मनुवादी नूरा कुश्ती।

मेरे 85% मूलनिवासी साथियो, सोहम्, जय गुरुदेव! आप सभी को ज्ञात होगा कि कई वर्षों से नेहरू उर्फ गांधी परिवार का कांग्रेस पार्टी के ऊपर एकाधिकार रहा है और इस परिवार ने कांग्रेस पार्टी को अपनी धरोहर मान रखा है। कांग्रेसी लोगों ने नेहरू उर्फ गांधी परिवार को आगे रख कर के 85% मूलनिवासी वोटों के सहारे राज कर के अपने पेट का धंधा चलाया हुआ है, इन स्वार्थी कांग्रेसियों को इस बात से कोई लेना-देना नहीं है, कि नेहरू उर्फ गांधी परिवार का नेतृत्व योग्य है या अयोग्य, बस इन को अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए, इस परिवार के किसी मोहरे की जरूरत होती है और उस मोहरे को ही आगे रख कर ये दो जून का भोजन कमाने के लिए इस परिवार के यसमैन बने हुए हैं। 1947 में जब केंद्रीय अंतरिम सरकार बनी थी, उस में जवाहरलाल नेहरू को ही प्रधानमंत्री बनाया गया था क्योंकि आजादी की लड़ाई के समय महात्मा गांधी ने जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू से यह कमिटमेंट की हुई थी कि आजादी मिलने पर केवल जवाहरलाल नेहरू को ही प्रधानमंत्री बनाया जाएगा, जब कि पहला चुनाव तत्कालीन ओबीसी नेता वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में लड़ा गया था और उन्हीं को ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित किया गया था मगर मनुवादी छल कपट कर के हमेशा सत्ता अपने हाथ में रखते आए हैं, इसी कड़ी में मोहन दास कर्म चन्द गांधी ने बहुमत को ठुकरा कर ब्राह्मणों का राज स्थापित करने के लिए जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया दिया था, जब कि उस से अधिक योग्य और शैक्षिक दृष्टि से भी अधिक योग्य विद्वान डॉक्टर भीमराव अंबेडकर थे, जिन को इन मनुवादी लोगों ने प्रधानमंत्री बनाना पसंद नहीं किया और अगर कहीं सरदार वल्लभभाई पटेल या डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को प्रधानमंत्री बनाया जाता तो आज भारत के ना तो टुकड़े होते और ना ही यह दुर्दशा देखने को मिलती। मनुवादी छल कपट :--- मनुवादी छल कपट 5000 साल वर्षों से चलता आ रहा है, जो आज भी जारी है। मनुस्मृति के अनुसार छद्म शासन करने वाली ब्राह्मणबादी कांग्रेस पार्टी में कभी भी लोकतांत्रिक  ढंग से निष्पक्षता पूर्वक चुनाव नहीं हुए हैं, एक बार महात्मा गांधी की इच्छा के विरुद्ध सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रीय प्रधान बना भी दिया था तो भी गांधी एंड कंपनी ने उन को प्रधान पद से हटा कर के सुख की नींद ली थी। उस के बाद निरंतर आलोकतांत्रिक सिलसिला चलता आ रहा है। जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद, लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बन गए थे मगर उन को सत्ता से हटाने के लिए इन्हीं स्वार्थी लोगों ने नेहरू उर्फ गांधी परिवार में से प्रधानमंत्री बनाने के लिए शास्त्री जी को रास्ते से हटा दिया था और उस समय से ले कर के आज तक कांग्रेस के सवर्ण कार्यकर्ताओं ने हमेशा न्याय का गला घोंट कर के अन्याय का साथ देते हुए नेहरू परिवार को ही आगे रखा हुआ है। कांग्रेस में योग्य नेतृत्व की कमी नहीं है मगर फिर भी कांग्रेसी जुंडली ने हमेशा नेहरू उर्फ गांधी परिवार को ही अपना नेतृत्व सौंप रखा है। विदेशी सोनिया गाँधी को सत्ता सौंप दी मगर सब से योग्य मूलनिवासी बाबू जगजीवन राम को प्रधान मंत्री नहीं बनाया। जब राहुल गांधी राज करने लायक नही था तो डम्मी प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को बना दिया ताकि राहुल को बड़ा होने दिया जाए, अब जब राहुल गांधी और प्रियंका गाँधी बुरी तरह पिट गए तो कांग्रेस पार्टी में लोकतंत्र बहाल करने के लिए चुनाव कराने का ड्रामा शुरु हुआ है। दो-तीन दिन से इस ड्रामे में कई लोगों के नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए आए परन्तु 29 सितंबर को जो नाटक हुआ उस को देख कर के सारा भारत अचंभित है। पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत को मनोनीत किया जा रहा था मगर उस की जुबान फिशल जाने के कारण, वर्तमान कार्यकारी अध्यक्षा श्री