जा कर अपनी सहमति बताते हैं कि हम आपस में कनप्रोमाईज करना चाहते हैं, जिस की सहमति को सुन कर वह उन दोनो पक्षों के घरों की सांझी चूरी, जुर्माना लेकर अरदास कर के उन का समझौता करवाता है, जिसे सुन कर सांप अर्थात नाग महाराज के सिपाही वापस चले जाते हैं।
राम सिंह आदवंशी।
हिमाचल प्रदेश।
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