नाग वंश का उदय पतन।।

आदि पुरुष से चली आ रही मानव सभ्यता का विस्तार अनादि काल से ही चलता आ रहा है, जिस के प्रमाण धरती के ऊपर देखे जा सकते हैं। धरती के सभी प्रखंडों के ऊपर जितने भी मानव जाति के कबीले रहा करते थे, उन सभी की पहचान अलग-अलग बनी हुई है। सभी देशों की मनुष्य जाति का अपना अपना रंग, स्वरूप, स्वभाव, भाषा, रहन सहन, वेशभूषा, व्यवहार, रीति रिवाज, खानपान सभी भिन्न भिन्न प्रकार के हैं। इन्हीं कबीलों को बाद में वंश कहा गया है, जिन में नागवंशी लोग विश्व के सभी देशों में रह रहे हैं। भारतीय मूलनिवासी:---- युरेशियन लोगों ने भारतीय मूलनिवासी लोगों में फूट डाल कर राज करने का षड्यंत्र रचा हुआ है, जिस के कारण इन के लेखकों ने भी ऐसा षड्यंत्र रचा हुआ है कि भारत के मूलनिवासियों का इतिहास तोड़ मरोड़ करके लिखा हुआ है और आज भी इसी तरह लिख रहे हैं परंतु भारतीयों के रूप, रंग और स्वभाव को यह लोग बदल नहीं सके हैं। इन लोगों ने भारतीय मूलनिवासी जनता को भ्रमित करने के लिए उन के नाम बदल कर रख दिए गए हैं। आदिकालीन नागवंश :---- आदि काल से ही नागवंश भारत का सर्व श्रेष्ठ वंश रहा है। सम्राट सिद्ध चानो के दरबारी नाग बलि हुए हैं। सम्राट सिद्ध चानो जी के अवसान के बाद उन के जितने भी दरबारी थे, उन्होंने अपने अधीनस्थ भूभागों के ऊपर अपना शासन स्थापित कर लिया था, इसी कारण राजा मणिमहेश उर्फ राजा पहाड़िया उर्फ गद्दी ने शासन संभाला था, इसी तरह नाग बली और उन के उत्तराधिकारियों ने भारत के ऊपर अपना अपना शासन स्थापित कर लिया था। प्राचीन साम्राज्य की प्रमाणिकता:---- सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज मक्का मदीना से शासन करते थे, परंतु उन के बाद मक्का से ले कर के पाकिस्तान तक लगभग 57 के करीब मुस्लिम देश बन चुके हैं, क्योंकि सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज के जितने भी क्षत्रप उन का शासन चलाने में सहयोग करते थे, वे उन के बाद स्वतंत्र हो गए थे और उन्होंने अपने अपने भूभाग की राज सत्ता अपने हाथ में ले ली थी, जिस का साक्षात प्रमाण वर्तमान में भी देखा जा सकता है कि जितने भी बादशाह मर गए हैं, या जिन की औलाद नहीं हुई हैं, उन के ही स्वार्थी, खूँखार सेनापतियों ने अपने अपने क्षेत्र को अपना राज्य घोषित कर दिया है, जिस के परिणाम स्वरूप सारे संसार में छोटे-छोटे राज्य स्थापित हो गए हैं। अभी-अभी 1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ तो अंग्रेजों के जाने के बाद भारत के कई टुकड़े हो कर छोटे छोटे देश बन गए थे, जिन में भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ब्रह्मा (जिसे अब मैय्ममार) थाईलैंड, श्रीलंका आदि शामिल हैं और उन के शासक भी कई बन चुके हैं, इस से प्रमाणित होता है, कि विश्व के जितने भी देश हैं, वे वैश्विक सम्राट कैलाश जी महाराज और उन के राजकुमार सम्राट सिद्ध चानो जी महाराज के साम्राज्य के छोटे-छोटे देश बने हुए हैं। भारतीयों के गोत्र:---- इसी तरह भारत में जिन जिन परिवारों ने शासन शुरू किया था, उन सब परिवारों के गोत्र भी भिन्न भिन्न है, इसी कारण सिद्ध चानो महाराज के नाग बलि दरबारी के वंशज नागवंशी हुए हैं, इन्हीं नागवंशी परिवारों को वर्तमान नागा जाति के नाम से पुकारा जाता है। यह नागा आज नागालैंड में निवास कर रहे हैं, ये इतने वीर बहादुर हैं, कि आज भी अपने दुश्मनो के साथ लोहा लेते आ रहे हैं, क्योंकि यूरेशियन लोगों ने भारतवर्ष के मूल निवासी नागवंशियों को गुलाम बना कर के रखा हुआ है, जिन की गुलामी को नागा लोग सहन नहीं करते हैं और अपने आप को युरेशियन से मुक्त करने के लिए आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं मगर इन से प्रमाणित हो रहा है, कि नागवंशी लोगों को नया नाम दे कर नागा कह कर सारे