मती सोनिया की नजरों से वह गिर गया, उस के बाद दिग्गी राजा दिग्विजय की लॉटरी खुली मगर वह भी अचानक इसलिए बंद हो गई, कि कहीं ये राजपूत भी नेहरू उर्फ गांधी ब्राह्मण परिवार के लिए भष्मासुर ही ना बन जाए। मूलनिवासी को अध्यक्ष पद :--- बड़ी विचित्र और हैरानी की बात है कि कांग्रेस ने पहली दफा किसी अनुसूचित जाति के नेता को कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के लिए निर्णय लिया है मगर इस निर्णय का पोस्टमार्टम किया जाए, तो उस के पीछे वही राज छुपा हुआ है, जो सरदार मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाए जाने पर छुपा था क्योंकि उस समय राहुल गांधी बच्चा था और वह प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के योग्य नहीं था, इसलिए कांग्रेस पार्टी ने केयरटेकर के रूप में प्रसिद्ध अर्थशास्त्र सरदार मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया और उस की कलम बंद कर के मां और बेटा शासन करते रहे मगर आज फिर उसी इतिहास को दोहराया जा रहा है और फिर मूलनिवासी के नाम पर चुनाव लड़ा जाएगा, अगर कांग्रेस पार्टी जीत भी जाएगी तो फिर सरदार पटेल की तरह खड़गे को दो नम्बर पर धकेल कर राहुल को ही प्रधान मंत्री बनाया जाएगा। दूध से मक्खी निकाले जाने की तरह खड़गे को किनारे कर दिया जाएगा, जिस प्रकार 1977 में बाबू जगजीवन राम के नाम पर चुनाव लड़ कर के जनता दल जीता था और बाद में प्रधानमंत्री के चुनाव के समय उन को अंगूठा दिखा कर के मोरारजी देसाई ब्राह्मण को प्रधानमंत्री बना दिया गया था, इस से पहले सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ भी ऐसा ही हुआ था और अब फिर खड़गे के के साथ ऐसा ही होने वाला है, मगर खड़गे को छ्दमी मनुवादी इतिहास की जानकारी खत्म हो चुकी है ,यदि मनुवादी कांग्रेस के इतिहास को याद रखते, तो कभी भी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की कोशिश ना करते और ना ही अपनी फजीहत करवाते, आरक्षण के नाम पर बनने वाले कागजी शेर केवल अपने परिवार को ध्यान में रखते हुए राजनीति करते हैं, इन को अपने मान सम्मान से कोई सरोकार नहीं होता है। इन को तो बस साम, दाम, दंड, भेद नीतियों को अपना कर मनुवादी कार्यकर्ता बन कर अपने परिवारों का पेट पालना है, कांग्रेस पार्टी ने कभी भी अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति का आरक्षण पूरा नहीं किया और मूलनिवासी सांसदों को संसद में बैठा कर के कांग्रेसी अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं मगर इन लोगों ने कभी भी साढ़े बाइस प्रतिशत आरक्षण पूरा नहीं किया केवल और केवल 5/7% आरक्षण लागू कर के 85% मूलनिवासियों के बोट ले कर राज सत्ता का सुख भोगते आए हैं, आज फिर कांग्रेस पार्टी 85% बोटों को हत्थियाने के लिए बेचारे खड़गे को आगे कर के अपनी चुनावी वैतरणी पार करना चाहते हैं, मगर छ्ली मनुवादी कभी भी अनुसूचित जाति ,जनजाति, पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यकों को प्रधानमंत्री पद के ऊपर जरा भी देखना नहीं चाहते हैं। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के पद पर देखने से इन को टेंपरेचर हो जाता है, जिस का प्रमाण पंजाब में चरणजीत चन्नी आप के सामने है, इसलिए कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए जो उठापटक हो रही है, वह तो केवल 85% मूलनिवासियों के साथ एक छलावा हो रहा है, जिस का अंतिम दुष्परिणाम चोर दरवाजे से राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना ही होगा और खड़गे जैसे लोग दिल मसोसकर के किसी कोने में जा करके बैठ जाएंगे, इसलिए सभी 85% मूलनिवासियों को मनुवादियों के छल कपट को समझ कर केवल अपने पांव पर खड़ा होने के लिए, वामन मेश्राम, कमलकांत काले के नेतृत्व को स्वीकार करके बहुजन मुक्ति पार्टी को ही जिताना होगा अन्यथा कांग्रेस और भाजपा आदि मनुवादी दल आप लोगों को मूर्ख बना कर के सत्ता छीन कर आप के नाक में दम करते रहेंगे। राम सिंह आदवंशी। महासचिव, बहुजन मुक्ति पार्टी हिमाचल प्रदेश। 4अक्टूबर 2022.

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