संसार को भ्रमित कर के नाग वंश के लोगों को विभाजित किया गया है और उन की नागरिकता को संदेहास्पद बना दिया है। नाग वंश के नौ राजा, महाराजाओं के समकालीन पुराने सिक्के आज भी सुरक्षित रखे ही हैं जिन सिक्कों के ऊपर *बृहस्पति नाग*  कुछ के ऊपर *देवनाग* और कुछ  पर *गणपति नाग* आदि शब्द खुदे हुए हैं। यह नामकरण उन के इतिहास को दर्शाते हैं। नाग शासकों की राजधानियाँ:--- इन नागों की राजधानियां कहां थी? इस का अता पता नहीं लगता है, क्योंकि यूरेशियन आक्रांताओं ने उन सम्पूर्ण इतिहास नष्ट कर दिया है, परंतु साहित्यकार अनुमान लगा रहे हैं, कि उन की राजधानी नरवर थी, मथुरा में भी उन का निवास था। मथुरा में गणपति के नाम का शासन था। मथुरा के लोग धौलपुर, आगरा, ग्वालियर, झाँसी कानपुर और बांदा के इलाकों में निवास करते थे। कुषाण वंश का शासन:--- भारत में युरेशयन लोगों के आगमन के बाद कुषाण भी आए थे। वर्तमान युग में कुषाण जाति के पतन के बाद भारत के उत्तरी भाग में शक्तिशाली नाग वंश का शासन था और इन्हीं को नागवंशी कहा जाता था, जिन्होंने गंगा घाटी के किसानों के साम्राज्य का अंत कर दिया था। ऐतिहासिक प्रमाणों से साबित होता है, कि पद्मावती मथुरा तथा कांतिपुर में नाग वंश के कुल शासन करते थे। मथुरा के नागवंशी शासक बहुत शक्तिशाली थे, इन में पद्मावती का नामक कुल सब से श्रेष्ठ और महत्वपूर्ण था। पद्मावती की पहचान मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित आधुनिक पदमपवैया नामक स्थान से की जाती है। पद्मावती के नाग लोग भारशिव कहलाते हैं, वे अपने कंधों पर भारी शिवलिंग ढोते थे, इसलिए उन्हें भारशिव कहा जाता है। किसान कौन हैं:---- कुषाण शब्द ही विकृत हो कर करसाँण बन गया था और अब हिंदी का विकास होने के बाद इन को किसान कहा जा रहा है, आज जितने भी किसान हैं, वही जाट कहलाए जा रहे हैं। ये जाट ही कुषाण जाति से संबंध रखते हैं। गुप्त वंश का उदय:---- कुषाण वंश के पतन के बाद भारतवर्ष में गुप्त वंश का उदय किया गया है, लगता है की भारत के यूरेशियन आर्य कुषाण और नाग जाति से दुखी रहते थे, इसी कारण उन्होंने गुप्त वंश को इसलिए तैयार किया ताकि वे इन के ही दिशा निर्देशों का पालन करते हुए में नागा और कुषाण किसानों के नाक मे नकेल डाल कर शासन कर सकें और अपने अधीनस्थ काम करने वाले गुप्त वंश को अपनी इच्छा अनुसार प्रयोग कर सकें, अपनी सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकें, इसीलिए चंवर वंश के होनहार लड़के को चाणक्य नामक ब्राह्मण ने राजनीति की शिक्षा दे कर राजनीति में पारंगत कर के उसे राजगद्दी पर बैठा कर अपनी इच्छा अनुसार शासन करवाया था, जिस का प्रमाण हमें सारे भारतवर्ष के इतिहास को टटोलने से मिलता है, क्योंकि ये यूरेशियन लोग भारत के राजाओं को आपस में लड़ा-झगड़ा कर के मरवा देते थे। कहीं साम्राज्य विस्तार करने के नाम पर युद्ध करवा कर दोनों राजाओं को मरवा देते थे, कहीं ये लोग दूसरे राजा की राजकुमारी की सुंदरता का बख़ान कर के उस को पाने के लिए उन्हें उकसाते थे, जिस से राजे और राजकुमार भी उन के बहकावे में आ कर के दूसरे राजा के ऊपर आक्रमण कर देते थे। इस प्रकार दोनों देशों के राजा और राजकुमार मारे जाते थे और उन के छोटे-छोटे राजकुमारों को फिर यूरेशियन लोग राजगद्दी पर बैठा देते थे, इस प्रकार परोक्ष रूप से यही लोग शासन करते थे और आज भी इस के प्रमाण देखे जा सकते हैं। भारत में आज भी यही ब्राह्मण लोग राजपूतों और वाणीयों को आगे कर के परोक्ष रूप से शासन चला रहे हैं। इस नीति के अनुसार सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, साहिब कांशी राम जैसे नेताओं को मौत के घाट उतारा जा चुका है। राम सिंह आदवंशी। हिमाचल प्रदेश।

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